स्वरुपानंद महाविद्यालय में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर परिचर्चा का आयोजन

 

भिलाई। असल बात न्यूज़।

स्वामी श्री स्वरूपांनद सरस्वती महाविद्यालय, हुडको भिलाई में शिक्षा एवं कला संकाय के संयुक्त तात्वावधान में गुरुपूर्णिमा के सुअवसर पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने अपने विचारों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष एवं सह.प्राचार्य डॉ. अज़रा हुसैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुये कहा मॉं प्रथम गुरु होती है जो बच्चों में संस्कार देती है गुरु शिष्य की प्राचीन परंपरा हमारे देश की विरासत है इसे निश्चित तौर पर आगे बढायें।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने गुरु पूर्णिमा के सुअवसर पर कहा कि गुरु को बड़ा दर्जा देने का गूढ़ रहस्य है कि गुरु शिष्य को अंधकार से उजाले की ओर ले जाता है, शिक्षक के पहले गुरु शब्द का उपयोग होता था। प्राचीन काल में शिक्षा घर से दूर गुरुकूल में दी जाती थी, जहॉं आचार.व्यवहार एवं आचरण आदि सभी गुण शिष्य को गुरु द्वारा सिखाया जाता था तथा शिष्य आदर्श नागरिक बनकर निकलता था। आज भी शिक्षक गुरु बनकर विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनाये जिससे स्वस्थ्य समान और सशक्त राष्ट्र बनाये।

महाविद्यालय के सीओओ डॉ. दीपक शर्मा ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी प्राध्यापकों और छात्रों को बधाई एवं शुभकामनाये दी।

मंजु कनौजिया ने गुरु की महत्ता के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किये। गुरु ही शिष्य को भावी नागरिक बनाता है।

डॉ. दुर्गावती मिश्रा सहायक प्राध्यापक शिक्षा विभाग ने कहा कि गुरु पूर्णिमा सिर्फ आज एक दिन नहीं है आजीवन अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञ होने का दिन है प्रथम गुरु माता है उनकी सिखायी हुई बातों पर अमल करें।

सिद्धी वर्मा बीएड द्वितीय सेमेस्टर ने वक्त की अहमियत सिखाने वाले गुरु आप थे कविता के माध्यम से अपने विचारों को प्रस्तुत किया।

ज्योति कुमारी एमएड द्वितीय सेमेस्टर ने कहा कि गुरु गोविन्द दोउ खडे़ काके लागू पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताये अर्थात् गुरु के महत्ता के कारण उन्हें भगवान से भी बड़ा दर्जा दिया जाता है। ओमिन साहू बीएड चतुर्थ सेमेस्टर ने गुरु की महत्ता को स्वरचित कविता जीवन का महत्व बनाया, वो और कोई नहीं गुरु ही है के माध्यम से व्यक्त किया जिसने है 

अरिहंस राज गुप्ता बीएड प्रथम सेमेस्टर ने जानवर इंसान में जो भेद बताये वही सच्चा गुरु कहलाये,  जीवन पथ पर जो चलना सिखाये, वहीं सच्चा गुरु कहलाये। कविता के द्वारा गुरु के प्रति अपने भाव प्रकट किये। नीलम यादव ने अपने संस्मरण में अपने गणित के बीएड चतुर्थ सेमेस्टर टीचर कंवर जी को याद किया और बताया कि उनके मार्गदर्शन से ही वो प्लाटून कमांडर के पद पर पहुची। रानी रजक ने कविता के माध्यम से गुरु की महत्ता का बखान किया।

दामिनी साहू ने ’’गुरु में ,संसार समाया, उनका है आशीष पाया, प्रमु ने खुद से भी ऊंचा, गुरु का स्थान बताया‘‘ कविता प्रस्तुत की। धनेश्वरी कुर्रे ज्ञान के है रास्ते कई, कोई गलत तो कोई सही, ज्ञान ही यश दिलाये, ज्ञान ही यश से गिराये, भावपूर्ण कविता के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किये।

 मिनाती बेहरा गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः के माध्यम से गुरु को याद किया। कामिनी सहारे ने कविता पाठ किया। 

कार्यक्रम में शिक्षा एवं कला संकाय के प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तृषा शर्मा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. दुर्गावती मिश्रा, श्रीमती मंजू कनौजिया, डॉ. पूनम शुक्ला, डॉ. शैलजा पवार ने विशेष सहयोग दिया। कार्यक्रम में शिक्षा एवं कला संकाय के प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तृषा शर्मा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. दुर्गावती मिश्रा, श्रीमती मंजू कनौजिया, डॉ. पूनम शुक्ला, डॉ. शैलजा पवार ने विशेष सहयोग दिया।