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स्तनपान और स्वस्थ आहार को बढ़ावा देकर सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकता है मीडिया"

  *विश्व स्तनपान सप्ताह के पूर्व यूनिसेफ ने आयोजित की मीडिया कार्यशाला रायपुर  . असल बात news.   मातृ एवं शिशु पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने...

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*विश्व स्तनपान सप्ताह के पूर्व यूनिसेफ ने आयोजित की मीडिया कार्यशाला

रायपुर  .

असल बात news.  

मातृ एवं शिशु पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए यूनिसेफ ने रायपुर में "विश्व स्तनपान सप्ताह एवं स्वस्थ आहार" विषय पर आज मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया। होटल सयाजी में आयोजित इस कार्यशाला में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया के पत्रकारों ने भाग लिया तथा स्तनपान, स्वस्थ आहार और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग के माध्यम से समाज में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने पर चर्चा की।

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए श्री अनिल गुलाटी, कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट, यूनिसेफ ने कहा कि मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी वाहक है। उन्होंने कहा कि तथ्यपरक और वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित रिपोर्टिंग भ्रांतियों को दूर करने के साथ-साथ परिवारों को ऐसे व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे प्रत्येक बच्चे को जीवन की स्वस्थ शुरुआत मिल सके।

डॉ अपर्णा देशपांडे, न्यूट्रिशन स्पेशलिस्ट, यूनिसेफ ने कहा कि मां का दूध शिशु का संपूर्ण एवं सर्वोत्तम आहार है, जो जीवन के पहले छह महीनों तक उसकी सभी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है और उसके स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव रखता है। उन्होंने कहा कि सफल स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। गर्भावस्था से लेकर स्तनपान की अवधि तक मां को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहयोग मिलना आवश्यक है, जिसमें पति और परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आईएमएस अधिनियम, 1992 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून स्तनपान को संरक्षण और प्रोत्साहन देने के लिए बनाया गया है तथा शिशु दूध विकल्पों और व्यावसायिक बेबी फूड के अनुचित प्रचार-प्रसार को नियंत्रित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों का महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि शिशु के लिए मां का दूध ही सर्वोत्तम पोषण है।

डॉ. बी.आर. भगत, उप संचालक (बाल स्वास्थ्य), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने कहा कि राज्य सरकार विशेष रूप से ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्तनपान, पोषण एवं बाल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम गर्भवती एवं धात्री माताओं को परामर्श देने, केवल स्तनपान को बढ़ावा देने तथा शिशु एवं बाल आहार संबंधी सही व्यवहार अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

सुश्री आस्था सिंह, कंसल्टेंट, एडवोकेसी फॉर हेल्दी डाइट्स (Consultant, Advocacy for Healthy Diets) ने ताजा, घर का बना और स्थानीय खाद्य पदार्थों पर आधारित भोजन को सर्वोत्तम विकल्प बताया। उन्होंने जंक फूड और स्वास्थ्यवर्धक बताकर बेचे जाने वाले अत्यधिक प्रसंस्कृत पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के प्रति सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पाद खरीदने से पहले उनके न्यूट्रिशन लेबल अवश्य पढ़ने चाहिए। उन्होंने दैनिक भारतीय भोजन को अधिक पौष्टिक बनाने के लिए सरल और व्यवहारिक 'हेल्दी फूड स्वैप्स' भी साझा किए।

कार्यशाला में पत्रकारों और विशेषज्ञों के बीच स्तनपान, पूरक आहार, मातृ पोषण तथा पोषण संबंधी भ्रांतियों पर सार्थक संवाद हुआ। प्रतिभागियों ने इस बात पर भी विचार साझा किए कि प्रमाण-आधारित पत्रकारिता के माध्यम से समाज में स्वस्थ व्यवहार को किस प्रकार बढ़ावा दिया जा सकता है।

समापन अवसर पर यूनिसेफ ने कहा कि मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार सरकार, स्वास्थ्यकर्मियों, समुदाय, परिवार और मीडिया के साझा प्रयासों से ही संभव है। तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता स्तनपान को सामान्य सामाजिक व्यवहार बनाने तथा स्वस्थ आहार के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यह कार्यशाला 1 से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले विश्व स्तनपान सप्ताह के पूर्व आयोजित की गई। यूनिसेफ ने इस अवसर पर प्रत्येक मां और बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास के लिए स्तनपान एवं स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।