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67 साल में 14 प्रधानमंत्रियों ने 55 लाख करोड़ का कर्ज लिया, 9 साल में मोदी ने 100 लाख करोड़ का कर्ज लिया - कांग्रेस

  रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वो कीर्तिमान स्थापित किया है, जो...

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रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वो कीर्तिमान स्थापित किया है, जो इस देश के 14 प्रधानमंत्री उनसे पहले नहीं कर पाए हैं। इस देश के 14 प्रधानमंत्रियों ने कुल मिलाकर मात्र 55 लाख करोड़ रुपए का कर्जा लिया, 67 साल में 14 प्रधानमंत्रियों ने कुल 55 लाख करोड़ का कर्जा लिया और हर बार रेस में आगे रहने की चाहत वाले नरेन्द्र मोदी जी ने पिछले 9 साल में हिन्दुस्तान का कर्जा तिगुना कर दिया, 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्जा उन्होंने मात्र 9 साल में ले लिया, कहां 67 साल में 55 लाख करोड़ लिया गया था, तो एक नया कीर्तिमान उन्होंने वो स्थापित किया जो इस देश के 14 और प्रधानमंत्री नहीं कर पाए। इस ऋण को चुकाने में हर साल 11 लाख करोड़ का तो ब्याज ही दिया जा रहा है। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 में ही ऋण स्थिरता नकारात्मक हो गई थी, जबकि तब सरकारी कज़ऱ् जीडीपी का 52.5 प्रतिशत था जो अब बढ़ कर 84 प्रतिशत आ पहुँचा है - इसीलिए ऋण चुकाने की क्षमता भी अब संदिग्ध है।

शुक्ला ने कहा कि अगर इस समय, इस वक्त, इस सेकण्ड पर एक बच्चा इस देश में पैदा हो रहा है तो उसके सिर पर भी 1,20,000 रुपए का कर्जा लादने का काम मोदी सरकार ने पिछले 9 साल में किया है और अगर और सिम्पली बोलने पर आ जाऊं तो हर सेकंड इस सरकार ने 4 लाख रुपए का कर्जा लिया है, हर मिनट पर लगभग ढाई करोड़ का लिया है, हर घंटे पर 144 करोड़ का कर्जा लिया है, 3,456 करोड़ का कर्जा हर दिन लिया है, हर महीने 1 लाख करोड़ से ज्यादा और हर साल लगभग साढ़े बारह लाख करोड़ का कर्जा लिया है इसीलिए 9 सालों में 100 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्जा लेने का कीर्तिमान और इस देश के लोगों को कर्जे के बोझ तले दबाने का कीर्तिमान नरेन्द्रढ मोदी ने स्थापित किया है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बात-बात पर बाक़ी देशों का हवाला देने वाली इस सरकार का कड़वा सच यह है कि भारत का ऋण और जीडीपी का अनुपात 84 प्रतिशत से ज़्यादा है जबकि बाक़ी विकासशील/उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का औसतन अनुपात 64.5 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि पर बड़ा सवाल तो यह भी है कि इस बढ़ते हुए कजऱ् से फ़ायदा किसको हो रहा है, क्योंकि एक बात साफ़ है कि इस भयावह कज़ऱ् के बोझ के तले देश का आम आदमी दबा ज़रूर है लेकिन इसका लाभ ना तो गऱीब को, ना मध्यम वर्ग को बल्कि सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रधानमंत्री के चंद पूंजीपति मित्रों को ही मिल रहा है। 23 करोड़ लोग गऱीबी की सीमा रेखा से नीचे हैं, 83 प्रतिशत लोगों की आय घटी है, एक साल में कऱीब 11,000 से ज़्यादा लघु मध्यम उद्योग (रूस्रूश्व) बंद हो गए हैं लेकिन देश भर में अरबपतियों की संख्या 2020 में 102 से बढ़कर 2022 में 166 हो गई।