भिलाई 3 चरौदा में महापौर के चुनाव में जमकर रस्साकशी खींचातानी होने की संभावना, किसी राजनीतिक दल के पास नहीं है पूर्ण बहुमत, निर्दलीयों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

 रायपुर, दुर्ग।

 असल बात न्यूज़।। 

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         00 अशोक त्रिपाठी

स्थानीय निकाय के चुनाव में बैकुंठपुर जिले मे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में आज हुई क्रास वोटिंग जिससे कांग्रेस को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है पूरे प्रदेश में चर्चा में है। जहां बहुमत का अंतर बहुत कम है, अथवा बहुमत हासिल करने के लिए गठबंधन करने की जरूरत पड़ रही है उन स्थानीय निकाय क्षेत्रों में भारी कशमकश की स्थिति बनी हुई है, तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सत्ता प्राप्त करने के लिए किस से समर्थन मिल सकता है इसका गुड़ा भाग किया जा रहा है तो वही पार्टियों मे क्रास वोटिंग की पहले से आशंका जाहिर की जा रही है अथवा विरोधी पक्ष के द्वारा इसका दावा किया जा रहा है। कल यानी कि 3 जनवरी को दुर्ग जिले के नगर निगम भिलाई 3 चरौदा में महापौर पद का चुनाव होने जा रहा है।  इस चुनाव की और भी पूरे प्रदेश के लोगों की नजर लगी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर लगी हुई है क्योंकि यहां किसी भी राजनीतिक दल को अपनी सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत हासिल नहीं है। कांग्रेस यहां जरूर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई है लेकिन उसके पास इतनी संख्या नहीं है कि वह अकेले अपने दम पर यहां सरकार बना सकेगी। ऐसे में आशंका जाहिर की जा सकती है कि यहां भारी उठापटक हो सकता है, आपसी खींचातानी बढ़ सकती है। और ऊंट किस करवट बैठेगा यह कहना अभी मुश्किल है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि भारतीय जनता पार्टी भी इस पूरे घटनाक्रम पर पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और उसके द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि उसकी उम्मीदें अभी भी बची हुई हैं। 

दुर्ग जिला मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गृह जिला है इसलिए यहां की पूरी राजनीतिक गतिविधियों पर, पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरे प्रदेश के लोगों की, राजनीतिक विश्लेषकों की नजर लगी हुई है। कांग्रेस पर शुरू से दबाव रहा है कि  कम से कम इस जिले में वह स्थानीय निकाय के चुनाव में अपनी सरकार जरूर बना सके। उसे यहां जहां तीन नगर निगम के चुनाव हुए हैं उसमें से नगर निगम भिलाई और नगर निगम रिसाली में पूर्ण बहुमत मिला है लेकिन भिलाई 3 चरौदा में  कांग्रेस पूर्ण बहुमत नहीं हासिल कर सकी है। यहां पूर्ण बहुमत हासिल करने में वह 2 वोटों से पीछे रह गई है।  पूरे चुनाव परिणाम घोषित हो जाने के बाद उसके कुल 19 पार्षद ही चुनाव जीत सके हैं जबकि यहां स्थानीय सत्ता में सरकार बनाने के लिए कुल 21 पार्षदों को होना जरूरी है। कहा जा रहा है कि  किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के चलते चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद दूसरे दिन से यहां नवनिर्वाचित पार्षदों को अपने पक्ष में करने उठापटक की राजनीति तेज हो गई है। इस नगर निगम में अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही है ऐसे में कहा जा रहा है कि वह भी पूरा जोर लगाने में कहीं पीछे नहीं रहेगी कि इस निगम में फिर से उसकी सरकार बन सके। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इससे क्षेत्र के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मंत्री व विधायक बृजमोहन अग्रवाल को चुनाव प्रभारी बनाया है। बृजमोहन अग्रवाल को चुनाव  जिताऊ नेता माना जाता है लेकिन भाजपा को फिलहाल यहां 16 सीटें हासिल कर संतोष करना पड़ा है दूसरी तरफ इस नगरीय  निकाय क्षेत्र में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल का भी अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। जब यह क्षेत्र नगर पालिका परिषद था तब वे उसके पहले अध्यक्ष रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस पर भी लगी हुई है कि वे पार्टी के पक्ष में क्या कोई चौंकाने वाला  परिणाम लाने की कयावद कर सकते हैं।

