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छत्तीसगढ़ में निवेश,औद्योगिक संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा,"इज ऑफ डूइंग बिजनेस",प्रक्रियाओं का सरलीकरण बढ़ा रहा है,निवेशकर्ताओं में उत्साह, बढ़ रहे हैं रोजगार के भी अवसर,राज्य की ऐतिहासिक पहल

      0  विशेष आलेख      0 अशोक त्रिपाठी  नया परिवेश है.पूरी दुनिया में विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने की होड़ मची हुई है.भारत राष्ट्र ने इस चु...

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  0  विशेष आलेख 

    0 अशोक त्रिपाठी 

नया परिवेश है.पूरी दुनिया में विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने की होड़ मची हुई है.भारत राष्ट्र ने इस चुनौतीपूर्ण समय में कई चुनौतियों को पार कर आगे बढ़ते हुए विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत शक्ति का प्रदर्शन किया है.अब भारत राष्ट्र, दुनिया के दूसरे कई विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है.तो दुनिया के कई देश अब हमारे राष्ट्र को विकासशील राष्ट्र कहने में संकोच कर तक करने लगे हैं. ऐसे समय में भारत राष्ट्र का प्रदेश "छत्तीसगढ़" भी विकास के रास्ते पर नई ऊंचाइयां तय कर रहा है. छत्तीसगढ़ प्रदेश, अपने नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे तो बढ़ ही रहा है, शिक्षा चिकित्सा और रोजगार तथा अपने आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए भी यहां नए प्रयास शुरू हुए हैं. विकास, रोजगार के साधन और आय में बढ़ोतरी के लिए उद्योगों का विकास भी जरूरी है.आज जब हम विकसित भारत राष्ट्र, विकसित छत्तीसगढ़ प्रदेश की कल्पना करते हैं इस दिशा में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं तो इसमें, इसके निर्माण में निश्चित रूप से औद्योगिक संस्थानों तथा युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।यह कहा जा सकता है कि,देश का युवा जितना सशक्त होगा, उतना ही देश सशक्त होगा।आज का युवा, जीवन के अगले 30-35 साल में जो कुछ भी करेंगा,वह विकसित भारत की यात्रा को प्रभावित करेगा। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि आज युवाओं की जो भी समस्याएं हैं उनके निराकरण की दिशा में काम करने हम आगे आये.उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद युवाओ की सबसे बड़ी जरूरत होती है कि उसे योग्यता का अनुरूप रोजगार मिल सके. वर्तमान परिस्थितियों में औद्योगिक संस्थान, कॉरपोरेट सेक्टर्स, युवाओं को रोजगार देने के बड़े साधन बन गए हैं. ऐसे में हमें आधुनिक संस्थाओं तथा कारपोरेट सेक्टर्स के सुदृढ़ीकरण की दिशा में प्रयास करना होगा और नए औद्योगिक संस्थानों को स्थापना के लिए आमंत्रित करना भी जरूरी हो गया है. छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार के द्वारा औद्योगिक संस्थानों को कई तरीके से बढ़ावा दिया जा रहा है. नए उद्योगों को खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. नए निवेश भी आमंत्रित किए जा रहे हैं. प्रदेश में उद्योगों की स्थापना में रुचि रखने वाले निवेशको- उद्योगों को कई तरीके की सुविधाए प्रदान की जा रही है. और इसी कड़ी में निवेशकों/उद्यमियों के संपर्क में आने वाले समस्त शासकीय विभागों की प्रक्रियाओ के सरलीकरण हेतु  "इज ऑफ डूइंग बिजनेस"(EODB) योजना को लागू किया गया है. इससे निवेशकों के लिए,अत्याधुनिक सूचना तकनीको, संचार क्रांति का उपयोग कर, विभिन्न प्रकार की अनुमति, सम्मति, सहमति, अनुज्ञा एवं पंजीकरण की प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर सरलीकरण किया गया है। कहा जा रहा है कि औद्योगिक क्षेत्र में निवेश के लिए सभी तरह की शासकीय प्रक्रियाओं के निर्धारित समयावधि में निराकरण की व्यवस्था कर देने से राज्य में निवेश में आशातीत  प्रतिसाद दिख रहा है और औद्योगिक क्षेत्र में निवेश में काफी बढ़ोतरी हुई है इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं.

