स्वरुपानंद महाविद्यालय में स्वतंत्रता के संघर्ष में जनजातीय नायकों की भूमिका कार्यक्रम आयोजन

 भिलाई।

असल बात न्यूज़।। 

स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग समिति तथा जातिभेद निवारण समिति के संयुक्त तत्वाधान में भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस पर आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत ”स्वतंत्रता के संघर्ष में जनजातीय नायकों की भूमिका“ पर विचारों की अभिव्यक्ति का आयोजन किया गया। 

महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारिणी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा ने कार्यक्रम की सराहना की तथा कहा कि भगवान बिरसा मुंडा समेत सभी जनजातियों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने सामाजिक विकास को बढ़ावा देने हेतु महत्वपूर्ण कार्य किए हैं जो कि सराहनीय है जिनसे हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। 

महाविद्यालय की प्राचार्य हंसा शुक्ला ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और मूल्यों को बढ़ावा देने में आदिवासियों के प्रयासों को मान्यता देने हेतु प्रतिवर्ष जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन किया जाता है अतः महाविद्यालय के प्रत्येक विद्यार्थी को आदिवासियों के कार्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए। 

महाविद्यालय की उपप्राचार्या डॉ. अजरा हुसैन ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन आने वाली पीढ़ियों को देश के लिए आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को महत्त्व देंगे तथा आदिवासी संस्कृति कला और समृद्ध आदिवासी विरासत के संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे। 

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. राजेश पांडे सहायक प्राध्यापक शिक्षा विभाग स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय तथा महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी श्री एम. एम. तिवारी उपस्थित थे। डॉ. राजेश पांडे ने अपने व्याख्यान में जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिये आदिवासियों की एकता व अखण्डता का उदाहरण देकर सभी को सम्मिलित रुप से रहने का संदेश दिया। महाविद्यालय की बीएड प्रथम सेमेस्टर की छात्रा लक्ष्मी साहू ने रानी गैडिल्यू का जीवन परिचय देते हुये बताया कि रानी गैडिल्यू एक आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थी जिन्होंने मात्र तेरहा वर्ष की आयु में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। वह प्रथम महिला देशभक्त थी जिन्होंने चौदहा साल जेल में बिताए, उन्हें फ्रीडम फाइटर ताम्रपत्र सम्मान, बिरसा मुंडा सम्मान तथा पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। द्वितीय स्थान प्राप्त अंकिता राय बीएड प्रथम सेमेस्टर ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सुंदर तरीके से व्यक्त किया। तृतीय स्थान पर बीएड प्रथम सेमेस्टर की छात्रा निहारिका तथा पूजा देहारी रही। अन्य विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता के संघर्ष में जनजातीय नायकों के योगदान के संबंध में अपने विचार व्यक्त किये। 

कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के समस्त प्राध्यापक तथा समस्त छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुये। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शैलेजा पवार ने किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में जातिभेद निवारण समिति के सदस्य डॉ. दुर्गावती मिश्रा सहायक प्राध्यापक शिक्षा विभाग तथा श्रीमती मोनिका मेश्राम सहायक प्राध्यापक रसायन शास्त्र ने विषेष सहयोग प्रदान किया।