अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के अत्याचारों के अधीन वाले जिलों की सूची में दुर्ग जिला भी शामिल

नई दिल्ली, छत्तीसगढ़।

असल बात न्यूज़।। 

देश में अनुसूचित जाति और जनजाति के सदस्यों पर अत्याचार होने की आशंका के अधीन के रूप में पहचाने गए जिलों में छत्तीसगढ़ राज्य के भी दो जिलों को शामिल किया गया है। इसमें आश्चर्यजनक तरीके से दुर्ग जिला का नाम भी शामिल है। आश्चर्यजनक इसलिए, क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य में दुर्ग जिले की तुलना में दूसरे कई सारे जिले हैं जहां आनुपातिक तौर पर अनुसूचित जाति और जनजाति के सदस्यों की संख्या काफी अधिक है। दूसरी ओर दुर्ग जिले में साक्षरता का प्रतिशत भी काफी अधिक है। दुर्ग जिले के साथ छत्तीसगढ़ राज्य के बलरामपुर जिले को भी इस सूची में शामिल किया गया है।इन जिलों में सरकार के द्वारा इस वर्ग के संरक्षण और सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।


अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) {पीओए} अधिनियम, 1989 और पीओए नियम, 1995 के नियम 3(1) (i) की धारा 21 (2) "पहचाने गए क्षेत्रों" के परिसीमन के उद्देश्य के लिए निर्दिष्ट करती है। आमतौर पर "अत्याचार प्रवण क्षेत्रों" के रूप में जाना जाता है। जहां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्य अत्याचारों के अधीन होने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों को अपनाने की अधिक जरूरत हैं। 

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियम, 1995 के नियम 8 के अनुसार राज्य सरकार को राज्य मुख्यालय में एक डीजीपी, एडीजीपी/आईजीपी के प्रभार के तहत एक अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठ स्थापित करने की आवश्यकता है।

अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए, अधिनियम अर्थात् "अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989" लागू है। अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (पीओए) नियम, 1995 भी बनाए गए हैं।

राज्यवार चिन्हित अत्याचार संभावित क्षेत्रों का विवरण 


एस


चिन्हित जिला

जिले के भीतर विशिष्ट क्षेत्र, अत्याचार संभावित क्षेत्रों के रूप में पहचाने गए

1.

दुर्ग जिला

10

2.

बलरामपुर जिला

91

 

कुल

101