छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार,प्रशासनिक प्रतिबद्धता से धरातल पर उतरी योजनाये,सब्बो मन के एक खैवेय्या, विष्णु भैया.....
छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार,प्रशासनिक प्रतिबद्धता से धरातल पर उतरी योजनाये,सब्बो मन के एक खैवेय्या, विष्णु भैया....
महिलाओं,किसानों,युवाओं के लिए संचालित योजनाओं मैं छत्तीसगढ़ में देवी विकास को नई दिशा
छत्तीसगढ़ .
असल बात news.
प्राकृतिक संसाधनों जल,खनिज, शांतिपूर्ण वातावरण,हरियाली,से भरपूर छत्तीसगढ़ राज्य में अब प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए रास्ता खुल रहा है.महतारी वंदन योजना से प्रत्येक माह एक हजार रू हाथ में आने से अब यहां की महिलाओं को घर के छोटे-मोटे काम के लिए दूसरों के आगे हाथ नहीं फैलाना पडता है.वे अपने इस पेज से अपना बजट बनाती है और अपनी योजनाएं तय करती हैं कि वह पैसा कहां,किस काम के लिए खर्च करेंगी.वे कभी बच्चों के स्कूल की फीस चुका देती है तो कभी कपड़े खरीद लेती हैं. खुद के खाते में आए पैसे से खरीदारी करने से जो एक सुकून मिलता है, उसकी सहज ही कल्पना की जा सकती है.ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को ड्रोन दीदी,ई-रिक्शा दीदी और अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है.छत्तीसगढ़ का किसान अब पिछड़ा नहीं रह गया है.धान की खेती से भी उसे आमदनी हो रही है तो वहीं ये किसान यहां काजू,बादाम,आलू की भी खेती कर रहे हैं.जशपुर की काजू की डिमांड छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के साथ झारखंड, उत्तर प्रदेश, उड़िसा, दिल्ली राज्यों में निरंतर बनी रहती है। इसके साथ यहां के किसान बेशकीमती नाशपाती,ड्रैगन फ्रूट,अमरूद,बेर,केला के साथ कई तरह की सब्जियों की भी फसल ले रहे हैं.यहां अब किसानों के अपनी जमीन कृषि भूमि बेचने के प्रतिशत में निरंतर गिरावट आ रही है। छत्तीसगढ़ में अब छोटे-छोटे गांव में भी सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध है जिससे खेतों की उत्पादन क्षमता बढ़ रही है तो वहीं प्रदेश सरकार के द्वारा किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से और 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जा रही है,जिससे उनकी आमदनी बढ़ रही है।युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन योजनाओ के साथ तेजी से आगे बढ़ रहे छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं किसानों,युवाओं के हित की कल्याणकारी योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि सब्बो मन के एक खैवेय्या -विष्णु भैया।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के समग्र विकास को एक नई दिशा दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों से हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।यहां, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए जल, कृषि आदान और आधुनिक तकनीक की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। “जलाशयों में पर्याप्त पानी किसानों के लिए बड़ी राहत और उम्मीद का आधार है। खरीफ फसल के लिए खाद-बीज समय पर उपलब्ध कराया गया है। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ड्रोन तकनीक से कीटनाशक छिड़काव की सुविधा भी किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है।”कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए प्राथमिक कृषि साख समितियों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव की व्यवस्था की गई है। इससे बड़े रकबे में कम समय में समान रूप से छिड़काव किया जा सकेगा। किसानों को पारंपरिक तरीके की तुलना में समय और श्रम की बचत के साथ अपेक्षाकृत कम लागत में सुविधा मिल सकेगी। कृषि विभाग द्वारा किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, उन्नत बीज, कीट प्रबंधन, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।जल संसाधनों की उपलब्धता, समय पर कृषि आदानों की व्यवस्था और आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार से इस खरीफ मौसम में बेहतर उत्पादन की उम्मीद मजबूत हुई है। किसानों को उम्मीद है कि अनुकूल मौसम और पर्याप्त जल उपलब्धता का लाभ खेतों में अच्छी फसल के रूप में मिलेगा।किसानों का कहना है कि समय पर खाद-बीज मिलने से खेती का काम सुचारू रूप से हुआ है। मौसम अनुकूल रहा तो इस बार भी धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि बड़े नीतिगत सुधारों और धरातल पर इन योजनाओं के सकारात्मक तरीके से उतरने से किसानों का फायदा हो रहा है।सरकार ने धान खरीदी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बनाया है। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान बेचने की सुविधा दी जा रही है, किसानों के लिए यह काफी फायदेमंद होता दिख रहा है. खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश भर में किसानों से करोड़ों मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना भी किसानों को लाभ पहुंचा रहे हैं। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक साबित हो रहा है। देशभर में 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।