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20 से ज्यादा बंदरों को गोली मारकर हत्या का आरोप, विभाग को मिले सिर्फ 2 कंकाल; PM रिपोर्ट का इंतजार

 बेमेतरा. जिले में दाढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कुरदा के देवगांव में बंदरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है...

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 बेमेतरा. जिले में दाढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कुरदा के देवगांव में बंदरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. फसलों को बचाने के लिए नियुक्त रखवार पर बंदूक से गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा है. सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो में 20 से अधिक बंदरों की मौत होने का दावा किया गया है. हालांकि जांच में विभाग के अधिकारियों को घटनास्थल से दो बंदरों के कंकाल मिले हैं.



जानकारी के अनुसार, देवगांव में फसलों को बंदरों से बचाने के लिए ग्रामीणों ने रखवार नियुक्त किया था. ग्रामीणों की ओर से प्रत्येक राशन कार्ड पर दो किलो चावल देने की व्यवस्था की गई थी. आरोप है कि फसलों की रखवाली के दौरान बंदरों को भगाने के बजाय गोली मारकर उनकी हत्या की गई. इस मामले में रखवार की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, अब तक किसी अधिकारी की ओर से घटना के संबंध में आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान सामने नहीं आया है.


घटना को लेकर जब ग्रामीणों ने बंदरों की गोली मारकर हत्या किए जाने के आरोपों से इनकार किया. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बंदरों की मौत गोली लगने से नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे भूख या कोई अन्य कारण हो सकता है. उन्होंने रखवार को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे केवल फसलों की रखवाली और बंदरों को खेतों से दूर भगाने के लिए नियुक्त किया गया था. ग्रामीणों के अनुसार, रखवार को प्रतिमाह 7 हजार रुपये सैलरी दी जाती थी, जबकि अन्य ग्रामीणों की ओर से चावल देने की व्यवस्था की गई थी. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि रखवार के पास बंदूक कहां से आई और वह बंदरों को क्यों मारेगा?

नदी में 10-15 बंदरों के शव बहने का दावा

गांव में रहने वाले जगदीश मानिकपुरी ने बताया कि फसलों की सुरक्षा के लिए रखवार को नियुक्त किया गया था, लेकिन बंदरों को गोली मारने की घटना उन्होंने स्वयं देखी है. उनका दावा है कि बारिश के दौरान नदी में 10 से 15 बंदरों के शव बहते हुए दिखाई दिए थे. इसके बाद उन्हें संदेह हुआ कि आखिर बंदरों को मारकर नदी में कौन बहा रहा है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि रखवार को बंदरों को भगाने और फसलों की सुरक्षा के लिए रखा गया था, न कि बेजुबान वन्यजीवों की हत्या करने के लिए. उन्होंने मौके पर जाकर बंदरों के अवशेष देखे, जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी.

कोटवार बोले- चार महीने पहले हुई थी रखवार की नियुक्ति

गांव के कोटवार विजय दास मानिकपुरी ने बताया कि ग्रामीणों ने करीब तीन से चार महीने पहले फसलों की रखवाली के लिए राम पारधी नाम के व्यक्ति को नियुक्त किया था. उसे बंदरों से फसलों को बचाने और खेतों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी. इसके बदले ग्रामीण प्रत्येक राशन कार्ड के पीछे दो किलो चावल देते थे. कोटवार के अनुसार, उन्हें बंदरों की मौत के संबंध में पहले कोई जानकारी नहीं थी. घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच की.

CG News : वन विभाग ने किया निरीक्षण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

मामले की सूचना मिलने पर वन मंडल दुर्ग और बेमेतरा वन विभाग के करीब 10 से 15 अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. जहां से 2 शव बरामद किए गए. पंचनामा तैयार करने के बाद अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए बेमेतरा लाया गया. फिलहाल बंदरों की मौत के वास्तविक कारणों का पता पीएम रिपोर्ट के बाद लगने की बात कही जा रही है.