Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


हार के बाद PCC चीफ दीपक बैज बोले – जनता का जनादेश स्वीकार, भाजपा की झूठ के सामने दब गया हमारा सच, मजबूत विपक्ष के साथ जनता की बनेंगे आवाज

  रायपुर.   विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए. उन्होंने कहा, हमें जनता का जनादेश...

Also Read

 रायपुर. विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए. उन्होंने कहा, हमें जनता का जनादेश स्वीकार है. जनता ने हमें जो आशीर्वाद दिया है इसका हम सम्मान करते हैं. भाजपा के झूठ के सामने हमारा सच दब गया. चुनाव परिणाम से हम निराशा हैं, लेकिन हताश नहीं हैं. हम वापस मैदान ए जंग में उतरेंगे.बैज ने कहा, छत्तीसगढ़ की जनता को पांच साल तक सभी वादे मिले, हमें इंतजार रहेगा. कांग्रेस पार्टी ने 5 साल ईमानदारी से काम किया. महिला माता बहने हो, या अनसूचित जाती हो, सभी वर्ग को साथ लेकर चलने का किया है. जिस हिसाब से हम लोगों ने काम किया है, हमें विश्वास था हम लोग यहां सरकार बनाएंगे. कही न कही भाजपा का झूठ भारी पड़ गया. हमारी कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक पार्टी है, हम जनादेश स्वीकार करते हैं.दीपक बैज ने कहा, हम 35 सीटों के साथ विपक्ष में रहेंगे. जनता के मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक उठाने की बात करेंगे. हम मजबूत विपक्ष के साथ जनता की आवाज बनेंगे. कांग्रेस की हार की वजह क्या रही, इसकी समीक्षा की जाएगी. आख़िर इतना अच्छा काम करने के बाद चूक कहां हुई है.



इस्तीफे पर कहा – हाईकमान करेंगे तय

हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा को लेकर बैज ने कहा, हम लोग सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़े. सबके नेतृत्व में चुनाव लड़े हैं. हाई कमान तय करेंगे. बुलडोजर कार्यवाही मामले में दीपक बैज ने कहा, भारतीय जनता पार्टी डराने की राजनीति करते आई है. आईटी – ईडी के माध्य से डराने का काम कर रही है. मैं समझता हूं लोकतंत्र में इसके लिए जगह है.
भाजपा डराने का काम कर रही है.

आदिवासी को सीएम का मौका मिले तो बड़ी बात

भाजपा से आदिवासी चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर दीपक बैज ने कहा, छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र से जनादेश प्राप्त हुआ है. आदिवासी समाज में कई अनुभवी चेहरे रहे हैं. आदिवासी कई बार विधायक, सांसद और मंत्री रहे हैं. छत्तीसगढ़ में आदिवासी को मौका देते हैं तो इससे बड़ी बात क्या होगी.