स्वरुपानंद महाविद्यालय में भारतीय सांस्कृतिक निधि दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा क्वीज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया

 

भिलाई ।

असल बात न्यूज़।। 

स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको, भिलाई में भारतीय सांस्कृतिक निधि दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा शालेय विद्यार्थियों के लिए भारत के समृध, संस्कृति और इतिहास से अवगत कराने के लिए क्विज  प्रतियोगिता का आयोजन श्री शंकराचार्य विद्यालय, हुडको, भिलाई में किया गया। इस प्रतियोगिता में दुर्ग-भिलाई के शायकीय एवं निजी विद्यालय के कक्षा सातवीं से दसवीं के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस आयोजन के उद्द्याटन सत्र की मुख्य अतिथि के रुप में डॉ. ज्योति धारकर प्राध्यापक इतिहास, शासकीय विश्वनाथ यादव तास्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग  उपस्थित हुई।

 विशिष्ट अतिथि के रुप में श्री अमिताभ दास प्राचार्य, श्री शंकराचार्य विद्यालय, हुडको, भिलाई, इन्टैक रायपुर अध्याय के संयोजक एवं शासी निकाय इन्टैक, नई दिल्ली के सदस्य राजेन्द्र चाण्डक एवं प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको, भिलाई उपस्थित हुये।

  भारतीय सांस्कृतिक निधि इन्टैक देश की एक बगैर लाभ कमाने वाली वृहद संस्था है। यह संस्था प्राकृतिक, सांस्कृतिक, जीवित, मूर्त एवं अमूर्त विरासत के रखरखाव व संरक्षण के लिए कार्य करती है। प्रश्नोत्तरी क्विज प्रतियोगिता भारतीय इतिहास, विरासत एवं संस्कृति पर आधारित था तथा इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपने देश के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरुकता लाना है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में इन्टैक रायपुर अध्याय के संयोजक एवं शासी निकाय इन्टैक, नई दिल्ली के सदस्य राजेन्द्र चाण्डक ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। इस संस्था की स्थापना 1984 में हुई, इसके संस्थापक स्वर्गीय राजीव गॉंधी ने की। इसका मुख्य उद्देश्य  प्राकृतिक विरासत, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत अपनी संस्कृति धरोहरों का संरक्षण करना एवं उनका रखरखाव करना है। रायपुर में इन्टैक संस्था की स्थापना 1985 में हुई तब से यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर, इतिहास एवं विरासत को बचाने का प्रयास कर रहा है। यह विभिन्न विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम कराकर उन्हें अपनी संस्कृति एवं इतिहास के प्रति जागरुक करना है।

इन्टैक दुर्ग-भिलाई अध्याय  से डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि जब हम हर क्षेत्र में खोज कर रहे है तो विद्यार्थियों को जागृत रहना होगा न केवल राष्ट्रीय धरोहर बल्कि अपने छत्तीसगढ़ की संस्कृति बचाने में भी अपना योगदान करे। हम अपने सांस्कृतिक धरोहरों को जाने, समझे और बचाय । उन्होंने इन्टैक को इस कार्य हेतु बधाई एवं शुभकामनाए दी।


मुख्य अतिथि डॉ.ज्योति धारकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थी अपनी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए गुगल सर्च कर रहे होंगे इससे उन्हें अपनी सांस्कृतिक धरोहरों एवं इतिहास की जानकारी प्राप्त हो रही होगी हमें अपने भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए कि हमारी सांस्कृतिक विरासत संमृध है हेरीटेज को समझने के लिए हमें पाकिस्तान जाकर जरुर हड़प्पा संस्कृति को देखकर यह समझना चाहिए कि हमारे मकान कैसे होते है। मोहन जोदड़ो हड़प्पा को देखकर हमें गर्व होना चाहिए कि भारत की सभ्यता यूरोप से भी प्राचीन है। आजादी के बाद लगातार काम हुए है। हड़प्पा के प्रत्येक नगर, शहर में गांव नहीं थे जहॉं साफ सफाई थी स्वच्छता थी जिससे कोरोना बीमारी नहीं थी। जहॉं धार्मिक भेदभाव नहीं था उनकी बनावट से कोई भेदभाव नहीं किया जाता था। शल्य चिकित्सा के विभिन्न तरीके थे जिसका हमें पता ही नहीं था। अकेला सिरपुर ही बौद्ध मठों का अवशेश नहीं है बल्कि धमधा तक इसके अवशेष फैले हुए है। गौतम बुद्ध को जाने सत्य, अहिंसा को अपनायें। जहॉं सभी ओर युद्ध एवं अति है वहॉं इस प्रकार के मूल्य हमें शांति एवं अशांति है वहॉं इस प्रकार के अपनाने की प्रेरणा देता है। विद्यार्थियों हमें हेरिटेज को जानने के साथ.साथ उसके मूल्य एवं नई सोच एवं विचार को अपनाये।