राज्य शासन द्वारा कृषकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया गया है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 एवं आगामी वर्षों के लिए प्रदेश में नवीन धान उपार्जन केंद्र खोले जाने की अनुमति प्रदान की गई है। कई जिलों में नवीन धान उपार्जन केंद्र खोले जाने की स्वीकृति मिली है।किसानों की उत्पादकता, उत्पादन लागत, बाजार मूल्य और शुद्ध आय का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा हूं,ताकि यह स्पष्ट रूप से सामने आ सके कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए किस प्रकार लाभकारी सिद्ध हो रही है। प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में आगे बढ़ते समय लागत में कमी और उत्पादों के बेहतर मूल्य प्राप्त करने के पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
किसानों में अब पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने और अपनी आय बढ़ाने के प्रति रुचि बढ़ी है। कई किसान भविष्य में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत गेंदा क्षेत्र विस्तार जैसी योजनाओं का लाभ लेने के इच्छुक हैं। अधिकारियोे ने बताया कि विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर, तकनीकी मार्गदर्शन के साथ पारंपरिक खेती में विविधता लाकर किसान अपनी आमदनी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।लैलूंगा विकासखण्ड के ग्राम-कोड़केल निवासी किसान श्री आनंद राम सिदार पहले अपने खेत में धान की खेती करते थे। 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में धान से उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिसे बेचने पर करीब 31 हजार रुपये की आय होती थी। विभिन्न लागतों को घटाने के बाद उनका कुल लाभ लगभग 22 हजार रुपये रहता था। वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग द्वारा किसान को गेंदा फूल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। विभाग की आवश्यक तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन के आधार पर किसान ने अपने 0.400 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में गेंदा की खेती की। बेहतर प्रबंधन एवं देखरेख के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन प्राप्त हुआ। उत्पाद की बिक्री से उन्हें 3 लाख 96 हजार रुपये प्राप्त हुए। यह सब विष्णु देव सरकार की नई नीतियों के फल स्वरुप संभव हो सका है.किसान, अब अपनी ही जमीन पर बिना किसी बड़े अतिरिक्त निवेश के मछली पालन से हर साल अच्छी-खासी पूरक आय अर्जित कर रहे हैं। इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दोहरे तरीके से मजबूती प्रदान की है। एक तरफ जहाँ निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को उनके ही गाँव और खेतों में रोजगार प्राप्त हुआ, वहीं दूसरी तरफ उनके पास एक ऐसी टिकाऊ परिसंपत्ति तैयार हो गई, जो आने वाले कई दशकों तक उनकी आजीविका को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के अब जबकि कुछ महीनो के बाद 3 वर्ष पूरे होने जा रहे है, केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में व्यवस्था बदलने वाले फैसलों के रहे हैं। सरकार ने एक ओर गरीब, किसान और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा, वहीं दूसरी ओर उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास में लंबे समय तक असर डालने वाले नीतिगत सुधार शुरू किए। सरकार बनने के तुरंत बाद सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री आवास को लेकर हुआ। पहली कैबिनेट में ही 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के आवास की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। आप महसूस करेंगे कि इन योजनाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा फायदा मिला है. ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को पक्का आवास मिला है और इससे यहां पलायन भी रुक रहा है।
महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है। अभाव और मजबूरी का दौर अब समाप्त हो चुका है। ग्रामीण महिलाएं अब न केवल अपने पैरों पर खड़ी हैं, बल्कि परिवार का आर्थिक संबल बनकर बच्चों को उच्च शिक्षा दिला रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में से अब तक 3 करोड़ से अधिक लखपति दीदियां तैयार हो चुकी हैं। अब लखपति दीदी से मिलियनर (दस लाखपति) और फिर करोड़पति दीदी बनने का सफर शुरू हो चुका है।छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा की नीति की ओर सर्वाेच्च प्राथमिकताओं के साथ धनिया जा रहा है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के साथ ही जमीनी स्तर पर विभागीय अमले के बीच बेहतर समन्वय की ओर ध्यान दिया जा रहा है। योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाने तथा महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया गया है।बहनों के आर्थिक स्वावलंबन और जीवन स्तर में अभूतपूर्व बदलाव दिख रहा है तो वही इस राज्य में अगले 5 वर्षों में समूहों को 10 लाख करोड़ रुपए का बैंक ऋण उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है,जिसमें 1 लाख करोड़ रु. का व्यक्तिगत ऋण भी शामिल है।
