कोंडागांव. असल बात news. शांति फाउंडेशन में इस रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रभुजनों द्वारा अपने हाथों से सुंदर-सुंदर राखियाँ बनाई जा रही ह...
शांति फाउंडेशन में इस रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रभुजनों द्वारा अपने हाथों से सुंदर-सुंदर राखियाँ बनाई जा रही हैं। राखी बनाते समय उनके चेहरों पर दिखाई देने वाली खुशी और उत्साह यह बताता है कि छोटी-सी खुशी भी किसी के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है।
जिन प्रभुजनों को कभी उनकी मानसिक स्थिति के कारण अपने ही घर-परिवार से दूर कर दिया जाता है, जिन्हें समाज समझने के बजाय उनसे दूरी बना लेता है और कई बार घृणा की नजर से देखा जाता है, वे भी आखिरकार हमारे और आपके जैसे ही इंसान हैं। उनके दिल में भी भावनाएँ हैं, उन्हें भी प्यार चाहिए, सम्मान चाहिए, अपनापन चाहिए और सबसे बढ़कर उन्हें यह एहसास चाहिए कि वे अकेले नहीं हैं।
आज उनके हाथों से बन रही ये राखियाँ केवल रंग-बिरंगे धागों और सजावट से बनी हुई राखियाँ नहीं हैं। इनमें उनकी मेहनत, उनकी भावनाएँ, उनकी खुशी और अपनेपन की एक खूबसूरत कहानी जुड़ी हुई है। हर राखी मानो यह कह रही है
“हमें हमारी परिस्थितियों से नहीं, हमारे दिल से पहचानिए।”
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है, लेकिन यह पर्व हमें हर रिश्ते में प्रेम और सम्मान की कीमत भी समझाता है। किसी को उसके मानसिक स्वास्थ्य या परिस्थितियों के कारण अकेला छोड़ देना समाधान नहीं है। जरूरत है कि हम उन्हें समझें, उनका हाथ थामें और उन्हें भी समाज का एक सम्मानित हिस्सा मानें।
शांति फाउंडेशन में प्रभुजनों द्वारा बनाई जा रही ये राखियाँ हमें एक बहुत सुंदर संदेश देती हैंहर हाथ में हुनर है, हर दिल में भावनाएँ हैं और हर इंसान प्यार व सम्मान का हकदार है।
फाउंडेशन ने इस रक्षाबंधन, आइए राखी के इस पवित्र धागे के साथ भेदभाव की नहीं, बल्कि इंसानियत और अपनत्व की डोर मजबूत करने की अपील की है।





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