कोण्डागांव, असल बात News 28 सितम्बर 2026 शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं आज महिलाओं और परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनने के साथ-साथ उन्हें अपन...
कोण्डागांव,
असल बात News
28 सितम्बर 2026
शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं आज महिलाओं और परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनने के साथ-साथ उन्हें अपने भविष्य की बेहतर योजना बनाने का अवसर भी दे रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली छोटी-छोटी आर्थिक सहायता कई बार उनकी बड़ी जरूरतों को पूरा करने और भविष्य के लिए बचत करने का माध्यम बन जाती है। कोण्डागांव के तहसीलपारा निवासी श्रीमती पंचमी कुलदीप की कहानी भी ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है, जहां शासन की योजनाओं से मिली सहायता राशि का उपयोग उन्होंने अपनी जरूरतों के साथ-साथ अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए बचत में किया है।
श्रीमती पंचमी कुलदीप को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत उनकी पहली संतान के जन्म के समय आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। पहली संतान के रूप में पुत्र के जन्म पर उन्हें योजना के तहत 5 हजार रुपये की सहायता राशि मिली। इस राशि ने उस समय परिवार को आर्थिक रूप से सहारा दिया और मातृत्व से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद की।
इसके बाद जब पंचमी के घर दूसरी संतान के रूप में बेटी का जन्म हुआ, तब उन्हें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 6 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। बेटी के जन्म पर मिली इस राशि को उन्होंने केवल तत्काल खर्च करने के बजाय उसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए बचत करने का निर्णय लिया। पंचमी ने यह राशि सुकन्या समृद्धि योजना के तहत अपनी बेटी के नाम से जमा कर दी।
पंचमी बताती हैं कि बेटी के भविष्य के लिए अभी से बचत करना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि आज की गई छोटी-सी बचत आगे चलकर बेटी की पढ़ाई, उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं में काम आ सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने मातृ वंदना योजना से प्राप्त राशि को बेटी के नाम सुरक्षित करने का निर्णय लिया।
महतारी वंदन योजना बनी रोजमर्रा की जरूरतों का सहारा
श्रीमती पंचमी कुलदीप को छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। उनके लिए यह राशि नियमित आर्थिक संबल का माध्यम बनी हुई है। पंचमी बताती हैं कि वे महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को पूरी तरह खर्च करने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार उसका उपयोग करती हैं और बचत का भी प्रयास करती हैं।
उन्होंने योजना से मिली राशि को बचाकर मोबाइल फोन खरीदा। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर वे इस राशि का उपयोग छोटे-मोटे घरेलू एवं व्यक्तिगत खर्चों के लिए भी करती हैं। इससे उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
पंचमी कहती हैं कि पहले अपनी छोटी जरूरतों के लिए भी घर के दूसरे सदस्यों से पैसे मांगने पड़ते थे, लेकिन अब महतारी वंदन योजना के माध्यम से हर महीने मिलने वाली राशि से वे अपनी जरूरतें स्वयं पूरी कर लेती हैं। इससे उनमें अपने खर्चों को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार के बजट पर भी अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
बचत से भविष्य सुरक्षित करने की ओर कदम
पंचमी की कहानी केवल योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता की कहानी नहीं है, बल्कि उस सहायता के बेहतर उपयोग और बचत की सोच की भी कहानी है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मिली राशि को बेटी के नाम सुकन्या समृद्धि योजना में जमा करना और महतारी वंदन योजना की राशि से अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ बचत करना उनके आर्थिक प्रबंधन की समझ को दर्शाता है।
वह कहती हैं कि सरकार की योजनाओं से मिलने वाली राशि उनके परिवार के लिए उपयोगी साबित हो रही है। एक ओर बेटी के भविष्य के लिए बचत शुरू हो गई है, वहीं दूसरी ओर महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता से उन्हें अपनी व्यक्तिगत और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सुविधा हो रही है।
योजनाओं से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
श्रीमती पंचमी कुलदीप का अनुभव बताता है कि शासन की योजनाओं का लाभ जब जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव केवल तत्काल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहता। यह परिवारों को बचत, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी देता है।
पंचमी के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मिली सहायता उनकी बेटी के भविष्य की बचत का आधार बनी, तो महतारी वंदन योजना से मिलने वाली मासिक राशि उनकी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने का सहारा बनी है।


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