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राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल: जिस सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर तोड़ा PM आवास, उसी के लिए भटक रहा परिवार

  मुंगेली। कलेक्टर जनदर्शन में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ग्राम सेमरक...

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 मुंगेली। कलेक्टर जनदर्शन में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ग्राम सेमरकोना निवासी देवेंद्र कुमार ने अपनी निजी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकान से जुड़े सीमांकन की रिपोर्ट अब तक नहीं मिलने की शिकायत कलेक्टर के समक्ष रखी।



देवेंद्र का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर किए गए सीमांकन में मकान का एक हिस्सा निजी और दूसरा हिस्सा शासकीय भूमि पर बताया गया था। इसी स्थिति को स्वीकार करते हुए उन्होंने परिवार के साथ मिलकर अपना निर्माणाधीन सपनों का आशियाना मकान तक तोड़ दिया, लेकिन जिस सीमांकन के आधार पर उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया, उसकी लिखित रिपोर्ट आज तक उन्हें नहीं मिल पाई।


देवेंद्र ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि ग्राम बेलसरी स्थित खसरा नंबर 143/3 में परिवार की सदस्य विमला बाई के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मकान स्वीकृत हुआ था। निर्माण के दौरान भूमि की सीमा को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। मामले में तहसीलदार लोरमी द्वारा 29 जनवरी 2026 को निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश लगाया गया। बाद में 4 जून को स्टे हटाया गया, लेकिन महज चार दिन बाद 8 जून को फिर निर्माण पर रोक लगा दी गई। लगातार स्टे और विवाद के चलते आवास निर्माण लंबे समय तक अधर में रहा।


बताया गया कि मामले को लेकर देवेंद्र द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष कई बार आवेदन और जनदर्शन में शिकायत की गई। परिवार की ओर से शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने मामले में जिला स्तरीय टीम गठित की। 13 जुलाई 2026 को टीम मौके पर पहुंची और भूमि तथा निर्माणाधीन मकान(प्रधानमंत्री आवास )का सीमांकन किया।

देवेंद्र के अनुसार मौके पर उन्हें बताया गया कि मकान का एक हिस्सा शासकीय भूमि और दूसरा हिस्सा उनकी निजी भूमि में है।देवेंद्र का कहना है कि लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से तंग आकर और विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय उन्होंने प्रशासन द्वारा बताई गई स्थिति को स्वीकार किया और परिवार के साथ मिलकर अपना पूरा निर्माणाधीन मकान स्वयं ही तोड़ दिया।

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास उनके परिवार की बड़ी जरूरत था, इसलिए उसे अपने हाथों से तोड़ना उनके लिए बेहद पीड़ादायक रहा। अब उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि जिस सीमांकन के आधार पर उन्होंने अपना मकान तोड़ा, उसकी आधिकारिक रिपोर्ट और दस्तावेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएं।


जनदर्शन में कलेक्टर ने लगाई फटकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर कुन्दन कुमार ने जनदर्शन में ही संबंधित तहसीलदार को फटकार लगाई और जिला स्तरीय टीम द्वारा किए गए सीमांकन की रिपोर्ट की नकल तथा संबंधित दस्तावेज आवेदक को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। देवेंद्र ने सीमांकन रिपोर्ट, पंचनामा, नक्शा, मौके का प्रतिवेदन और अन्य संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है।


उन्होंने यह भी मांग की है कि रिपोर्ट में उनकी 13 डिसमिल निजी भूमि की वास्तविक सीमा स्पष्ट की जाए तथा यदि मकान का कोई हिस्सा शासकीय भूमि में पाया गया था, तो उसकी वास्तविक माप और स्थिति भी अभिलेख में स्पष्ट की जाए। साथ ही मकान तोड़े जाने से हुई आर्थिक क्षति और पूर्व में दिए गए आवेदनों को भी प्रकरण में शामिल कर मामले का अंतिम निराकरण करने की मांग की गई है।


निचले अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल

यह मामला अकेला नहीं है। जनदर्शन में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और भूमि संबंधी विवादों से जुड़े आवेदन लगातार पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायत है कि राजस्व कार्यालयों में छोटे-छोटे कामों के लिए भी उन्हें बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है, और समय पर काम नहीं होने से उन्हें जनदर्शन तथा सीएम हेल्पलाइन का रास्ता अपनाना पड़ता है। कुछ शिकायतकर्ताओं की ओर से निचले राजस्व अमले पर बिना लेन-देन काम आगे नहीं बढ़ाने और पैसे नहीं देने पर आवेदकों को बार-बार घुमाने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


ऐसे में सवाल यह है कि यदि जिला स्तर पर अधिकारी जनदर्शन में शिकायत सुनकर तत्काल कार्रवाई कर सकते हैं, तो फिर आम लोगों को निचले स्तर पर महीनों तक कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं? नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे मामलों में अनावश्यक देरी पर प्रशासन को सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

देवेंद्र कुमार का मामला भी इसी व्यवस्था की एक गंभीर तस्वीर सामने लाता है ,एक परिवार ने अपना प्रधानमंत्री आवास तक तोड़ दिया, लेकिन उस फैसले का आधार बनी सीमांकन रिपोर्ट पाने के लिए आज भी उसे कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।अब कलेक्टर के निर्देश के बाद देखना होगा कि देवेंद्र को जिला स्तरीय टीम की सीमांकन रिपोर्ट और संबंधित अभिलेख कितनी शीघ्रता से उपलब्ध कराए जाते हैं और राजस्व अमले की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रही शिकायतों पर प्रशासन किस स्तर की सख्ती करता है।