छत्‍तीसगढ़ में आज से खुलेंगे सभी स्कूल

 


रायपुर. गर्मियों की छुटि्टयां खत्‍म हो चुकी हैं। गुरुवार से राजधानी समेत छत्‍तीसगढ़ के सभी सरकारी स्कूल खुल जाएंगे। गर्मी के चलते कुछ निजी स्कूलों ने 20 जून से स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। कोरोना के चलते पहली और दूसरी के बच्चे पहली बार प्रवेश उत्सव के दिन स्कूल पहुंचेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के संदेश का वाचन किया जाएगा। प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों में 15 साल से बंद 260 स्कूलों में फिर घंटी बजेगी।

मुख्यमंत्री दोपहर 1.30 बजे अपने निवास कार्यालय से आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में प्रदेश के स्कूलों में शाला प्रवेश उत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम का प्रदेश के चयनित मुख्य स्कूलों में सीधा प्रसारण किया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यक्रम में बटन दबाकर नक्सल प्रभावित चार जिलों- सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर में बंद पड़े 260 स्कूलों को फिर से शुरू करेंगे। इन स्कूलों से 11 हजार 13 बच्चों को शिक्षा का लाभ मिलेगा। बीजापुर जिले में सबसे अधिक 158, सुकमा जिले में 97, नारायणपुर जिले में चार और दंतेवाड़ा जिले में एक बंद स्कूल फिर से खोला जा रहा है। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ महतारी और स्वामी आत्मानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

मुख्यमंत्री इस मौके पर पुन: खोले जा रहे स्कूलों के अभिभावकों और बच्चों से आनलाइन सीधा संवाद करेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री डा. प्रेमसाय सिंह टेकाम और बीजापुर के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा भी कार्यक्रम को सम्बोधित करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विद्यार्थियों का स्वागत और पुस्तक वितरण करेंगे। प्रवेश उत्सव आयोजन के लिए जारी निर्देश में कहा गया है कि सत्र की शुरूआत एक उत्सव के रूप में हो। बच्चों में अभिभावकों के लिए यह दिन विशेष तौर पर यादगार बन सके।

इसके लिए राज्य स्तर पर चयनित किसी एक स्कूल में, सभी जिला और विकासखंडों में किसी एक चयनित स्कूल में, सभी संकुलों में और सभी स्कूलों में अपने-अपने स्तर पर अपनी-अपनी क्षमतानुसार प्रवेशोत्सव का आयोजन किया जाए। स्कूलों में राजगीत, राष्ट्रगान, अतिथियों का स्वागत और स्वागत गीत भी होंगे। बच्चों को मिठाई, गुलाल, पुस्तक और यूनिफार्म वितरण कर सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा महतारी दुलार योजना, साइकिल, विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के लिए आवश्यक संसाधन, प्रतीकात्मक छात्रवृत्ति का वितरण भी किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्‍ला ने कहा कि स्कूल खोलने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में बच्चों को प्रवेशोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण और लाकडाउन के कारण पिछले दो साल से स्कूल नियमित नहीं चल पाए। नए शिक्षा सत्र की शुरूआत हम इसी उम्मीदों के साथ कर रहे हैं कि पिछले साल के नुकसान की भरपाई हो सके। बच्चों के पढ़ने -बढ़ने में कोई बाधा न हो। उन्होंने संदेश में लिखा है कि इस सत्र से छह हजार से अधिक स्कूलों में बालवाड़ी खोलने का निर्णय लिया गया है ताकि कम उम्र से ही बच्चे शिक्षा को आत्मसात कर सकें। नक्सल प्रभावित जिलों में 15 साल से बंद स्कूलों को खोलने के लिए स्थानीय समुदाय और अभिभावकों की मदद ली जा रही है।

इधर, स्कूल शिक्षा विभाग की तैयारी अभी भी आधी-अधूरी है। किताबें तो लगभग सभी स्कूलों में पहुंच गई हैं पर बच्चों के यूनिफार्म अभी एक जोड़ी ही पहुंचे हैं। वहीं साइकिल अभी नहीं मिल पाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जल्द यूनिफार्म और साइकिल बांटने के लिए कोशिश की जा रही है।