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सेवा संकल्प अभियान बदलाव की कहानी समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं श्यामा प्रधान, किराना दुकान से संवार रहीं परिवार का भविष्य राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने बदली जीवन की राह, स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अन्य महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित

  कोंडागांव,  असल बात News  17 सितम्बर 2026  शासन की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं स्व...

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कोंडागांव, 

असल बात News 

17 सितम्बर 2026

 शासन की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी ग्राम सिंगारपुरी निवासी श्रीमती श्यामा प्रधान की है, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने लिए रोजगार का साधन विकसित किया, बल्कि आज अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


श्यामा प्रधान वर्ष 2017 में श्री राधेश्याम स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। उनके गांव में तारा महिला संगठन तथा क्लस्टर स्तर पर नई दिशा महिला संगठन संचालित है। समूह से जुड़ने के शुरुआती दिनों में उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि समूह की गतिविधियों से जुड़कर उनके जीवन में इतना सकारात्मक बदलाव आएगा।


समूह की गतिविधियों के दौरान महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा था। श्यामा की सक्रियता और कार्य के प्रति रुचि को देखते हुए उन्हें सक्रिय महिला के रूप में चयनित किया गया। इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश में 15 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव को उन्होंने अपने गांव की महिलाओं के साथ साझा किया तथा समूह गठन और महिलाओं को संगठित करने के कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई।


वर्तमान में श्यामा एफएलआरपी (फाइनेंशियल लिटरेसी एंड रिसोर्स पर्सन) के रूप में भी कार्य कर रही हैं। इस भूमिका के माध्यम से वह अन्य महिलाओं को वित्तीय जागरूकता, स्व-सहायता समूह की गतिविधियों तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए मार्गदर्शन एवं प्रेरणा दे रही हैं।


आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ते हुए श्यामा ने अपने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर किराना दुकान शुरू की। व्यवसाय को विस्तार देने के लिए उन्होंने बैंक से किसान समृद्धि ऋण लेकर दुकान में आवश्यक सामग्री बढ़ाई। मेहनत और लगन से आज उनकी किराना दुकान नियमित रूप से संचालित हो रही है।


श्यामा बताती हैं कि उनकी दुकान के साथ ही अन्य गतिविधियों से महीने में लगभग 40 हजार तक का कारोबार हो जाता है। इस आय से वह अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने में भी सक्षम हो रही हैं।


आत्मनिर्भरता के साथ बनीं दूसरी महिलाओं की प्रेरणा


श्यामा बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव आत्मविश्वास के रूप में आया। समूह से जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली श्यामा आज स्वयं अन्य महिलाओं को मार्गदर्शन दे रही हैं और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


श्यामा की कहानी यह दर्शाती है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। स्व-सहायता समूह ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही समाज में एक नई पहचान और आत्मविश्वास प्रदान किया है।


केंद्र एवं राज्य सरकार की पहल और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आज न केवल आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार की खुशहाली और गांव के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। श्यामा प्रधान की सफलता इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल है।