चखना का कचरा, कई के कपड़े हो रहे हैं कड़क, चकाचक, लेकिन समाज में बढ़ रहे हैं कई खतरे

 भिलाई,दुर्ग।

असल बात न्यूज़।। 

   00 special crime reporter 


आप यह जो चित्र देख रहे हैं दारू के बाद, चखना से फैला हुआ है यह कचरा। यह तो सबको मालूम है कि चखना सेंटर्स से सिर्फ उसके आसपास ही गंदगी नहीं फैल रही है, वरन समाज में कई तरह की बुराइयां भी इससे पनप रही है। यहां चखना से इतना कचरा फैला हुआ दिख रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की केंद्रीय टीम जो स्वच्छता के पुरस्कार के लिए स्थानीय निकायों का चयन करती है ऐसे स्थानों को देखने के बाद वहां के स्थानीय निकाय का पुरस्कार के लिए चयन शायद ही कभी  करें। लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है और स्वच्छता की केंद्रीय टीम को ऐसे स्थानों तक कभी पहुंचने भी नहीं दिया जाता। राज्य में सरकार के द्वारा स्वयं दारू दुकान चलाया जा रहा है जिससे कई सारी समस्याएं दूर हुई है लेकिन इनके आसपास जिस तरह से बड़ी संख्या में चखना सेंटर्स पनप गए हैं वह कई समस्याओं का कारण बनते जा रहे हैं। ढेर सारी समस्याएं पैदा कर रहे हैं। इनको रोकने, नियंत्रित करने के बारे में शासन की कोई स्पष्ट नीति भी नजर नहीं आती। शिक्षित बेरोजगार स्थानीय युवाओं का बड़ी संख्या में पलायन हो रहा है। ऐसी कोई नीति नहीं बनाई जाती कि जहां रोजगार के अवसर बन सकते हैं वहां स्थानीय युवाओं को काम,रोजगार दिलाने के लिए कोई व्यवस्था की जाए।

 ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक-दो स्थानों पर ही ऐसे चखना सेंटर पनप गए हो। देखा जा सकता कि जहां-जहां भी सरकारी दारू दुकान चल रही हैं वहां आसपास बड़ी संख्या में चखना सेंटर खड़े हो गए हैं। एक नहीं कई सारे चखना सेंटर। कोई कितना भी छुपा ले, नजर अंदाज करता रहे,लेकिन आम लोगों को मालूम है कि बिना संरक्षण के ऐसे चखना सेंटर खड़े नहीं हो सकते। चल ही नहीं सकते। लोगों को यह भी मालूम है कि ऐसे चखना सेंटर से मोटी रकम की वसूली की जाती है। सबको यह भी मालूम है कि यह वसूली करने वाले कौन लोग हैं।चखना सेंटर से कई सारी समस्याएं पैदा हो रही है। चखना सेंटर से तमाम, सामाजिक बुराईयां भी पैदा हो रही है।जिस क्षेत्र में ऐसे चखना सेंटर चल रहे हैं वहां आसपास से किसी सभ्य लोगों का गुजर पाना कितना कठिन होता है, यह समझा जा सकता है। आपराधिक तत्वों के बारे में जानकारी रखने वाले बताते हैं कि  जब दो-तीन यार मिलकर पहुंचते और बैठते हैं तब बहुत सारे अपराधों की प्लानिंग वही ऐसे चखना सेंटर में ही होती है। पुलिस प्रशासन से जुड़े हुए सूत्रों ने संकेत दिया है कि पाटन के समृद्धि ज्वेलर्स हत्याकांड की योजना को भी अपराधियों ने किसी चखना सेंटर में ही अंतिम रूप दिया था। यह सबको मालूम है कि चखना सेंटर से कतिपय लोगों के द्वारा मोटी वसूली की जाती है और ये वसूली करने वाले लोग कौन हैं यह भी सबको मालूम है। चखना सेंटर में जितनी भीड़ बढ़ती जाती है इन वसूली करने वाले स्थानीय छुटभैये तत्वों के कपड़े वैसे ही झक्क, चकाचक, नए,  और कड़क होते जाते हैं और इनकी विषैली मुस्कुराहट बढ़ती जाती है।
आप इन चित्रों को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि चखना सेंटर में कितनी भीड़ उमड़ पड़ती है और इससे कितनी कमाई होती होगी। लोगों की मेहनत मजदूरी का कितना पैसा यहां घुस जाता है। घर परिवार के लोग इंतजार करते रहते हैं कि उनका पति, बेटा,भाई आज घर में कुछ कमा कर लेकर आएगा लेकिन वह सारा पैसा ऐसे चखना सेंटर में उड़ा कर आ जाता है। 
ढेर सारे जिम्मेदार लोगों को शायद नहीं दिखता होगा कि ऐसे चखना सेंटर कहां कहां पर पनप गए हैं। ऐसे लोगों को चखना सेंटर चलाने की अनुमति आखिर कहां से अनुमति मिल जाती है। कैसे इतनी ढेर सारे चखना सेंटर कहीं भी खड़े हो जाते हैं ? सच्चाई यह है कि हर दारू दुकान के आसपास बड़ी संख्या में चखना सेंटर पर गए हैं और वहां हर जगह जिस तरह से भारी भीड़ खड़ी दिखती है वहां एकदम मेले के जैसा नजारा नजर आता है। यह स्थल दुर्ग जिले में चाहे पोटिया का वह स्थान हो जहां पुलिस प्रशासन के द्वारा अभी कार्रवाई की गई है, चाहे खुर्सीपार चौक में जी रोड के किनारे का हो चाहे, एसए एफ बटालियन लाइन के सामने की दुकान, हर जगह ऐसा ही नजारा नजर आता है।
पुलिस प्रशासन को शिकायतें मिल रही हैं तो चखना सेंटर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। कार्रवाई हुई तो  आप देख सकते हैं कि ऐसे स्थानों पर किस तरह से गंदगी फैलती है। फिलहाल पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है और चखना सेंटर्स के सारे सामानो को जप्त कर लिया गया है। यह तो जिले के नए पुलिस अधीक्षक डॉ पल्लव की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने सामाजिक बुराई से निपटने के लिए कड़ा कदम उठाने की कार्यवाही की है, और चखना सेंटर्स को उखाड़ने का काम किया है, वरना इसके पहले तो इस तरह के कदम कभी नहीं उठे।



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