भिलाई,असल बात ‘रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन द्वारा प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित ‘मंगल परिणय – रि...
भिलाई,असल बात
‘रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन द्वारा प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित ‘मंगल परिणय – रिश्तों का मांझा’ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता–2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। ‘रिश्ते सुलझाएँ — जीवन सजाएँ’ की भावना से आयोजित इस अनूठी प्रतियोगिता में देश के विभिन्न नगरों से 40 प्रतिभागियों ने भाग लेकर सुखी दांपत्य जीवन, पारिवारिक एकता एवं टूटते रिश्तों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता में उत्तरों की गुणवत्ता, मौलिकता एवं संवेदनशीलता के लिए 50 अंक तथा जन-समर्थन के लिए 50 अंक निर्धारित थे।
🏆 छह विजेता एवं पुरस्कार राशि
🥇 प्रथम — श्रीमती शिखा अग्रवाल, कोरबा / 91 अंक / ₹3,100
🥈 द्वितीय — श्रीमती उषा मंगल अग्रवाल, कोरबा / 89 अंक / ₹2,100
🥉 संयुक्त तृतीय — श्री कन्हैयालाल अग्रवाल, अंबिकापुर / 72 अंक / ₹551
🥉 संयुक्त तृतीय — श्रीमती रिचा अग्रवाल, खरसिया / 72 अंक / ₹551
🌹 चतुर्थ, सांत्वना पुरस्कार — श्रीमती कविता अग्रवाल, खरसिया / 65 अंक / ₹501
🌟 सर्वश्रेष्ठ विचार पुरस्कार — श्रीमती नीतू अग्रवाल, मुंबई / उत्तरों में 45/50 अंक / ₹501
🌷 विजेताओं के विचारों में छिपे सुखी दांपत्य जीवन के अनमोल सूत्र
🥇 शिखा अग्रवाल — रिश्ते भी पौधों की तरह देखभाल माँगते हैं।
शिखा अग्रवाल ने रिश्तों की तुलना ऐसे पौधे से की, जिसे जीवित और हरा-भरा रखने के लिए नियमित देखभाल, प्रेम और विश्वास आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं के आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और दहेज जैसी समस्याओं पर विचार रखते हुए वैवाहिक विवादों के समाधान के लिए समाज में विशेष परामर्श बोर्ड गठित करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
🥈 उषा मंगल अग्रवाल — समाज न्यायाधीश नहीं, सेतु बने।
उषा मंगल अग्रवाल ने कहा कि “समाज को टूटते रिश्तों में न्यायाधीश नहीं, सेतु बनना चाहिए।” उन्होंने वैवाहिक विवादों में गोपनीयता बनाए रखने, पति-पत्नी की समान जिम्मेदारियों तथा प्रतिदिन मोबाइल से दूर रहकर आपसी संवाद करने पर जोर दिया। उनके अनुसार रिश्तों में एक-दूसरे को समझना और सम्मान देना आवश्यक है।
🥉 कन्हैयालाल अग्रवाल — रिश्ते सम्मान और सुरक्षा से बचते हैं।
कन्हैयालाल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि “रिश्ते बचाने का अर्थ हर कीमत पर साथ रखना नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और सहमति से समाधान खोजना है।” उनका संदेश था कि “न पति मालिक है, न पत्नी अधीन—दोनों जीवन के समान सहभागी हैं।” उन्होंने आर्थिक, घरेलू एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों में समान भागीदारी का समर्थन किया।
🥉 रिचा अग्रवाल — रिश्ते मिलते नहीं, बनाए जाते हैं।
रिचा अग्रवाल ने संदेश दिया कि “रिश्ता मिलता नहीं, बनाना पड़ता है” और “गलती पर सॉरी बोलने से कोई छोटा नहीं होता।” उनके विचारों में क्षमा, आपसी सम्मान और रिश्तों को संवारने की सकारात्मक भावना प्रमुख रही।
🌟 नीतू अग्रवाल — रिश्तों में हिसाब कम, सहयोग ज्यादा हो।
सर्वश्रेष्ठ विचार पुरस्कार प्राप्त नीतू अग्रवाल ने कहा कि “रिश्ते में हिसाब कम और सहयोग ज्यादा होना चाहिए।” उन्होंने विवाह के बाद दोनों जीवनसाथियों के अपने-अपने माता-पिता के प्रति दायित्व, बेटों को भी घरेलू कार्य सिखाने तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता को तलाक का मूल कारण न मानने जैसे संतुलित विचार प्रस्तुत किए। उन्हें उत्तरों के मूल्यांकन में सर्वाधिक 45 अंक प्राप्त हुए। कन्हैयालाल अग्रवाल के भी समान अंक थे, किंतु उन्हें संयुक्त तृतीय पुरस्कार मिलने के कारण विशेष पुरस्कार नीतू अग्रवाल को दिया गया।
🌹 डॉ. अशोक अग्रवाल का संदेश
प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा कि “विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों के संस्कारों, विश्वास और भावनाओं का संगम है। रिश्तों को बचाने के लिए अहंकार नहीं, संवाद; अधिकार नहीं, सहयोग और आरोप नहीं, समाधान की भावना आवश्यक है।”
प्रतियोगिता के सफल संचालन में संयोजिकाओं श्रीमती शोभा केडिया (कोरबा), श्रीमती रजनी डालमिया (बालको) एवं श्रीमती अनामिका संजय अग्रवाल (खरसिया) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
संगठन ने सभी 40 प्रतिभागियों को बधाई देते हुए समाज में सुखी दांपत्य जीवन और पारिवारिक एकता के लिए ऐसे रचनात्मक प्रयास निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
श्रीमती शोभा केडिया कोरबा,
संयोजिका, रिश्तो का मांझा
छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन, रायपुर
असल बात,न्यूज़




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