रायपुर. असल बात न्यूज़. 0 विधि संवाददाता यहां मॉर्निंग वॉक पर निकले युवक पर प्राणघातक हमला करने के दो आरोपियों को सश्रम आजीवन कारा...
रायपुर.
असल बात न्यूज़.
0 विधि संवाददाता
यहां मॉर्निंग वॉक पर निकले युवक पर प्राणघातक हमला करने के दो आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश रायपुर श्री शैलेश शर्मा के न्यायालय के द्वारा यह सजा सुनाई गई है.इस प्रकरण में न्यायालय के द्वारा सजा के प्रश्न पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई है जिसे समाज को भी पता चलना चाहिए. प्रकरण में न्यायालय के द्वारा सजा सुनाते हुए टिप्पणी की गई है कि अभियुक्तों ने दिनदहाड़े लूट की घटना को कारित करते हुए प्रार्थी को धारदार हथियार से घातक चोट पहुंचाई है. सुबह या कभी भी अपने घर से घूमने या जाने के लिए व्यक्ति पर धारदार हथियार से हमला किया जाता है लूटपाट की जाती है,इसके अभियुक्तों को न्यूनतम दंड से दंडित किए जाने का प्रश्न ही नहीं उठता है. इस टिप्पणी के साथ न्यायालय के द्वारा अभियुक्तों को अधिकतम दंड का आदेश सुनाया गया है.
यह प्रकरण गुढ़ियारी रायपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत 1 सितंबर 2022 का है और उसी दिन इसमें प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. लगभग 3 वर्ष के भीतर न्यायालय का इसमें निर्णय आ गया है.अभियोजन पक्ष के अनुसार प्रकरण के तथ्य इस प्रकार है कि प्रार्थी उसे दिन सुबह लगभग 5:00 बजे अपने घर से मॉर्निंग वॉक पर निकला था. वह कुछ दूरी पर निकला था कि दो युवकों ने उसके सामने अपनी एक्टिवा खड़ी कर उसे रोक लिया तथा सामान्य आशय से उसे डराते धमकाते हुए उसके साथ लूटपाट की. अभियुक्त अपने पास बटनदार चाकू रखे हुए थे. प्रार्थी के विरोध करने पर अभियुक्तो ने उसे मारकर उसकी कलाई काट दिया. पीड़ित के घायल होने पर अभियुक्त उसका मोबाइल फन और उसके पास रखें नगदी ₹13000 लेकर भाग गए. जानकारी के अनुसार अभियोग के पहचान उनके एक्टिवा वाहन से हुई.पीड़ित ने अभियुक्तों के एक्टिवा का नं नोट कर लिया था. पुलिस के द्वारा विवेचना शुरू की गई तो यह एक्टिव नंबर सीजी 04 एलजी 5287 शेख शब्बीर एवं आशीष मिरझा के द्वारा उपयोग किया जाना पाया गया.
न्यायालय के द्वारा प्रकरण में दोष सिद्ध पाए जाने पर अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 394 के अपराध आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपए के अर्थ दंड की सजा सुनाई गई है. इसके साथ धारा 384 के अपराध में सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई गई है. आरोपियों की उम्र 25 वर्ष से कम है और दोनों आरोपी गिरफ्तारी के बाद से लगातार जेल में निरुद्ध है.
न्यायालय के द्वारा इस प्रकरण में टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि जानलेवा हमले के अपराधों के बढ़ते जाने से आजकल आम लोगों का जीवन असुरक्षित हो गया है. ऐसे में हमला करने से उत्पन्न चोट की प्रकृति महत्व नहीं रखती है.अभियुक्तों को अवैध रूप से धारदार हथियार रखने के आरोप में अलग से सजा सुनाई गई है. लेकिन सभी सजाएं एक साथ चलेंगी.
प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राहुल गुप्ता ने पैरवी की.