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इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय ने विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर “जाने अपने धरोहर को” प्रतियोगिता का आयोजन

  भिलाई. असल बात न्यूज़.    इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय ने स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर अंतर महावि...

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 भिलाई.

असल बात न्यूज़.   

इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय ने स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर अंतर महाविद्यालयीन “जाने अपने धरोहर को” विषय पर पावर पाईंट प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता कराया। इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय की संयोजक डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर विद्यार्थी अपने अंचल के धरोहर से परिचित हो और उसके महत्व को जान सकें इसी उद्देश्य से “जाने अपने धरोहर को” विषय के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के विभिन्न धरोहरों पर पावर पाईंट प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम प्रभारी श्रीमती खुशबू पाठक विभागाध्यक्ष प्रबंधन ने कहा इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थी अपने अंचल के धरोहरों से परिचित होगें उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को जान पायेंगें तथा पावर पाईंट प्रस्तुतीकरण देने से उनका संवहन कौशल भी विकसित होगा।

प्रतियोगिता में सेंट थामस महाविद्यालय एवं स्वरूपानंद महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया। सेंट थॉमस महाविद्यालय की रीतू अग्रवाल ने बस्तर के टेराकोटा धरोहर को विस्तार से बताया तथा कहा कि आज बस्तर की पहचान बेहतरीन टेराकोटा निर्माण के लिए होती है। पी. जॉनथन, सेंट थॉमस महाविद्यालय ने बस्तर के बस्तर पैलेस पर प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि बस्तर पैलेस वर्तमान में छत्तीसगढ़ का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। बस्तर पैलेस के दीवारों की कलाकृतियां और पेंटिंग प्रागैतिहासिक काल की संपन्नता को बताती है। यहाँ मुख्य आगन्तुक कक्ष को संग्रहालय में बदल दिया गया है जो पर्यटकों को आकर्षित करती है।

सेंट थॉमस महाविद्यालय के निधि गायकवाड़ ने छत्तीसगढ़ के खजुराहों भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रस्तुतीकरण दिया तथा बताया कि भोरमदेव मंदिर की बनावट खजुराहों और कोणार्क मंदिर के समान है। ग्यारहवीं शताब्दी में नागवंशी राजा गोपाल देव जो शिव के उपासक थे उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया यह मंदिर नागरीशैली का सुंदर उदाहरण है।

स्वरूपानंद महाविद्यालय के कुशाल सिन्हा ने बस्तर के विभिन्न पर्यटन स्थल - कुटुम्बर गुफा जिसकी तुलना विश्व की सबसे लम्बी गुफा “कर्ल्सवार ऑफ केव” से की जाती है के बारे में बताया तथा अपने प्रस्तुतीकरण में चौदहवीं शताब्दी में निर्मित दंतेश्वरी मंदिर के बारे में ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से बताया कि दंतेश्वरी देवी काकतीय राजओं की कुलदेवी है तथा यह शक्तिपीठ में से एक हैं तथा अपने समृद्ध वास्तुकला और मूर्तिकला एवं जीवंत त्यौहार परंपरा के कारण महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। स्वरूपानंद महाविद्यालय की तान्या त्रेहान के डोंगरगढ़ के प्रसिद्ध स्थलों पर दिये गए प्रस्तुतीकरण से स्पष्ट हुआ कि बम्लेश्वरी मंदिर जो राज्य की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित है तथा डोंगर जिसका अर्थ “पहाड” और गढ़ का अर्थ “किला” होता है अर्थात् पहाड़ पर बने देवी मां के किले का प्रतीक है। बम्लेश्वरी माँ को जागृत शक्तिपीठ माना जाता है। बम्लेश्वरी मंदिर के अलावा प्रज्ञागिरी पहाड़ी श्रृंखला जहाँ गौतम बुद्ध की मूर्ति है एवं चंद्रगिरी पहाड़ी पर स्थित जैन मंदिर डोंगरगढ़ का मुख्य धरोहर है।

प्रतियोगिता में निर्णायक अंचल की प्रसिद्ध सहित्यकार एवं साहित्यिक सांस्कृति गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता रखने वाली डॉ. अर्चना श्रेया श्रीवास्तव थी। डॉ. श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसी प्रतियोगिता से युवा वर्ग देश-विदेश के धरोहर से पहले अपने अंचल के धरोहरों से परिचित होते है तथा इन धरोहरों के समृद्ध इतिहास को जानेंगें।

प्रतियोगिता को सफल बनाने में दुर्ग-भिलाई इंटैक अध्याय से श्री विश्वास तिवारी एवं स्वरूपानंद महाविद्यालय की शर्मिला सामल विभागाध्यक्ष वाणिज्य, स.प्रा. दीपाली किंगरानी, स.प्रा. अमरजीत वाणिज्य ने विशेष योगदान दिया।