देश-विदेश से इतने सारे कलाकार पहुंचे हैं कि राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव में आप का मन मोह लेंगे

 

*राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में आ से शुरू होने जा रहा है राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव

*मुख्य मंच, विभिन्न विभागों के मंडप, स्टालों, प्रवेश द्वारों को दिया गया है भव्य रूप 

    रायपुर।

असल बात न्यूज़। 

00 राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव पर विशेष 

     00  अशोक त्रिपाठी

दस से अधिक देशों के वे कलाकार यहां प्रस्तुतियां देने जा रहे हैं जिनके अद्भुत नृत्य, गीत संगीत, डांस कला को देखने की आपके मन में सदैव इच्छा  रही है। निश्चित रूप से ऐसे कलाकारों की प्रस्तुतियों को आप निकट से देखना चाहते रहे होंगे। इसकी इच्छा सदैव आपके मन में बनी रही होगी। अब यह सब संभव नहीं जा रहा है यहां छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का साइंस कॉलेज मैदान एक बार फिर से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में। यहां मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट जैसे देशों के लोकप्रिय जनजातीय कलाकार अपनी प्रस्तुति देने पहुंच चुके हैं। संपूर्ण छत्तीसगढ़ इन लोक कलाकारों का स्वागत करता नजर आ रहा है और उनकी प्रस्तुतियों को देखने का इच्छुक  है। 

दूसरे देशों के प्रख्यात कलाकारों की परिस्थितियों को देखने पहुंच पाना सबके लिए आसान नहीं होता। लेकिन इस मंच से वास्तव में देखने को मिल सकेगी कई देशों के मशहूर लोक कलाकारों की आकर्षक शानदार प्रस्तुतियां। मन को मोह लेने वाली यह कलाकार यहां नृत्य महोत्सव में बिखेरेंगे नृत्य की मनमोहक छटा ।मंगोलिया जैसे दूरस्थ देश का नर्तक दल भी यहां  राजधानी पहुंच गया है।टीम लीडर श्री एंखबोल्ड टुमूरबातर ने बताया कि हम अपनी कला और संस्कृति से छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों एवं अन्य विदेशी मेहमानों के दिल में जरूर स्थान बनाने में सफल होंगे। इस महोत्सव में मंगोलिया के सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लेना हम सब के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि उनके दल में 10 सदस्य हैं जिसमें 5 महिलाएं और 5 पुरुष शामिल हैं। 

मिस्र के कलाकारों का दल भी राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में अपनी छटा बिखरने  राजधानी रायपुर पहुंच गया है। मिस्र के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ में उनकी कला के प्रदर्शन के लिए मंच प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। इन कलाकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अपनी संस्कृति साझा करने का अवसर मिल रहा है। साथ ही इस आयोजन में उन्हें देश-विदेश के कलाकारों से भी मिलने का और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर मिलेगा। गौरतलब है कि मिस्र से 23 सदस्यीय कलाकारों का दल यहां आया है, जिसमें 9 महिलाएं  और 14 पुरुष शामिल है।

इस आदिवासी नृत्य महोत्सव में मोजाम्बिक, टोगो, मंगोलिया, रूस, इंडोनेशिया, सर्बिया, न्यूजीलैंड, इजिप्ट और मालदीव कलाकारों सहित देश के विभिन्न राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लगभग 15 सौ कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।

उड़ीसा की घुमंतु जनजाति के अद्भुत क्षमता वाले लोक कलाकार भी यहां लकड़ी और चमड़े से बने वाद्ययंत्रों के साथ मनमोहक प्रस्तुति देने वाले हैं।  उड़ीसा के घुडका जनजाति के ये कलाकार इस नृत्य महोत्सव में पहली बार अपनी प्रस्तुति जने यहां पहुंच गए हैं। ये कलाकार मुख्य मंच पर घबुकुडु नृत्य की प्रस्तुति देंगे। 

