Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


एसडीएम के स्थगन आदेश की अनदेखी! रोक के बावजूद हुआ नामांतरण, तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

  तखतपुर। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तखतपुर के स्थगन आदेश के बावजूद ग्राम पंचायत मेंड्रा के खसरा नंबर 154/1 में नामांतरण किए जाने का मामला...

Also Read

 तखतपुर। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तखतपुर के स्थगन आदेश के बावजूद ग्राम पंचायत मेंड्रा के खसरा नंबर 154/1 में नामांतरण किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि संबंधित भूमि पर खरीदी-बिक्री, निर्माण एवं नामांतरण पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद सकरी तहसीलदार द्वारा इसी खसरे में नामांतरण आदेश पारित कर दिया गया। मामले के सामने आने के बाद राजस्व अमले की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।


जानकारी के अनुसार, अवैध प्लाटिंग कर बिक्री की सूचना पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तखतपुर ने खसरा नंबर 154/1 के संबंध में आदेश जारी कर भूमि की खरीदी-बिक्री, निर्माण कार्य एवं नामांतरण पर आगामी आदेश तक रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद सकरी तहसीलदार द्वारा कथित रूप से इसी खसरे में नामांतरण आदेश पारित किए जाने की बात सामने आई है।


पटवारी प्रतिवेदन में भी स्थगन का उल्लेख

मामले में संबंधित हल्का पटवारी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में भी भूमि पर स्थगन आदेश का उल्लेख किए जाने की जानकारी सामने आई है। जब संबंधित भूमि पर सक्षम अधिकारी का स्थगन आदेश प्रभावी था, और पटवारी प्रतिवेदन में भी इसका स्पष्ट उल्लेख था। ऐसी स्थिति में नामांतरण की कार्रवाई कैसे की गई, यह जांच का विषय है।


विवाद बढ़ने पर प्रकरण पुनः अवलोकन में

नामांतरण आदेश को लेकर मामला तूल पकड़ने के बाद प्रकरण को पुनः अवलोकन में लिए जाने की बात सामने आई है। इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के आदेशों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की है।

हालांकि, नामांतरण आदेश किन परिस्थितियों में पारित हुआ और उसके पीछे संबंधित अधिकारी का क्या पक्ष है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।



तहसीलदार का पक्ष नहीं आया सामने

इस पूरे मामले को लेकर सकरी तहसीलदार राहुल शर्मा का पक्ष जानने के लिए  फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया। जिसके चलते इस मामले में तहसीलदार का पक्ष सामने नहीं आ सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।


सूत्रों से प्राप्त जानकारी के हिसाब से निचले स्तर के महिला कर्मचारी के द्वारा तहसीलदार का आईडी चला रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अपने आईडी को कैसे किसी अधीनस्थ कर्मचारी को दे सकता है, और अगर कार्य में सुविधा के लिहाज से दिया गया है, तो भी निगरानी की जिम्मेदारी तो बनती है।


एसडीएम ने कही जांच की बात

वही इस मामले में तखतपुर एसडीएम नितिन तिवारी ने बताया कि स्थगन आदेशों के बाद भी अगर नामांतरण किया गया है तो ये नियम विरुद्ध है इस मामले में जांच करवाया जाएगा अगर जांच में गलत पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी के ऊपर राजस्व अधिनियम के तहत उचित कार्यवाही की जाएगी।