असम राज्य में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन शुरु,2001 की जनगणना के आधार पर होगा नया परिसीमन

 

अधिनियम 1950 की धारा 8ए के अनुसार ईसीआई  करने जा रहा है नया परिसीमन

राज्य में एसी और पीसी के पुनर्समायोजन का उद्देश्य 

नई दिल्ली।
असल बात न्यूज़।।

असम प्रदेश में विधानसभा क्षेत्रों और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन करने का कार्य शीघ्र शुरू होने जा रहा है। यह परिसीमन यहां वर्ष 2001 में की गई जनगणना के अनुसार किया जाएगा। ताजा राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में असम प्रदेश की ओर पूरे देश की नजर लगी हुई है। देश के कानून मंत्रालय ने भी केंद्रीय चुनाव आयोग से असम केंद्र वाचन क्षेत्रों का पुनः परिसीमन करने का आग्रह किया है। यह परिसीमन शुरू होने के साथ वहां आगामी एक जनवरी, 2023 से नई प्रशासनिक इकाइयों के निर्माण पर प्रतिबंध लागू कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में भी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के द्वारा आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाए जाने की मांग की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि आसाम में बांग्लादेश से आकर बसने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसका वहां के स्थानीय लोगों के द्वारा भारी विरोध भी किया जा रहा है और घुसपैठियों को खदेड़ने की सरकार से मांग की जा रही है। ऐसे समय में यहां विधानसभा  और संसदीय क्षेत्रों का परिसीमन कई मायने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।कानून और न्याय मंत्रालय के द्वारा भारत के चुनाव आयोग से अनुरोध किया गया है कि वह असम राज्य में संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को नए सिरे से संचालित करे। परिसीमन अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत, असम राज्य में निर्वाचन क्षेत्रों का अंतिम परिसीमन लगभग 46 साल पहले वर्ष 1976 में किया गया था। उस समय यहां परिसीमन वहां की वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर तत्कालीन परिसीमन आयोग द्वारा  किया गया था। नया परिसीमन करते समय  अनुसूचित जाति और जनजातियों की सीटो को भी सुरक्षित रखने की और पूरा ध्यान रखा जाएगा।

कानून और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार से प्राप्त अनुरोध के अनुसरण में, भारत के चुनाव आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 8ए के अनुसार असम राज्य में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन शुरू करने का निर्णय लिया है। 

मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार और चुनाव आयुक्तों श्री अनूप चंद्र पाण्डेय और श्री अरुण गोयल के नेतृत्व में आयोग ने असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे यहां 1 जनवरी 2023 से राज्य में परिसीमन की कवायद पूरी होने तक नई प्रशासनिक इकाइयों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध जारी करने के लिए राज्य सरकार को पूरी गतिविधि से अवगत कराएं। संविधान के अनुच्छेद 170 के तहत  जनगणना के आंकड़े (2001) का उपयोग राज्य में संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्समायोजन के उद्देश्य से किया जाएगा। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण भारत के संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार प्रदान किया जाएगा।

निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के उद्देश्य से आयोग अपने स्वयं के दिशानिर्देशों और कार्यप्रणाली को डिजाइन और अंतिम रूप देगा। परिसीमन के दौरान आयोग भौतिक सुविधाओं, प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा सीमाओं, संचार की सुविधा, जन सुविधा को ध्यान में रखेगा और जहां तक ​​संभव हो, निर्वाचन क्षेत्रों को भौगोलिक रूप से कॉम्पैक्ट क्षेत्र के रूप में रखा जाएगा।

एक बार जब असम राज्य में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के प्रारूप प्रस्ताव को आयोग द्वारा अंतिम रूप दे दिया जाता है, तो इसे आम जनता से सुझावों/आपत्तियों को आमंत्रित करने के लिए केंद्रीय और राज्य राजपत्रों में प्रकाशित किया जाएगा। इस संबंध में, राज्य के दो स्थानीय समाचार पत्रों में एक सूचना भी प्रकाशित की जाएगी जिसमें राज्य में होने वाली सार्वजनिक बैठकों की तिथि और स्थान निर्दिष्ट किया जाएगा।