कुंभ, मकर, धनु, मिथुन और तुला राशि वाले शनि प्रदोष व्रत के दिन करें ये छोटा सा काम, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगी मुक्ति

 


 

 नई दिल्ली.  5 नवंबर, 2022 को शनि प्रदोष व्रत है। इस पावन दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। शनि प्रदोष व्रत के दिन शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। इस समय कुंभ, मकर, धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती और मिथुन, तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या लगने पर व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शनि प्रदोष व्रत के दिन कुंभ, मकर, धनु, मिथुन और तुला राशि वालों को शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति के लिए विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। भगवान शंकर की पूजा- अर्चना करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है। इस पावन दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर गंगा जल अर्पित करें और लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करें। लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं।

  • लिंगाष्टकम स्तोत्र

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥1॥ 

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥2॥

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥3॥

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥4॥

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥5॥

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥6॥

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।
अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥7॥

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।
परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥8॥

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