हम आपको बता दें कि घबुकुडु नृत्य में लगभग 22 कलाकार अपने परंपरागत् परिधानों में सज-धजकर घुडका गीत गाते हुये नृत्य करते हैं। इस नृत्य में लकड़ी और चमड़े से बने वाद्य यंत्र घुडका का उपयोग किया जाता है। नृत्य में पुरूष और महिला दोनों शामिल होते है। नृत्य समूह के मुखिया सुश्री रीमा बाघ ने बताया कि महिलायें कपटा (साड़ी), हाथों में भथरिया और बदरिया, गले में पैसामाली, भुजाओं में नागमोरी पहन कर नृत्य करती है। इसी प्रकार पुरूष लंगोट (धोती) और सिर में खजूर की पत्ती से बनी टोपी विशेष रूप से पहनते है। उन्होंने बताया कि घुडका जनजाति घुमन्तु प्रजाति है, इस नृत्य का प्रदर्शन वे जंगल से बाहर भ्रमण के दौरान आम जनता के समक्ष नृत्य करते हैं।

  महोत्सव में झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम की हो सांस्कृतिक दल के लोक कलाकार "हो नृत्य" की प्रस्तुति देंगे। झारखंड की परंपरा में इस नृत्य में फसल की बुआई से लेकर फसल की कटाई एवं उसके पश्चात की सभी गतिविधियों को पारंपरिक वाद्ययंत्रों की संगीतमय प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया जाता है। दल के निर्देशक श्री सोमाय देवगम एवं जुलियानी कोड़ा ने बताया कि झारखंड की लोक परंपरा में हो लोकनृत्य जनजातीय हो त्यौहार के अवसर पर किया जाता है। जिसमें खेती की बुआई, कटाई और इस दौरान लोकजीवन की प्रमुख गतिविधि, विविध परंपराओं से जुड़े रिवाजों को अभिव्यक्त किया जाता है, यह नृत्य लोकजीवन की शैली का प्रतिबिंब है।

हो लोक नृत्य लगभग 20-30 मिनट तक प्रस्तुत किया जाता है। मूलतः 21 लोगों का समूह इस नृत्य को प्रस्तुत करते हैं, जिसमें 14 महिलाएं एवं 7 पुरुष लोक कलाकार शामिल होते हैं। इस नृत्य की शुरुआत झारखंडी जोहार से होती है, जिसमें दर्शकों का लोकरीति से स्वागत एवं अभिनंदन किया जाता है। इसके पश्चात मांगे पर्व, बाहा पर्व, जंगल में शिकार का दृश्य, गोबर का छिड़काव, धान बुनना, धान रोपना, हेरोअः पर्व, धान काटना, मछली पकड़ना, नहाना, फूल तोड़कर लगाना, हड़िया पिलाना, जोड़ी बनाना, संदेश, परिवार नियोजन, अंतिम सलामी और टाटा-टाटा इस नृत्य में प्रस्तुतियों के अलग-अलग चरण हैं। 

नागालैंड से 20 सदस्यीय नृत्य दल यहां वार डांस प्रस्तुति देने के लिए पहुंचा है ।अपने दुश्मनों से लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले नागालैंड के आदिवासी वारियर पूरी तैयारी के साथ वार डांस का प्रदर्शन करेंगे । इनकीवेशभूषा खास आकर्षण का केंद्र है। बाघ के नाखून, भाला और तीर का कलात्मक प्रदर्शन करेंगे।

झारखंड से आए “हो सांस्कृतिक दल” के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ आने पर प्रशंसा जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा के विषय में बहुत सुन रखा था, आज यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है, हम सभी अपनी प्रस्तुति के लिए उत्साहित हैं। 

 राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में हिस्सा लेने राजस्थान से पहुंचे कलाकार घुमरा नृत्य का प्रदर्शन करेंगे। ये लोक नृत्य शुभ अवसरों पर किया जाता है। दक्षिणी राजस्थान में भील जनजाति इस नृत्य को करते हैं।