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प्रोजेक्ट उन्नति से प्रशिक्षण के बाद पशुपालन कर लाभांवित हो रहा है छत्रपाल का परिवार

  कोरिया, कोरिया जिले के जनपद पंचायत सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत केशगंवा में रहने वाले एक वनाधिकार पत्रक धारी सामान्य किसान का जीवन अब सामान...

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कोरिया, कोरिया जिले के जनपद पंचायत सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत केशगंवा में रहने वाले एक वनाधिकार पत्रक धारी सामान्य किसान का जीवन अब सामान्य परिश्रम और बेहतर तकनीक से उन्नति की राह पर चल रहा है। पहले केवल अकुशल रोजगार पर आश्रित रहने वाले परिवार के पास स्वयं का ही पर्याप्त कार्य है और वह गौपालन के साथ सब्जी उत्पादन करके अपने परिवार के लिए आसानी से जीवन यापन की व्यवस्था कर पा रहे हैं। कोरिया जिले में महात्मा गांधी नरेगा के तहत पंजीकृत श्रमिक के रूप में दैनिक मजदूरी पर आश्रित श्री छत्रपाल स्वयं बतलाते हैं कि पहले वह केवल महात्मा गांधी नरेगा से मिलने वाले अकुशल श्रम पर ही आश्रित रहते थे।

 वनाधिकार पत्रक धारी सामान्य किसान

वह लगातार अकुशल श्रम करने के परिणामस्वरूप प्रोजेक्ट उन्नति के लिए चयनित हुए और उन्हे वर्ष 2021-22 में जनपद पंचायत स्तर पर एक प्रशिक्षण लेने का मौका मिला। इससे उन्हे पशुपालन करने के पारंपरिक तरीकों में सुधार करने की सीख मिली। उसके बाद श्री छत्रपाल ने अपने परिवार के साथ बकरी पालन और गौ पालन को व्यवसायिक तरीके से करना प्रारंभ कर दिया। अब उनके पास 10 दुधारू गाय और 21 से ज्यादा बकरे बकरियां हैं। इससे उन्हे प्रतिमाह 10 हजार रूपए से ज्यादा की औसत आमदनी प्राप्त होने लगी है। कुल आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त छत्रपाल के परिवार में माता और पिता के साथ कुल आठ लोगों का परिवार है। इन्हे शासन की कई व्यक्तिगत हितकारी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। इनके पूर्वज लंबे समय से वनक्षेत्र में काबिज थे जिससे इन्हे एक हेक्टेयर भूमि का वनाधिकार पत्रक प्राप्त हुआ है। इस भूमि का समतलीकरण महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से हो चुका है और वह इसमें दो फसल ले रहे हैं। ग्राम गोठान में इनकी पत्नी श्रीमती चमेली और माता श्री मती वर्मी कंपोस्ट उत्पादन से जुड़ी हुई हैं। गौपालन से होने वाले गोबर को यह गौठान में बेचते हैं जिससे इन्हे दोहरा लाभ हो रहा है। घर के समीप बाड़ी विकास का लाभ ले ते हुए इस परिवार ने सब्जी उत्पादन भी बेहतर तरीके से प्रारंभ कर दिया है पहले इन्हे पानी के लिए दिक्कत होती थी परंतु ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर इन्हे व्यक्तिगत तौर पर कूप निर्माण की स्वीकृति मिल गई जिससे इनके बाड़ी में सिंचाई की सुविधा बढ़ गई और अब सब्जी उत्पादन से ही यह परिवार प्रति माह 4 से 6 हजार रुपए का सब्जी उत्पादन करने लगा है। अब इस परिवार के लिए खेती बाड़ी और पशुपालन ही मुख्य व्यवसाय हो चुका है और पूरा परिवार खुशहाली की राह पर है।