विशेष अतिथि श्री शंकराचार्य विद्यालय के प्राचार्य अमिताभ दास ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थी इस प्रकार के कार्यक्रमों के द्वारा अपने हेरिटेज को समहालेंगे एवं उसके संरक्षण में अपना योगदान देंगे। इस प्रकार के कार्यक्रमों के द्वारा विद्यार्थियों में खोज करने की प्रवृत्ति का विकास होगा।

क्वीज प्रतियोगिता के आयोजन पर अपना विचार व्यक्त करते हुये शंकराचार्य विद्यालय की छात्रा सिद्धी ने कहा कि इस प्रतियोगिता से हमें अपने भारत की संस्कृति एवं सभ्यता को जानने का मौका मिला। डीपीएस विद्यालय के विद्यार्थी प्रतीक ने कहा इस क्विज से हमें राष्ट्रीय एवं छत्तीसगढ़ के हेरिटेज को जानने का मौका मिला। केपीएस एवं डीएवी विद्यालय के विद्यार्थी अंकिता एवं रोहन ने भी अपने अनुभव साक्षा किये तथा बताया कि बहुत सारी जानकारी हमें इस कार्यक्रम से प्राप्त हुआ। सौम्या वर्मा एवं राकेश डगरिया ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा की भी तैयारी में इससे मदद मिलती है।

प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में बीस बहुविकल्पि प्रश्न दिये गये थे जिसमें बारह प्रश्न राष्ट्रीय स्तर के, तीन प्रश्न इन्टैक एवं तीन प्रश्न राज्य स्तरीय स्तर का था। सहीं उत्तर पर एक अंक एवं गलत उत्तर पर शून्य अंक प्रदान किया गया । प्रथम राउण्ड नौ विद्यालय के चवॉलिस टीम पहुचे। 

इस राउड के  प्रश्न इस प्रकार है -इन्टैक की फांउडर मेम्बर कौन थी, छत्तीसगढ़ में कौन से नशीले फल से शराब बनाई जाती है, छत्तीसगढ का वह नाच जिसमें पुरुष महिला की भूमिका में नाचते है, किस घटना के बाद श्री रविन्द्रनाथ टैगोर ने अपना नोबल पुरस्कार वापस किया था . 

दुसरे राउड में  डीपीएस रिसाली भिलाई,  डीएव्ही पब्लिक स्कूल भिलाई, डीपीएस दुर्ग  पहुंचे।

इस राउड में सफल होने के बाद प्रश्नोत्तरी का परिणाम निम्न प्रकार रहा -

टीम -अ प्रथम स्थान . डीपीएस रिसाली भिलाई रही जिसके विद्यार्थी इनेश दत्त नगरिया कक्षा 10वीं एवं शौर्य कांडा कक्षा नौवीं  रहे।

टीम -अ द्वितीय स्थान . डीएव्ही पब्लिक स्कूल भिलाई ने प्राप्त जिसके विद्यार्थी भव्य मरोटी कक्षा 10वीं एवं अपूर्व सिन्हा कक्षा आठवीं रहे।

टीम -अ तृतीय स्थान . डीपीएस रिसाली अक्षत गुप्ता कक्षा 8वीं एवं अभिनव सिंग कक्षा आठवीं रहे।

टीम -अ चतुर्थ स्थान . डीपीएस दुर्ग लवन्या परिहार 8वीं एवं दिव्या वशिष्ट कक्षा सातवीं रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ.शमा ए बेग विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने किया। कार्यक्रम की रिपोर्ट डॉ.शैलजा पवार सहायक प्राध्यापक शिक्षा विभाग। इस अवसर पर डीपीएस भिलाई, श्री शंकराचार्य विद्यालय, डीएवी विद्यालय, हुडको, भिलाई, आमदी नगर विद्यानिकेतन  हुडको, डी.पी.एस. दुर्ग, महर्षि विद्या मंदिर, शासकीय विद्यालय रूवाबांधा, शारदा विद्यालय, इंदू आईटी, महावीर जैन स्कूल दुर्ग  के विद्यार्थी एवं प्राध्यापक उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन इन्टैक रायपुर विभाग की सदस्य श्रीमती बी पोलम्मा ने किया।