नवलखा को नजरबंद रखने का मामला , उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई

 


नयी दिल्ली,  उच्चतम न्यायालय भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी गौतम नवलखा को नजरबंद करने रखने के आदेश का पालन नहीं होने के मामले में शुक्रवार को सुनवाई करेगा।
न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने 10 नवंबर को पारित अपने अंतरिम आदेश में नवलखा की उस याचिका को स्वीकार कर लिया था, जिसमें उनके खराब स्वास्थ्य तथा उम्र को देखते हुए उन्हें नजरबंद रखने की अपील की गयी थी।
शीर्ष अदालत ने गुरुवार को सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नित्या रामकृष्णन की याचिका पर सुनवाई की, जिन्होंने न्यायालय से शीर्ष अदालत के आदेश का पालन नहीं किए जाने की निगरानी करने का अनुरोध किया है। उन्होंने न्यायालय में उल्लेख किया कि परिसर का निरीक्षण 96 घंटों के भीतर होना चाहिए था, न कि 48 घंटों के भीतर और 10 नवंबर के आदेश का पालन किया जाना बाकी है। कृपया इसे देखें।
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली शीर्ष अदालत की पीठ ने सुश्री रामकृष्णन की दलीलें सुनने के बाद कहा, “इस मामले को शुक्रवार को न्यायमूर्ति जोसेफ के समक्ष रखा जाए।”
उन्होंने कहा “ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी कुछ निर्देश मांगने के लिए एक हस्तक्षेप आवेदन (आईए) दाखिल कर रही है और मामले को शुक्रवार को न्यायमूर्ति जोसेफ की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष रखा जाएगा।”
एनआईए की ओर से न्यायालय में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि एनआईए भी कुछ निर्देश मांग रही है। उन्होंने इस मामले को सोमवार को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। श्री मेहता ने कहा, “आरोपी (गौतम नवलखा) एक माओवादी है और हमने इस पर आपत्ति जताई थी, लेकिन अब नजरंबद का जगह उसने कम्युनिस्ट पार्टी के एक पुस्तकालय सह आवास का पता दिया है।”
श्री मेहता की दलीलों का विरोध करते हुए सुश्री रामकृष्णन ने कहा कि यह उल्लेख किया गया था कि यह एक पुस्तकालय है।
न्यायालय द्वारा नवलखा को नजरबंद करने का आदेश पारित किए जाने के बाद इसी मामले में बुधवार को अभिनेत्री सुहासिनी मुले नवलखा की ज़मानत की याचिका दायर की।
उल्लेखनीय है कि शीर्ष न्यायालय ने 10 नवंबर को अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि कथित भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए नवलखा को तलोजा जेल से एक महीने के लिए स्थानांतरित किया जाएगा और उनकी उम्र तथा स्वास्थ्य की स्थिति के मद्देनजर उन्हें नजरबंद में रखा जाएगा। न्यायालय ने एनआईए को आदेश की तारीख से 48 घंटे के भीतर यानी 10 नवंबर से उस परिसर का मूल्यांकन करने को भी कहा था, जहां उसे रखा जाएगा। नवलखा को किसी भी मोबाइल फोन, इंटरनेट, लैपटॉप या किसी अन्य संचार उपकरण का उपयोग नहीं करने के लिए भी कहा गया था। उन्हें हालांकि पुलिस द्वारा मुहैया कराए गए मोबाइल फोन को दिन में केवल 10 मिनट के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई और वह भी पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में।
न्यायालय ने यह भी कहा था कि सिर्फ उनकी बहन और बेटी ही हफ्ते में एक बार तीन घंटे के लिए उनसे मिल सकती हैं।
नवलखा ने न्यायालय से अपील की थी कि उन्हें घर में नजरबंद रखा जाए, क्योंकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ रही है और उनकी उम्र 65 वर्ष हो चुकी है।