रायपुर . असल बात news. 20 सितंबर 2026. सद्भावना साहित्य संस्थान, रायपुर द्वारा हिंदी दिवस विशेष सप्ताह के अंतर्गत रविवार को वृंदावन हॉल...
रायपुर .
असल बात news.
20 सितंबर 2026.
सद्भावना साहित्य संस्थान, रायपुर द्वारा हिंदी दिवस विशेष सप्ताह के अंतर्गत रविवार को वृंदावन हॉल, सिविल लाइंस, रायपुर में भव्य काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, हिंदी साहित्य एवं कविता के माध्यम से लोगों को अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व का भाव जगाना तथा साहित्यिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम में साहित्यप्रेमियों, कवियों एवं काव्य रसिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कवियों ने अपनी विभिन्न भावों और विषयों से जुड़ी रचनाओं का सुंदर काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम में कवि राजकुमार सोनी, नया रायपुर ने जीवन की बदलती परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को रेखांकित करती अपनी संवेदनशील रचना “बच्चे से बुज़ुर्ग हो गए” प्रस्तुत की—
“बच्चे से बुज़ुर्ग कब हो गए, पता ही नहीं चला,
कब बचपना खो गया, पता ही नहीं चला।
ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबते रहे,
वक़्त कब हाथों से निकल गया, पता ही नहीं चला।”
वहीं यशवंत यदु ‘यश’ ने भगवान श्रीगणेश को समर्पित अपनी व्यंग्यात्मक रचना के माध्यम से समसामयिक विषय को कविता से जोड़ा। उन्होंने ट्रंप के टैरिफ और उससे जुड़े आर्थिक प्रभावों पर हास्य-व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
कवि जितेंद्र ने प्रेम और संगीत के भावों से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“अगर तुम प्रीत बन जाओ, तुम्हारी रीत बन जाऊँ,
जो तुम संगीत बन जाओ, मैं ग़ज़लें गीत बन जाऊँ।”
उनकी रचना में प्रेम, संगीत और भावनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कवि छबिलाल सोनी ने कविता की मिठास को मधुमक्खी और मधुरस के रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया—
“मन मधुमक्खी, चला चूसने,
शब्द पुष्प के मीठे रस...”
वहीं डॉ. गोपा शर्मा ने हिंदी के प्रति गौरव और आत्मीयता व्यक्त करते हुए अपनी रचना “हिंदी हमारी पहचान, हमारा गर्व, हमारी शान” का पाठ किया। उन्होंने हिंदी को केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भावनाओं और पहचान का अभिन्न हिस्सा बताया।
मोहम्मद यूशा ने अपनी चार पंक्तियों के माध्यम से महंगाई और आमजन की परिस्थितियों को स्वर दिया—
“महंगाइयों की मार से हैं चूर-चूर लोग,
हम फिर भी अपने घर को संभाले हुए तो हैं।”
सुषमा प्रेम पटेल ने अपनी रचना “कवित्त की क्यारी” के माध्यम से शब्द-सृजन, मां शारदा और साहित्य के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उनकी घनाक्षरी शैली की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में साहित्यिक रंग और गहराया।
कार्यक्रम के दौरान योगेश शर्मा ‘योगी’ ने नए जमाने के प्रेम और बदलते रिश्तों पर सार्थक एवं हास्य-व्यंग्यपूर्ण प्रस्तुति दी। उनकी व्यंग्य रचना ने आधुनिक प्रेम की बदलती परिभाषाओं और सामाजिक व्यवहार पर श्रोताओं को मुस्कुराने के साथ-साथ सोचने का अवसर भी दिया।
हिंदी के प्रति जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं एवं कवियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदना, परंपरा और पहचान की भाषा है। हिंदी दिवस विशेष सप्ताह के माध्यम से लोगों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग, हिंदी साहित्य के पठन-पाठन तथा आने वाली पीढ़ी को अपनी भाषा और साहित्य से जोड़ने का संदेश दिया गया।
लकी ड्रॉ से बढ़ा उत्साह
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित साहित्यप्रेमियों के लिए लकी ड्रॉ/लॉटरी सिस्टम का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से सफदर अली ‘सफदर’, गोपा शर्मा, सुषमा प्रेम पटेल एवं यशवंत यदु को उपहार प्रदान किए गए। वहीं रुणाली चक्रवर्ती ने लकी ड्रॉ में मुख्य पुरस्कार अपने नाम किया।
कार्यक्रम ने साहित्य, कविता, हास्य-व्यंग्य और हिंदी के प्रति जागरूकता को एक मंच पर लाते हुए उपस्थित लोगों के बीच सकारात्मक साहित्यिक वातावरण निर्मित किया। कवियों की विविध रचनाओं और श्रोताओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया।कार्यक्रम के अंत में सद्भावना साहित्य संस्थान की ओर से सभी कवियों, साहित्यप्रेमियों एवं उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।


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