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100 साल की सबसे बड़ी बाढ़ से दशरथपुर बेहाल, 59 गांव डूबे, चार दिन बाद भी नहीं पहुंची मदद

  जाजपुर . ओडिशा के जाजपुर जिले का दशरथपुर ब्लॉक इस समय सदी की सबसे भयानक बाढ़ का सामना कर रहा है. बाढ़ के 4 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति ब...

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 जाजपुर. ओडिशा के जाजपुर जिले का दशरथपुर ब्लॉक इस समय सदी की सबसे भयानक बाढ़ का सामना कर रहा है. बाढ़ के 4 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है. क्षेत्र की 19 पंचायतों के 59 राजस्व गांवों के लगभग 80,000 से अधिक लोग अब भी पानी में फंसे हुए हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि दशरथपुर में इस बार आई बाढ़ ने पिछले 100 वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.



नदियों के तटबंध टूटने से तबाही

बैतरणी और काणी नदी में आए उफान के कारण कई प्रमुख स्थानों पर तटबंध टूट गए हैं. जानकारी के अनुसार बैतरणी नदी का जयंतरा महापात्रशाही तटबंध टूट गया है. काणी नदी के तरपदा पंचायत के डोभाबिल और पटना में दो स्थानों पर दरारें (घाई) आई हैं. इसके अलावा कंटपड़ा में भी पहली बाढ़ से खुला तटबंध तबाही का कारण बना है. इन तटबंधों के टूटने से बाढ़ का पानी सीधे बस्तियों में घुस गया, जिससे सैकड़ों कच्चे मकान ढह गए हैं और गांवों में 3 फीट तक पानी बह रहा है. कई इलाकों में संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके हैं.


37 हजार लोगों को निकाला गया

प्रशासन का दावा है कि अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 37,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुँचाया गया है, जहाँ उन्हें पिछले 4 दिनों से सूखा और पका हुआ भोजन दिया जा रहा है.

हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. जानकारी के मुताबिक, मलीकापुर पंचायत के महांतीपटना और बणियापटना और तरपदा पंचायत के वार्ड नंबर 1 और 2 के बाढ़ प्रभावितों का आरोप है कि 4 दिन बीत जाने के बाद भी कोई जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासन का कोई अधिकारी उनके गांवों तक पहुंचा है. लोग दाने-दाने को मोहताज हैं और जलजमाव के कारण उनका जीना दुश्वार हो गया है. यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप होने से राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलें आ रही हैं.