भिलाई चरोदा में महापौर पद के निर्वाचन के लिए निश्चित रूप से अनिश्चितता की स्थिति है। किसी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। गठजोड़ कर यहां सरकार बनानी पड़ेगी और सरकार चलानी पड़ेगी। ऐसे में यहां कल क्या होने जा रहा है ? कल क्या होगा ? यह कुछ भी कह पाना आसान नहीं है कुछ भी स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस और भाजपा दोनों  ही में में जबरदस्त गहमागहमी मची हुई है। लेकिन कांग्रेसी खेमे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस पूरी उम्मीद से लबरेज है। उसे पूरा भरोसा है कि कांग्रेसी ही यहां सरकार बनाएगी। बताया बताया जा रहा है कि राजनीतिक दलों के द्वारा चुनाव परिणाम आने के तत्काल बाद से नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षदों को टटोलने की कोशिश की जा रही है उनके मन को भांपने की कोशिश की जा रही  है कि क्या वे महापौर पद पर समर्थन कर सकते हैं अथवा वे किसके साथ जा सकते हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों की निगाहें उन नवनिर्वाचित पार्षदों की ओर जरूर लगी रहेगी जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दी थी और तब उन लोगों ने बागी होकर चुनाव लड़ा, पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है कहां जा रहा है कि अब पार्टियां फिर उन नवनिर्वाचित पार्षदों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है उनका मन टटोलने की कोशिश की जा रही है और  ऐसे नवनिर्वाचित पार्षदों को अपने साथ अपने पार्टी में फिर से वापस आने की कोशिश की जा सकती है। हम आपको बता दें कि यहां छह निर्दलीय पार्षदों ने जीत हासिल की है। यह एक बड़ी संख्या है। महापौर अपना महापौर बनाने के लिए कांग्रेस को दो और पार्षदों की जरूरत पड़ेगी। इन नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षदों की इस चुनाव में महापौर के चुनाव में निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है।  भारतीय जनता पार्टी को सभी  नवनिर्वाचित पार्षदों का समर्थन मिलता है उस हालत में वह यहां अपना महापौर बना सकेगी। राजनीति में कुछ भी संभव हो सकता है लेकिन यह आसान नजर नहीं आता।

कांग्रेस ने नगर पालिका बैकुंठपुर, शिवपुर, चरचा में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन में हुई क्रॉस वोटिंग की जांच हेतु समिति का गठन कर दिया है। लेकिन यहां जो क्रास वोटिंग हुई है जिससे कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा है उसका संदेश दूर-दूर तक गया है। कांग्रेस के द्वारा इस क्रॉस वोटिंग की घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर जमकर आरोप लगाए गए हैं और तीखा प्रहार किया गया है।

दुर्ग जिले में स्थानीय निकाय के सबसे बड़े चुनाव का परिणाम आ जाने के बाद अब कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यहां सबसे पहले नगर निगम भिलाई 3 चरोदा के महापौर और स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यहां 3 जनवरी को नवनिर्वाचित पार्षदों का शपथ ग्रहण कराया जाएगा। इसका कार्यक्रम प्रातः 10:00 बजे से शुरू हो जाएगा। इसके पश्चात वहां महापौर और स्पीकर अध्यक्ष पद के निर्वाचन के लिए प्रक्रिया शुरू होगी। इसकी प्रक्रिया सुबह 11:00 बजे से शुरू हो जाएगी और निर्वाचन हेतु बैठक 12:00 बजे से होगी। आम सहमति से निर्वाचन संभव नहीं होने पर दोपहर 1:00 से मतदान कराया जाएगा। मतदान के तत्काल बाद मतगणना होगी और चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। यहां महापौर का पद अनुसूचित जाति मुक्त के लिए आरक्षित है।

जो आंकड़े दिख रहे हैं, जो संख्या दिख रही है उसे देखकर निश्चित ही आशंका बनी रहेगी कि यह चुनाव बहुत आसान नहीं होने जा रहा है। चुनाव का समय नजदीक आते आने के साथ राजनीतिक दलों की धुकधुकी बढ़ गई है। तरह-तरह के कयासों और अटकल बाजियो का दौर चल रहा है। एक और महत्वपूर्ण बात हम आपको बता रहे हैं कि अभी यहां लगभग सभी नवनिर्वाचित पार्षदों का कांटेक्ट नंबर काम नहीं कर रहा है। इस पर बात नहीं हो रही है। ज्यादातर नवनिर्वाचित पार्षद मोबाइल नहीं उठा रहे हैं । संभवत  पार्टियों  के द्वारा अभी किसी से बात करने के लिए मना किया गया है। 

 हम आपको नगर निगम भिलाई 3 चरौदा के पार्षद पद के चुनाव की घटना क्रम की ओर लेकर चलते हैं। यहां यह चुनाव काफी उठापटक से भरपूर रहा है। चुनाव में कई प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है जिनके जीत के दावे किए जा रहे थे और जिनका महापौर पदक के लिए  भी दावा था। यहां दुर्ग जिला ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष निर्मल कोसरेे जिन्होंने यहां के वार्ड क्रमांक 40 गनियारी से चुनाव लड़ा उन्होंने बड़े  वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। उन्हें 1 हजार 179 वोट हुए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के प्रत्याशी शिवकुमार बंजारी को सिर्फ 552 वोट ही हासिल हो सके। 