छत्तीसगढ़ राज्य में "अमृत काल-छत्तीसगढ़, विजन -2047 - की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रदेश की आंतरिक क्षमताओ एवं प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण सदुपयोग करते हुए औद्योगिक दृष्टि से नवाचार तकनीक के  साथ तालमेल द्वारा समृद्व राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने के लिए ‘‘ औद्योगिक विकास नीति 2024-30’’ को तैयार किया गया है। इस नीति का उद्धेश्य औद्योगिक दृष्टि से प्रवेश के पिछड़े क्षेत्रों की पहचान कर उन जिलों एवं विकासखंडों में अधिकतम आर्थिक एवं औद्योगिक  विकास के माध्यम से अधोसंरचनात्मक व्यवस्था, प्रोत्साहन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि उन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास का माहौल निर्मित हो सके एवं अधिक से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन हो सके।लाइफ में curiosity बनाए रखना जरूरी है, अपनी  learning instinct को जगाए रखना जरूरी है, चेतना बनाए रखना जरुरी है। जो बातें बिना सोचे-समझे स्वीकार कर ली जाती हैं, उन्हें, भी परखने की दिशा में आगे बढ़ने की भी जरूरत है. ऐसे ही पॉजिटिव थिंकिंग, नई सोच के साथ आगे बढ़ते हुए "इज ऑफ डूइंग बिजनेस"योजना में राज्य में उपलब्ध कृषि उत्पादों, खनिज एवं अन्य संसाधन आधारित कोर सेक्टर उद्यमों को सभी विकासखंडोंं में औद्योगिक निवेश हेतु प्रोत्साहन देने के साथ संपूर्ण प्रदेश में फार्मा, टेक्सटाईल, नवीनतम सूचना प्रौद्यागिकी आधारित उद्यम, इंजीनियरिंग  रक्षा उत्पाद, खाद्य एवं कृषि जिंसों के उत्पादन पर आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्यम तथा लघु वनोपज, वनौषधि आधारित उद्यमों, स्थानीय संसाधन के स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण को प्राथमिकता देने के लिए प्रावधानों का समावेश किया गया है, ताकि जन सामान्य, राज्य के युवाओं, कृषकों एवं लघु वनोपज के संग्रहण एवं व्यवसाय से वनांचल में निवासरत् जन सामान्य की आय में वृद्धि हो सके। साथ ही राज्य की आवश्यकता को घ्यान में रखकर सेवा क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया जा रहा है। यह स्वाभाविक है कि  राज्य में प्रतिष्ठित संस्थानों का निवेश बढ़ेगा तो यहां चाहूंओर विकास के नए रास्ते खुलेंगे. नई सोच पैदा होगी. शांति उत्साह का नया वातावरण बनेगा. हमारे जल खनिज भू संपदा का बेहतर उपयोग हो सकेगा. प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कहते हैं कि पिछले ढाई वर्षो में छत्तीसगढ़ प्रदेश औद्योगिक विकास के मामले में इतिहास रच रहा है.प्रदेश की नई उद्योग नीति लागू होने के बाद हमने 8 लाख करोड़ के एमओयू साइन किए हैं, इसका असर धरातल पर भी दिखने लगा है। सेमीकंडक्टर प्लांट, एआई डाटा सेंटर, टेक्सटाइल जैसे सैक्टर में कार्य चल रहा है। ऐसे उद्यमी जो अपने संस्थानों में 1000 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराएंगे उनके लिए विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बरसात के बात रोजगार मेला भी लगाया जाएगा, जहां विभिन्न उद्योगों में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगें. आज  हमने कई ऐसे सेक्टर्स Open किए हैं, जहां युवाओं के लिए Entry ही एक तरह से बंद हुआ करती थी। सरकार की आधुनिक नीतियों की वजह से आज राज्य में युवाओं के लिए नए-नए सेक्टर्स भी बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश में आज बड़ी ताकत तैयार हो रही है। Unicorns, Digital Payments, FinTech  Revolution इन सभी से लाखों युवाओं को पहली बार कुछ नया करने का अवसर दिया है। 

छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए विशिष्ट वर्ग के उद्यमियों को मात्र 1 रूपये प्रति एकड़ की दर पर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि प्रदान करने की योजना तैयार की गई  है। सरकार का प्रयास है कि उद्योग स्थापना एवं संचालन में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम हो एवं यथासंभव सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा ऑनलाइन माध्यम से हो ताकि उद्योग की स्थापना हेतु  सरकार के पास आने की आवश्यकता ना हो।औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विशेष रूप से प्रावधान किया गया है कि यह नीति उद्योगों को निवेश करने, नये रोजगार सृजन करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिये एक मजबूत आधार प्रदान करेगी। इस नीति के माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए कौशलयुक्त रोजगारों का सृजन करते हुये अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति मैं स्थानीय श्रमिकों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रशिक्षण कर प्रोत्साहन का प्रावधान करते हुये 1000 से अधिक रोजगार प्रदाय करने वाली इकाईयों को प्रोत्साहन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।यह नई नीति राज्य सरकारों और प्रमुख उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी के माध्यम से सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उद्योग-संचालित, भविष्य के लिए तैयार उत्कृष्टता केंद्रों में बदलने के पीएम-सेतु के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

जब हम औद्योगिक विकास की बात करते हैं तब आपको याद होगा कि पिछले  दशक में कई बड़े औद्योगिक संस्थानों ने अपने उद्योग की स्थापना के लिए पश्चिम बंगाल के विभिन्न स्थानों का चयन किया था. इसमें आपको मोटर कंपनी का इन्वेस्टमेंट भी याद होगा. यह सभी उद्योग हजार करोड़ टर्नओवर की क्षमता वाले से अधिक बड़े संस्थान थे. सब कुछ तय कर दिया गया था. उद्योगी की स्थापना के लिए प्रारंभिक काम शुरू कर दिए गए थे. प्रारंभिक काम शुरू हुआ तो उस राज्य में उद्योगों की स्थापना में शुरुआत से ही कई तरह की परेशानी आने लगी. आपको याद होगा कि ऐसे हालात के चलते ऐसे बड़े औद्योगिक संस्थानों में जिसमें विदेशी पार्टनरशिप वाले उद्योग भी शामिल थे ने वहां उद्योगों की स्थापना से हाथ खींच लिया. बाद में इन औद्योगिक संस्थानों के द्वारा अपने यूनिट की स्थापना देश में दूसरे राज्यों में की गई. मतलब स्पष्ट है कि  परिस्थितियों अनुकूल नहीं होगी तो कोई भी बड़ा औद्योगिक संस्थान आपके यहां आना नहीं चाहेंगे. आपके राज्य में निवेश करने से परहेज करेगा. करोडों अरबों रू का निवेश करने वाले औद्योगिक संस्थान शांतिपूर्ण वातावरण चाहते हैं,जल बिजली श्रम, और रॉ मटेरियल की सहज उपलब्धता चाहते हैं. इन सबके उपलब्ध होने के बावजूद वातावरण अशांत रहा तब भी यह औद्योगिक संस्थान आपके यहां आने से बचना ही चाहेंगे. छत्तीसगढ़ राज्य में "इज ऑफ डूइंग बिजनेस" योजना औद्योगिक संस्थानों को कई तरह से राहत देने वाली है.नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में सहभागिता के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर, भूतपूर्व सैनिकों (जिनमें पैरा मिलेट्री फोर्स भी सम्मिलित है), नक्सल प्रभावित, आत्म-समर्पित नक्सलियों एवं तृतीय लिंग के उद्यमों का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने का प्रावधान किया गया है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा को भारत सरकार द्वारा परिभाषित एम.एस.एम.ई. के अनुरुप किया गया है। इसी के अनुसार ही इन उद्यमों को प्राप्त होने वाले प्रोत्साहनों को अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाया गया है।

राज्य सरकार के द्वारा देश में सेवा गतिविधियों के बढ़ते हुये रुझान को दृष्टिगत रखते हुये नई औद्योगिक नीति में पहली बार सेवा क्षेत्र अंतर्गत एमएसएमई सेवा उद्यम एवं वृहद सेवा उद्यमों के लिये पृथक-पृथक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। सेवा क्षेत्र अंतर्गत इंजीनियरिंग सर्विसेस, रिसर्च एंड डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य सेक्टर, पर्यटन एवं मनोरंजन सेक्टर आदि से संबंधित गतिविधियों को सम्मिलित किया गया है।औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विशिष्ट श्रेणी के उद्योगों जैसे फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाईल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोंपज प्रसंस्करण, कम्प्रेस्ड बॉयो गैस, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू), आई.टी., आई.टी.ई.एस./डेटा सेंटर जैसे नवीन सेक्टरों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान है।

