Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


विकास के दावों की खुली पोल: कहीं झोपड़ी में संचालित हो रही आंगनबाड़ी, तो कहीं पुल के अभाव में कमरभर पानी पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर बच्चे; जिम्मेदारों ने दी सफाई

  गरियाबंद । गरियाबंद के आदिवासी अंचलों में विकास के लिए सबसे अधिक योजनाएं संचालित हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां की समस्याएं खत्म होने का नाम ...

Also Read

 गरियाबंद। गरियाबंद के आदिवासी अंचलों में विकास के लिए सबसे अधिक योजनाएं संचालित हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसे में सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि सरकारी मंजूरी मिलने के बाद भी अधिकारियों की उदासीनता के कारण विकास कार्य अधूरे हैं और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।



झोपड़ी में संचालित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र

गरियाबंद के आदिवासी विकासखंड मैनपुर में जान जोखिम में डालकर कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ने की तस्वीर सामने आई है। सरगीगुड़ा ग्राम पंचायत के टेकनपारा में खेतों के बीच सड़क किनारे बनी इस झोपड़ी में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जा रहा है। बरसात में होने वाली समस्याओं और दुष्परिणामों की जानकारी के बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस केंद्र में न केवल मासूमों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है, बल्कि संवेदनशील विभाग की असंवेदनशीलता भी झलक रही है। बारिश में जलजनित जीवों के अलावा सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जंतुओं का खतरा भी मंडरा रहा है। जिस जगह से कुपोषण के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी जानी है, वहां की यह तस्वीर सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा करती है।



81 केंद्र इसी तरह जुगाड़ से चलाए जा रहे

जिले में कुल 1,525 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 209 केंद्र किराए के भवनों में, 91 केंद्र अन्य शासकीय भवनों में संचालित हो रहे हैं, वहीं 81 केंद्र जुगाड़ से चलाए जा रहे हैं, जिसे सामुदायिक सहयोग का नाम दिया गया है। सालों से हो रही मांग के बाद दो साल पहले 12 भवनों की मंजूरी मिली, लेकिन आदिवासी विभाग अब तक उनका निर्माण नहीं करा पाया है। ऐसे में जिले में कुपोषण अभियान और इसके लिए प्रशासन कितना गंभीर है, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

पुल के अभाव में सड़क हो गया बेकार

गरियाबंद के साल्हेभांटा के बनवापारा से खासरपारा के बीच जनमन योजना के तहत पक्की सड़क तो बना दी गई, लेकिन पुल नहीं होने के कारण बरसात भर लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। सबसे ज्यादा मशक्कत स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में करनी पड़ती है। नाले में पानी आने पर कभी उन्हें कमरभर पानी पार करने का जोखिम उठाना पड़ता है, तो कभी भीगे कपड़ों में स्कूल में बैठना पड़ता है। पालक रूपसिंह मरकाम और पूर्व जनपद सदस्य कल्याण ओटी ने बताया कि बारिश भर आवाजाही करने वाले ग्रामीणों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

मामले में PMGSY के कार्यपालन अभियंता अभिषेक पाटकर ने बताया कि खासरपारा नाले पर 30 मीटर पुल निर्माण के लिए 158 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।