भिलाई। असल बात न्यूज़। स्वामी श्री स्वरूपांनद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई के हिन्दी विभाग एवं राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के संयुक्त तात...
भिलाई। असल बात न्यूज़।
स्वामी श्री स्वरूपांनद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई के हिन्दी विभाग एवं राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के संयुक्त तात्वावधान में ‘‘महात्मागांधी, शिक्षा और साहित्य के परिपे्रेक्ष्य में’विषय पर एक दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. शैलेन्द्र शर्मा, अध्यक्ष हिन्दी अध्ययनशाला विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, विशेष अतिथि डा. शहाबुद्दीन शेख कार्यकारी अध्यक्ष, नागरी लिपि परिषद् पूणे, विशिष्ट अतिथि डा.प्रभु चौधरी सचिव राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन, मुख्य वक्ता डा. सुरेशचंद्र शुक्ल साहित्यकार और अनुवादक ओस्लो नार्वे थे। कार्यक्रम की अध्ययक्षत डा. दीपक शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय ने की महाविद्यालय की प्राचार्य डा. हंसा शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित रहीं कार्यक्रम की संयोजिका डा. सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी व तकनीकी सहयोग स.प्रा. निषा पाठक व स.प्रा. टी बबीता ने प्रदान किया।
कार्यक्रम के उद्धेशयों पर प्रकाश डालते हुये डा. सुनीता वर्मा ने कहा जीवन के विविध पहलूओं पर महात्मा गांधी का चिंतन विशाल था उन्होंने सत्य के प्रयोग में अपनी भूलों का सार्वजनिक रूप स्वीकार किया है गांधी जी का जीवन चरित्र उन्हें वैरिस्टर मोहनदास गांधी से महात्मा एवं बापू संबोधन तक ले जाता है और यही व्यक्तित्व और जीवन दर्शन की गहरीछाप लगभग सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य पर पड़ी, साथ ही उनका शिक्षा सिद्धांत व्यवहारिक मूल्यों पर आधारित व स्वरोजगार मूलक था महात्मागांधी अब गुजरते वक्त के साथ प्रासंगिक होते जा रहे है।
डा. प्रभु चौधरी आमंत्रित अतिथियों का परिचय कराया व विषय की उपादेयता पर प्रकाश डाल व बताया गांधी व्यक्ति नहीं युग थे आज जब चारों ओर हिंसा की भावना बलवती हो रही है तब हमें गांधी के चिंतन व मूल्य आधारित षिक्षा की आवशयकता है।
विशिष्ट अतिथि डा. शहाबुद्दीन शेख ने महात्मा गांधी के शिक्षा सिद्धांतों की विवेचना की कहा महात्मा गांधी की धारणा थी शिक्षा सरकार की अपेक्षा समाज के अधीन होना चाहिए। 14 वर्ष तक अनिवार्य सही शिक्षा व शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए क्योंकि मातृभाषा में शिक्षा होने से बच्चों का सर्वागींण विकास होता है साथ ही शिक्षा ऐसी हो जो बच्चें को आत्म निर्भर बनाये अतः गांधी जी का मत था व्यवहारिक व बुनियादी शिक्षा दी जानी चाहिये।
मुख्य वक्ता डा. सुरेशचंद्र शुक्ल ने कहा नार्वे में स्थान-स्थान पर गांधी की प्रतिभा है व लोग महात्मा गाँधी व उनके सिद्धांतों से परिचित है वास्तुतः गांधी युग पुरुष थे प्राणी मात्र के प्रति साकारात्मक चिंतन ही अहिंसा है स्वीकार करते थे। मन, वचन व कर्म से किसी के प्रति हिंसा न करे यही अहिंसा का सच्चा मार्ग है।
मुख्य अतिथि डा. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने अपने उदृबोधन में महात्मा गांधी विचार और नवाचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी व बताया महात्मागांधी चाहते थे विद्यार्थियों को मातृभाषा में शिक्षा दी जानी चाहिये क्योंकि हम अपने भाषा व विचारों को मातृभाषा में अच्छे से व्यक्त कर सकते है। आज देश में 80 से 90 प्रतिषत आबादी कृषि कार्यों से जुडे़ हुये है पर हम कृषि पर कोई शिक्षा नहीं देते। उन्होने बताया जो साहित्य भाषा देश, संस्कृति के प्रति सम्मान जागृत करे वहीं वास्तविक साहित्य है, पाश्चात्य शिक्षा प्रणाली हमारे संस्कृति के प्रति हमें तिरस्कार करना सिखती है।
प्राचार्य डा. हंसा शुक्ला ने कहा साहित्य में गांधी जी के विचारों व सिद्धांतों को महत्वपूर्ण स्थान मिला, गांधी के विचारों को हम पढ़ रहें है पर हम उन्हें जी नहीं रहे है जीवन में गांधी के सिद्धांतों को समावेश करना होगा गांधी जी प्रार्थना पर बहुत भरोसा करते थे प्रार्थना में बहुत बल होता है।
डा. दीपक शर्मा , ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में हिन्दी विभाग की सराहना करते हुये कहा गांधी जी ज्ञान आधारित शिक्षा के स्थान पर आचरण आधारित शिक्षा के समर्थक थे वे शिक्षा को सर्वांगीण विकास के शश्क्त माध्यम मानते थे। वर्धा योजना में वे प्रथम सात वर्ष निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा पर बल दिया। प्रारंभिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा व राष्ट्रीय एकता के लिये कला सात तक हिन्दी भाषा में ही शिक्षा प्रदान करने के पक्ष में थे। वे बुनियादी शिक्षा के द्वारा विद्यार्थियों में कौशल विकसित करना चाहते थे जिससें विद्यार्थी लघु व कुटीर उद्योगों के माध्यम से स्वावलंबी बन सकें।
डा. मीता अग्रवाल, शासकीय महाविद्यालय रायपुर डा. मीना सोनी विमेंष महाविद्यालय उड़ीसा, डा. शमा ए बेग स्वरूपानंद महाविद्यालय भिलाई ने अपने शोधपत्र पढ़े। 500 से अधिक शोधार्थी, विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मंच संचालन डा. सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी व धन्यवाद ज्ञापन डा. शमा ए बेग विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलाजी ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक/प्राध्यापिकाएं शामिल हुये।


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