पीएचडी के लिए अधिकतम मिलेंगे 6 साल, ऑनलाइन और डिस्टेंस की इजाजत नहीं, जानें नए नियम

 नई दिल्ली।

असल बात न्यूज़।। 


 यूजीसी की ओर से जारी पीएचडी की नई गाइडलाइन के मुताबिक पीएचडी डिग्री कोर्स की अवधि कम से कम तीन वर्ष की होगी। इसमें कोर्स वर्क भी शामिल होंगे। पीएचडी में एडमिशन की डेट से अधिकतम छह वर्ष का समय दिया जायेगा। रीरजिस्ट्रेशन के जरिए ज्यादा से ज्यादा दो साल का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। महिलाओं को दो साल की एक्स्ट्रा छूट दी जा सकती है। यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार का कहना है कि यूजीसी के नए नियमों से पढ़ाई में अच्छे स्टूडेंट्स कम उम्र में पीएचडी कोर्सेज में प्रवेश करेंगे। 

- अब कहीं भी सेवारत कर्मचारी या शिक्षक पार्टटाइम पीएचडी कर सकेंगे। पहले सरकारी सेवारत कर्मचारियों या शिक्षकों को शोध करने के लिए अपने विभाग से अध्ययन अवकाश लेना पड़ता था।

- ऑनलाइन या दूरस्थ विधि से पीएचडी नहीं की जा सकती। 

- पहले थीसिस जमा कराने से पहले शोधार्थी को कम से कम दो शोधपत्र संदर्भित शोध पत्रिकाओं में छपवाना पड़ता था। अब पीएचडी के नए नियमों में इसकी छूट दी गई है। रिसर्च की प्रक्रिया के दौरान दो रिसर्च पेपर छपवाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।

-  रिसर्च पेपर की अनिवार्यता खत्म कर दी है।

- जब कोई थीसिस जमा कर दे तो विश्वविद्यालयों को अधिकतम छह महीने के अंदर वायवा कराना होगा। पहले छात्र थीसिस जमा करने के बाद सालभर डेढ़ साल तक वायवा के लिए चक्कर काटते रहते थे।

- यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक शादी के चलते या अन्य कारणों से पीएचडी कर रही महिला दूसरी जगह जाती है और वहां के किसी संस्थान में पीएचडी जारी रखना चाहती है तो उसे अनुमति दी जाएगी। उन्हें बार-बार भाग कर अपने शहर पीएचडी पूरी करने के लिए नहीं आना पड़ेगा। 

- नए नियमों के मुताबिक ऐसे स्थायी अध्यापक जिनकी रिटायरमेंट में तीन साल बचे हैं वह शोध के लिए किसी छात्र का नामांकन नहीं करा सकते, हालांकि वह को-गाइड के रूप में अधिकतम 70 वर्ष तक पीएचडी करा सकते हैं।