यहां कांग्रेस के ही कृष्णा चंद्राकर जो कि वार्ड क्रमांक 37 सिरसाकला से कांग्रेस के प्रत्याशी थे ने सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। उन्हें 1252 वोट मिले हैं जबकि उनके मुकाबले में भाजपा  की गायत्री यदु को 172 वोट ही मिल सके। कृष्णा चंद्राकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरुदेव कुमार के विधायक प्रतिनिधि भी हैं।

बीजेपी के तुलसीराम ध्रुव ने भी बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने यहां वार्ड क्रमांक 12 से चुनाव लड़ा और उन्हें 132 9 वोट हासिल हुए। उनके मुकाबले में कांग्रेस की आशा बहू को 621 वोट ही मिल सके। भाजपा के मोहन साहू और अपर्णा सुब्रतो दासगुप्ता ने भी बड़े वोटों के अंतर से जीत हासिल की है।

वहीं कई वार्डो में दोनों मुख्य राजनीतिक दलों के बीच कड़े मुकाबले की स्थिति रही और जीत हार का फैसला सिर्फ कुछ वोटो के अंतर से ही हो सका। वार्ड क्रमांक 7 मैं सिर्फ 5 वोटों के अंतर से ही जीत हार का फैसला हुआ जहां कांग्रेश के संतोष तिवारी चुनाव मैदान में थे। उन्हें 685 वोट मिले तो उनके मुकाबले में भाजपा के दिलीप पटेल को 680 वोट मिला। वार्ड क्रमांक 24 में भारतीय जनता पार्टी के सत्य प्रकाश वर्मा ने 476 वोट हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के विमला गिरिजा पर सिर्फ 17 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

प्रदेश के दोनों मुख्य राजनीतिक दलों कांग्रेस और भाजपा की पूरी कोशिश रहेगी कि भिलाई 3चरोदा के स्थानीय निकाय के चुनाव में उनके सभी नवनिर्वाचित पार्षद उनके साथ रहे किसी भी तरह की क्रास वोटिंग से बचा जा सके।लेकिन बैकुंठपुर जिले में जिसमें से क्रास वोटिंग हुई है उससे यहां भी क्रॉस वोटिंग की आशंका जाहिर तो जरूर की जा रही है। दूसरी तरफ सभी की निगाहें नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षदों की ओर लगी हुई है। हम आपको बता रहे हैं यह नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षद कौन कौन है और  किन वर्णों से इन्होंने जीत हासिल की है।निर्दलीय पार्षद है - ward क्रमांक 4 से भूपेंद्र वर्मा, इन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के एवन कुमार साहू को पराजित किया है।वार्ड क्रमांक 5 में भी निर्दलीय प्रत्याशी मनोज कुमार को जीत मिली है। चुनाव में उनके निकटतम प्रतिद्वंदीभाजपा के जयप्रकाश लहरें थे। वार्ड क्रमांक 9 से निर्दलीय कुसुम चंद्राकर ने जीत हासिल की है उन्होंने कांग्रेस की रीना वर्मा को हराया है। वार्ड क्रमांक 12 से श्रीमती शारदा लवेश कुमार ने जीत हासिल की है। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और चुनाव में कांग्रेस की पी विजय लक्ष्मी को पराजित किया है। इसी तरह से वार्ड क्रमांक 27 से निर्दलीय प्रत्याशी एम जानी ने जीत हासिल की है।वार्ड क्रमांक 33 से भी निर्दलीय रविंद्र कुमार हरपाल को जीत मिली है। उन्होंने भाजपा के कमल तांडी को हराया है।

अब हम आपको बता दें कि इस चुनाव में दो ऐसे प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है जो कि महापौर पद के लिए दावेदारी कर सकते थे, अथवा जिनकी महापौर पद के लिए दावेदारी तय मानी जा रही थी। इनमें से राजेश दांडेकर का नाम लिया जा रहा है जो कि पूर्व पार्षद है उन्होंने वार्ड क्रमांक 19 से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें चुनाव में भाजपा के फिरोज फारूखी  के मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।श्री दांडेकर मंत्री गुरु रूद् कुमार के भी नजदीकी माने जाते हैं।इसी तरह से यहां इस चुनाव में पूर्व महापौर चंद्रकांता मांडले को भी हार का सामना करना पड़ा है। वह भाजपा के प्रत्याशी थी और निवर्तमान पार्षद हैं इसलिए महापौर पद के लिए स्वाभाविक तौर पर उनकी दावेदारी थी। लेकिन उन्हें चुनाव में बड़े वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।