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प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस)।बैंकिंग, बीमा, आधार नामांकन/, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि सेवाओं सहित 300 से अधिक ई-सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाने की मुहिम

  नई दिल्ली, छत्तीसगढ़। असल बात न्यूज़।। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को सामान्य सेवा केन्‍द्र (सीएससी) के रूप में कार्य करने में सक्...

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नई दिल्ली, छत्तीसगढ़।

असल बात न्यूज़।।

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को सामान्य सेवा केन्‍द्र (सीएससी) के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिएसहकारिता मंत्रालयइलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयनाबार्ड और सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं जो पीएसीएस को देश के ग्रामीण नागरिकों को बैंकिंगबीमाआधार नामांकन/अद्यतनस्वास्थ्य सेवाओंकृषि सेवाओं सहित 300 से अधिक ई-सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाएगा। 30 नवम्‍बर2023 तक देश में कुल 24,470 पीएसीएस ने सीएससी सेवाएं प्रदान करना शुरू कर दिया है।

     सीएससी के रूप में कार्य करने वाला पीएसीएस निम्नलिखित सहित विभिन्न नागरिक केंद्रित सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगा:

  1. प्रधानमंत्री कल्याण योजनाएँ: आयुष्मान भारत योजनापीएम किसान मानधन योजनापीएम फसल बीमा योजनापीएम किसान क्रेडिट कार्ड योजनाई-श्रम पंजीकरणपीएम किसान सम्मान निधि योजना आदि।
  2. केन्‍द्र सरकार की सेवाएँ: आधारपैन कार्डजीवन प्रमाणपासपोर्टजल और बिजली बिल भुगतान सेवाएँआईटीआर फाइलिंगई-स्टाम्पआदि।
  3. राज्य सरकार की सेवाएँ: ई-जिला सेवाएँपीडीएस सेवाएँनगरपालिका सेवाएँआदि।
  4. वित्तीय समावेशन सेवाएँ: बैंकिंगऋणबीमापेंशनडिजीपेफास्टैगआदि।
  5. कृषि सेवाएँ: सीएससी ई-कृषि पोर्टलकृषि टेली-परामर्श और ई-पशु चिकित्सामृदा परीक्षण केन्‍द्रकिसान ई-मार्टकिसान क्रेडिट कार्डआदि।
  6. ई-मोबिलिटी और स्मार्ट उत्पाद: ग्रामीण ई-मोबिलिटी डीलरशिपस्मार्ट उत्पादआदि।
  7. अन्य सेवाएँ: स्त्री स्वाभिमान पहलस्पर्श रक्षा पेंशन सेवा पोर्टलमोबाइलडीटीएच रिचार्ज और बिल भुगतानआदि।

इस पहल के माध्यम सेदेश के किसान पीएसीएस स्तर पर ऊपर उल्लिखित सेवाओं सहित 300 से अधिक ई-सेवाओं तक पहुंच प्राप्त कर सकेंगे। इससे उनके जीवनयापन में आसानी होगी। इसके अलावायह पीएसीएस को आय के अतिरिक्त स्रोत प्रदान करेगाजिससे अंततः उनसे जुड़े करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों को लाभ होगा।

यह बात सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कही।