छत्तीसगढ़ राज्य ने रोजगार सृजन के मामले में देश भर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जारी Periodic Labour Force Survey (PLFS) की रिपोर्ट के अनुसारए छत्तीसगढ़ ने देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। राज्य में चल रहे रोजगार सृजन और विकास प्रयासों के कारण छत्तीसगढ़ अब बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ चुका हैए जो बेरोजगारी दर के मामले में राज्य की बड़ी सफलता को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य जो कि पहले से ही अपने प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है अब रोजगार सृजन और विकास के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्आत्मनिर्भर भारतश् के विजन को भी साकार कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के जरिए सरकार ने राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।प्रधानमंत्री मोदी ने जिस प्रकार देश के हर कोने में विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा हैए छत्तीसगढ़ सरकार उसी दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दिशा में प्रदेश के प्रत्येक गांव में रोजगार सृजन की योजनाओं का विस्तार करने का संकल्प लिया हैए ताकि राज्य का हर युवा आत्मनिर्भर बन सके और राज्य का विकास तेज़ी से हो सके।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास

    छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में माना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास करेंए जिससे वे नए उद्योगों में काम करने के लिए तैयार हो सकें। राज्य में कई कौशल विकास केंद्र खोले गए हैंए जहां युवाओं को आधुनिक तकनीकों और कौशलों की शिक्षा दी जा रही हैए ताकि वे रोजगार के नए अवसरों का लाभ उठा सकें।

     (संशोधन) विधेयक 2026 को 7 अगस्त 2026 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। इसके लागू होने के 20 वर्ष पूरे हो चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी प्रगति, आईटी-सक्षम प्रणालियों के विकास तथा बदलते कानूनी परिदृश्य के कारण एमएसएमई क्षेत्र में तेजी से बदलाव हुए हैं। इसलिए एमएसएमई के विकास को सुगम बनाने के लिए एमएसएमई अधिनियम में संशोधन आवश्यक था। उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमई की संख्या 01.04.2023 को 1.65 करोड़ से बढ़कर अब 9.16 करोड़ हो गई है। एमएसएमई क्षेत्र 40 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है और इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी इससे काफी  फायदा मिलने की संभावना बढ़ी है.बदलते एमएसएमई परिदृश्य के अनुरूप अधिनियम में बदलाव- अधिनियम में एमएसएमई के वर्गीकरण के लिए “प्लांट/मशीनरी में निवेश” और “टर्नओवर” के दोहरे मानदंड को शामिल किया गया है। विधेयक में उद्यम पंजीकरण पोर्टल को एमएसएमई के लिए एक डिजिटल, निःशुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण मंच के रूप में स्थायी दर्जा प्रदान किया गया है। एमएसएमई के लिए पंजीकरण स्वैच्छिक रहेगा।विलंबित भुगतान के मामलों के समाधान की व्यवस्था को मजबूत करना और एमएसई के लिए मध्यस्थता संबंधी निर्णयों को लागू करने की व्यवस्था -संशोधन के माध्यम से ऑनलाइन विवाद समाधान की व्यवस्था की गई है, ताकि सूक्ष्म और लघु उद्यम (एमएसई) अपने विवादों का समयबद्ध और कम लागत में समाधान कर सकें। यदि किसी डिक्री, मध्यस्थता निर्णय या आदेश को रद्द करने संबंधी आवेदन छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो न्यायालयों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे सूक्ष्म और लघु उद्यमों के आपूर्तिकर्ताओं को दिए गए निर्णय की राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दें।

आज के इस दौर में हमारे सामने चुनौतियाँ भी अलग हैं, और इसलिए हमारे दायित्व भी अलग हैं। हमें इस सोच के साथ कोई भी निर्णय लेना चाहिए कि,इससे देश को क्या फायदा होगा?  इससे देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी। आज भारत Economic Self-Reliance, Technological  Self-Reliance, Industrial Self-Reliance ऐसे हर सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के लिए काम कर रहा है। यही विकसित भारत की मजबूत नींव का सबूत है। छत्तीसगढ़ प्रदेश को मजबूत बनाने का सुदृढ़ मार्ग है. इस मजबूत नींव पर  एक भव्य-सुंदर विकसित भारत, सुंदर विकसित छत्तीसगढ़ पुलिस  का निर्माण करना है। और बड़ा मजबूत निवेश तथा नए औद्योगिक संस्थाओं  की स्थापना छत्तीसगढ़ को नया सुंदर रूप दे सकता है।