'आप’ के विधायकों ने दिल्ली में संस्थागत बदलाव की मांग की

 


नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था पर विधानसभा में चर्चा के दौरान उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि दिल्ली में संस्थागत बदलाव की जरूरत है। शहर में मादक पदार्थों के खतरे और कंझावला की घटना का हवाला देते हुए उन्होंने पुलिस को दिल्ली सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में दिए जाने की मांग की।

कंझावला में 20 वर्षीय युवती की स्कूटी को एक कार ने टक्कर मार दी थी और युवती को सुल्तानपुरी से कंझावाला तक करीब 12 किलोमीटर घसीटते हुई ले गई थी। हादसे में युवती की मौत हो गई थी। 'आप विधायक रितुराज ने सुझाव दिया कि केंद्र के लिए एक अलग ''एनडीएमसी पुलिस बल बनाया जाए, जिसका अधिकार क्षेत्र नई दिल्ली के इलाकों तक सीमित हो और शहर के बाकी इलाकों के लिए दिल्ली सरकार के अधीन एक अन्य बल काम करे।

''कंझावला में एक युवती की मौत के मामले की पृष्ठभूमि में कानून-व्यवस्था की स्थिति और महिला सुरक्षा में सुधार पर बृहस्पतिवार को सदन में हुई चर्चा में कस्तूरबा नगर के विधायक मदन लाल ने दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया, '' दिल्ली के उपराज्यपाल अपनी सारी ऊर्ज़ा चुनी हुई सरकार के कामों में अड़ंगा डालने में लगाते हैं और पुलिस को ठीक से संभाल नहीं पा रहे। राजेंद्र नगर से विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारी लोगों के प्रति जवाबदेह नहीं हैं और उन्होंने दिल्ली में पुलिस तथा नौकरशाही का नियंत्रण निर्वाचित सरकार को दिए जाने की मांग की।

मंत्री गोपाल राय ने कहा, '' एक असहाय स्थिति पैदा कर दी गई है, विधानसभा को केवल शोक जाहिर करने वाला एक मंच बना दिया गया है। उन्होंने उपराज्यपाल पर दिल्ली में ''अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। राय ने कहा, '' शहर में अराजकता कौन फैला रहा है? क्या यह वह हैं जो सबूत इकट्ठा करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगा रहा है… या दिल्ली के उपराज्यपाल जो भाजपा नेताओं को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं? राय ने सदन में अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली में संस्थागत बदलाव की जरूरत है।

रितुराज ने आरोप लगाया कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति ''बिगड़ रही है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कंझावला जैसी घटनाएं दोबारा न हो, दिल्ली पुलिस की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। किराड़ी के विधायक ने कहा, '' अगर आपको नई दिल्ली की चिता है तो एनडीएमसी पुलिस होनी चाहिए और बाकी शहर की कानून-व्यवस्था दिल्ली में चुनी हुई सरकार के अधीन होनी चाहिए। पूर्व मंत्री एवं सीमापुरी के विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से दिल्ली में कथित रूप से बढ़ते मादक पदार्थ के इस्तेमाल के मामले और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया।

गौतम ने कहा, ''कानून- व्यवस्था केंद्र और दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है जो अपना कर्तव्य निभाने में बुरी तरह विफल रही है। गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल दिल्ली में सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं। यदि दिल्ली पुलिस केजरीवाल सरकार के नियंत्रण में आती है, तो स्थिति से अधिक प्रभावी ढंग से निपटा जाएगा। समाज कल्याण मंत्री राज कुमार आनंद ने आरोप लगाया कि केंद्र और उपराज्यपाल दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहे हैं और दावा किया कि शहर में किशोरों द्बारा अंजाम दिए जाने वाले अपराधों के मामले देश में सबसे अधिक हैं। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बहस के बाद सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। सोमवार से शुरू हुए तीन दिवसीय सत्र को बुधवार को अध्यक्ष राम निवास गोयल ने एक दिन के लिए बढ़ा दिया था।