Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े इस कानूनी मामले को स्पष्ट और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है

  बिलासपुर. हाईकोर्ट ने डॉक्टर पति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी करार दिया है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी पति के अवैध संबंधों और ल...

Also Read

 बिलासपुर. हाईकोर्ट ने डॉक्टर पति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी करार दिया है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी पति के अवैध संबंधों और लगातार दी जा रही शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण पत्नी के पास मौत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था. मामले में अब सजा तय करने के लिए आरोपी और उसके अधिवक्ता को 26 अक्टूबर को तलब किया गया है. मामले की सुनवाई जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई.



बता दें, कि बिलासपुर की निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 498-ए के तहत 3 साल की सजा दी थी, जबकि उकसाने के आरोप से बरी कर दिया था. जिसे मृतका के भाई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. डॉक्टर ने भी सजा के खिलाफ अपील की थी.

दरअसल, बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रहने वाली रश्मि प्रकाश ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. मृतका के भाई आशीष नाथ ने सिविल लाइन थाने में शिकायत करते हुए आरोप लगाया, कि पति डॉ. संजय प्रकाश के हिंसा और उकसाने से उनकी बहन ने खुदकुशी की. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर की अदालत ने 28 जून 2016 को दिए गए फैसले में आरोपी डॉक्टर को धारा 498-ए (पति या रिश्तेदार द्वारा क्रूरता) के तहत 3 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी थी. लेकिन आत्महत्या के आरोप यानी धारा 306 से बरी कर दिया था

.

मामले की सुनवाई के हाईकोर्ट ने दौरान मृतका के बेटे रोहित और बेटी तनिष्का समेत माता-पिता के बयान हुआ. बच्चों ने बताया कि उनके पिता डॉ. संजय प्रकाश के क्लीनिक में काम करने वाली एक नर्स के साथ अवैध संबंध थे. मां ने इसका विरोध किया, तो पिता ने उन्हें पहले चाबी फेंककर मारा, इसके बाद बेरहमी से पिटाई की. यह भी खुलासा किया कि मां को पानी में घोलकर भारी मात्रा में नींद की गोलियां दे दी जिससे उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी. घटना के ठीक एक दिन पहले भी मां के साथ मारपीट करते हुए धमकी दी थी, कि वह मां को तलाक देकर नर्स से शादी करेगा.


सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसले में कहा, कि ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयानों और सबूतों को टुकड़ों में बांटकर गलती की, जबकि सभी सबूत सामूहिक रूप से साबित करते हैं कि पति के कृत्यों ने ही पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर किया. सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लगातार ऐसा माहौल बना दे कि पत्नी के पास आत्मघाती कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता न बचे, तो वह धारा 306 यानी आत्महत्या के लिए उकसाने के दायरे में आता है. हाई कोर्ट ने सबूतों के आधार पर डॉक्टर को पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी माना है.