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छत्तीसगढ़ से महाआयोजन में भांचा राम के ननिहाल से भेजा जाएगा 300 मैट्रिक टन चावल

  रायपुर।  अयोध्या नगरी में श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य अब जल्द ही पूर्ण होने वाला है. मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम की तैयारियो...

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 रायपुर। अयोध्या नगरी में श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य अब जल्द ही पूर्ण होने वाला है. मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम की तैयारियों के अपडेट लगातार सामने आ रहे हैं. बता दें कि 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. अयोध्या में होने वाले इस महाआयोजन में भांचा राम के ननिहाल से 300 मैट्रिक टन चावल भेजा जाएगा. 28 दिसंबर को छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन चावल भेजेगा. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हरी झंडी दिखाकर चावल से भरे ट्रकों को रवाना करेंगे.छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने बताया भगवान श्री राम लला मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देश भर में उत्साह है. इस भव्य आयोजन में होने वाले भंडारे में प्रदेश के सभी राईस मिलर्स मिलकर अच्छी किस्म के चावल भेजेगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल होगे. 28 दिसंबर को वे ट्रकों को रवाना करेंगे.



महा भंडारे के लिए भेजा जा रहा चावल

बिलासपुर राइस मिलर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी संजय दुआ ने बताया अयोध्या में होने भगवान रामलला मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में देश भर से श्रद्धालु बडी संख्या में पहुचेंगे. जिसके लिए आयोजन समिति की ओर से महा भंडारे का आयोजन किया गया है. इसके लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के बैनर तले सभी राइस मिलर्स मिलकर 300 मैट्रिक टन से अधिक चावल भेजेंगे. 15 से अधिक ट्रकों के माध्यम से चावल भेजा जाएगा.

छत्तीसगढ़ में भांचा (भांजा) के रूप में पूजे जाते है राम लला

दरअसल माता कौशल्या का मायका पुरातन कौसल प्रदेश वर्तमान छत्तीसगढ़ में ही था और चंद्रखुरी उनकी जन्म स्थल थी. वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब अयोध्या में युवराज दशरथ का अभिषेक होने जा रहा था तब उस अवसर पर कौसल नरेश भानुमंत को भी आमंत्रित किया गया था. भानुमंत इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए अपनी पुत्री भानुमति के साथ आए. युवराज दशरथ को राजकुमारी भानुमति बहुत पसंद आईं. उन्होंने भानुमति से विवाह की इच्छा जाहिर की. तदुपरांत कौसल की राजकुमारी, दशरथ की रानी बन अयोध्या आ गईं. विवाह के बाद कौसल की राजदुहिता होने के कारण उन्हें कौशल्या नाम से पुकारा जाने लगा, जो आगे चलकर प्रभु श्री राम की माता बनीं. यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में सभी जाति समुदाय के लोग बहन (कौशल्या) के पुत्र को भगवान के प्रतिरूप अर्थात भांजा मानकर उनका चरण पखारते हैं.