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भाजपा संगठन में असंतोष के संकेत? डोंगरगढ़ में नई नियुक्तियों के अगले ही दिन पंकज अग्रवाल ने छोड़ी जिम्मेदारी

  डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ भाजपा में अंदरूनी असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है। 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे, फिर 25 नेताओं के इस्तीफे और उसके...

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 डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ भाजपा में अंदरूनी असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है। 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे, फिर 25 नेताओं के इस्तीफे और उसके बाद लगातार सामने आ रहे इस्तीफों के बीच अब एक और नाम जुड़ गया है। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ की नई जिला कार्यकारिणी घोषित होने के अगले ही दिन डोंगरगढ़ मंडल के सह संयोजक पंकज अग्रवाल ने पार्टी की जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। इससे संगठन के भीतर चल रही हलचल एक बार फिर चर्चा में आ गई है।



पंकज अग्रवाल ने भाजपा जिलाध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा है कि वे भाजपा आईटी सेल में कार्यरत हैं, लेकिन व्यक्तिगत और व्यावसायिक कारणों से संगठन को अपेक्षित समय नहीं दे पा रहे हैं। इसी कारण उन्होंने भाजपा आईटी सेल की जिम्मेदारियों और पार्टी के सभी पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात कही है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व द्वारा दिए गए अवसर, मार्गदर्शन और विश्वास के लिए आभार भी व्यक्त किया है तथा भविष्य में पार्टी के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात लिखी है।


हालांकि, इस्तीफे में व्यक्तिगत और व्यावसायिक कारणों का उल्लेख किया गया है, लेकिन यह इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है जब डोंगरगढ़ भाजपा पहले से ही लगातार संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। हाल के दिनों में 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे, फिर 26 नेताओं के इस्तीफे, पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष सुमित मिश्रा के इस्तीफा और फिर उसे वापस लेने के घटनाक्रम ने संगठन की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।

राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि नई नियुक्तियों के बीच लगातार सामने आ रहे इस्तीफे संगठन के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। हालांकि, पंकज अग्रवाल ने अपने इस्तीफे में किसी पदाधिकारी या संगठन पर कोई आरोप नहीं लगाया है और केवल निजी कारणों का हवाला दिया है। लगातार हो रहे इस्तीफों ने डोंगरगढ़ भाजपा की संगठनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इन घटनाक्रमों को किस तरह संभालता है और असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए क्या कदम उठाता है।