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Lenskart ड्रेस कोड विवाद: हिंदू संगठन का स्टोर्स में विरोध, कर्मचारियों को तिलक लगाकर कलावा बांधा

  बिलासपुर । देश के अलग-अलग हिस्सों में चश्मा कंपनी Lenskart के ड्रेस कोड विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी कड़ी में आज छत्तीसगढ़...

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 बिलासपुर। देश के अलग-अलग हिस्सों में चश्मा कंपनी Lenskart के ड्रेस कोड विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी कड़ी में आज छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी विरोध की तस्वीरें सामने आईं, जहां भगवा ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने शहर के अलग-अलग स्टोर्स पर पहुंचकर जमकर प्रदर्शन करते हुए अपनी नाराजगी जताई।



भगवा ब्रिगेड का आरोप है कि लेंसकार्ट (Lenskart) के मालिक पीयूष बंसल द्वारा भारत में संचालित लेंसकार्ट की सभी दुकानों में हिंदू धर्मावलंबियों को तिलक, कलावा, बिंदी एवं मंगलसूत्र पहनने से मना किया जा रहा है। जबकि अन्य समाज (मुस्लिम समाज) के लोगों को हिजाब और बुर्का पहनने से मना नहीं किया जा रहा है।

इसी के विरोध में आज भगवा ब्रिगेड के लगभग 20 की संख्या में कार्यकर्ताओं द्वारा बिलासपुर शहर में संचालित लेंसकार्ट के सरकंडा, व्यापार विहार एवं मुंगेली नाका चौक स्थित दुकानों में जाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों को तिलक लगाकर एवं कलावा बांधा गया। वहीं विरोध प्रदर्शन के माध्यम से आगामी समय में इस प्रकार के निर्देशों को वापस नहीं लेने पर दुकानों में तालाबंदी किए जाने की चेतावनी दी गई। इस दौरान कुछ लोगों द्वारा पियूष बंसल पर देश में कठमुल्लों को प्रश्रय दिए जाने जैसी बातें भी कही गईं।



कंपनी ने दी सफाई

वहीं इस पूरे विवाद के बीच कंपनी पहले ही अपनी सफाई दे चुकी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी बयान में कंपनी ने कहा कि “हमने आपकी बात सुनी है। साफ़-साफ़ और खुले तौर पर। पिछले कुछ दिनों में हमारे समुदाय और ग्राहकों ने अपनी बात रखी है और हमने उसे ध्यान से सुना है। आज हम अपने ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ को मानकीकृत (स्टैंडर्डाइज़) कर रहे हैं और इसे पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक रूप से साझा कर रहे हैं।


कंपनी ने आगे स्पष्ट किया कि गाइडलाइंस स्पष्ट रूप से और बिना किसी दुविधा के हमारे टीम के सदस्यों द्वारा अपनाए जाने वाले हर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक का स्वागत करती हैं—जैसे बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी और भी बहुत कुछ। इन्हें अपवाद के रूप में नहीं, बल्कि हमारी पहचान के हिस्से के रूप में स्वीकार किया जाता है। कंपनी ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो इसके लिए उसे खेद है। साथ ही यह आश्वासन दिया गया कि भविष्य में सभी नीतियां समानता और सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित होंगी।