भारत युवाओं का देश है। किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी होती है। युवा देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान की भी महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उनके विचार, संकल्प और सपने राष्ट्र की दिशा तय करते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने और उन्हें विकास से जोड़ने कई सारी नई योजनाये शुरू की गई है.मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य के चहुंमुखी विकास में अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी तारतम्य में राज्य के युवाओं को इस विकास में भागीदार बनाने युवा आयोग के माध्यम से अनेक कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
प्रदेश के युवाओं को सशक्त, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयोग द्वारा कई अभिनव योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जो न केवल उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक हैं, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी दे रही हैं।युवाओं में नेतृत्व क्षमता, राष्ट्र सेवा की भावना और टीम वर्क का विकास किया जाता है। शिविरों में अनुशासन, योग, खेलकूद और जीवन जीने की कला की सीख दी जाती है।
युवाओं को स्टार्टअप और स्वरोजगार की दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं, इसमें महिला उद्यमियों और ग्रामीण युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है। राज्य, राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को ”युवा गौरव” और ”युवा प्रेरणा” सम्मान से नवाजा जाता है, जिससे अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलती है।
आईटी और डिजिटल स्किल्स के प्रशिक्षण के लिए विशेष कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इससे युवा डिजिटल इंडिया मिशन का हिस्सा बन रहे हैं और रोज़गार की नई संभावनाओं से जुड़ रहे हैं।छत्तीसगढ़ युवा आयोग युवाओं को समाज सेवा से भी जोड़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, स्वच्छता अभियान, ग्राम विकास, जल संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष युवा दल गठित कर कार्य करवाया जा रहा है। इससे युवाओं में समाज के प्रति दायित्व की भावना विकसित हो रही है।विकसित भारत/2047 और “छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न/2047” के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छत्तीसगढ़ के युवा भी अपना योगदान दे सकें इसके लिये प्रयास चल रहा है.प्रशासनिक सजगता और स्पष्ट कार्ययोजना के बल पर ग्रामीण अंचलों में भी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ युवाओं के कल्याण के लिए कई सारी योजनाएं काम कर रही है।
जशपुर जिला खेल प्रतिभाओं की भूमि के रूप में शुरूआत से ही जाना जाता रहा है। यहां के खिलाड़ियों ने अपने उत्कृष्ट खेल कौशल के दम पर न केवल प्रदेश, बल्कि देश और विदेशों में भी जशपुर का नाम गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जशपुर की लोकसंस्कृति और यहां के खेलप्रेम से भलीभांति परिचित हैं। उनके नेतृत्व में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। जिले में खेल अधोसंरचना के विकास के तहत आधुनिक स्टेडियमों और खेल मैदानों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। यहां विभिन्न महत्वपूर्ण खेल आयोजनों के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने और आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए स्टेडियमों और खेल मैदानों की स्वीकृति एवं निर्माण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। जिले में निवासरत विशेष संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय को जन्म से ही तीरंदाजी में प्राकृतिक निपुणता प्राप्त होती है। इस पारंपरिक कौशल को निखारकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से सन्ना में 20 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी का निर्माण किया जाएगा। इस अकादमी में लाइब्रेरी, मेडिकल सेंटर, नर्सरी, हर्बल प्लांटेशन, अत्याधुनिक ग्राउंड, चेंजिंग रूम, कोच रूम, उपकरण केंद्र, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, प्रशिक्षण कक्ष, वार्डन एवं गार्ड रूम जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही उपकरण, परिवहन के लिए बस, हाईमास्ट लाइट जैसी व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।
खेल प्रेमियों और आम नागरिकों का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री साय ने हमेशा खेलों को समाज और युवाओं के विकास का माध्यम माना है। उनकी प्राथमिकताओं में खेल सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण अंचलों तक खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराना शामिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जशपुर के खिलाड़ी अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए और अधिक तैयार हो पाएंगे। यह पहल जिले में खेल संस्कृति को नई पहचान दिलाएगी और आने वाली पीढ़ियों को खेलों की ओर प्रेरित करेगी।

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