बलातसंग और व्यपहरण के मामले में कठोर सजा, अभियुक्त को 10 वर्ष की कठोर सजा और ₹10हजार का अर्थदंड

 दुर्ग।

असल बात न्यूज़।।  

  00  विधि संवाददाता

चतुर्थ एफटीएससी विशेष न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश दुर्ग श्रीमती संगीता नितिन तिवारी के न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के मामले में दोष सिद्ध पाए जाने पर अभियुक्त को 10 साल के सश्रम कारावास की और ₹10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय के द्वारा अर्थदंड की संपूर्ण राशि अभियोक्तरी  को बतौर क्षतिपूर्ति प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में दो आरोपी थे जिसमें से एक की मामले के निर्णय के पहले ही मौत हो गई।

नेवई भिलाई थाना क्षेत्र के अंतर्गत का यह मामला 4अप्रैल 2019 का है और न्यायालय के द्वारा इस प्रकरण में तेजी से सुनवाई की गई और इसमें लगभग 5 वर्ष और 5 महीने तक सुनवाई और विचारण के बाद इसमें फैसला आ गया है। मामले के बारे में प्राप्त जानकारी के अनुसार इसमें दो आरोपी दीपक बांधे उम्र 28 वर्ष निवासी नेवई भाटा ब्रम्हपुरी और राजू कुमार बांधे उम्र 25 वर्ष वृंदा नगर कैंप एक थे।अभियोक्त्री जो कि नाबालिग है  थाना जामुल क्षेत्र भिलाई की निवासी है। उसके पिता ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसके पिता काम पर गए हुए थे वह जब घर पर लौटे तो उसकी पत्नी ने बताया कि लड़की बिना बताए घर से कहीं चली गई है और उसने किसी अनहोनी के होने की आशंका जाहिर की।

 मामले के सह अभियुक्त राजू बांधे की विचारण के दौरान 23 मार्च 2020 को मृत्यु हो गई जिससे उसके खिलाफ संस्थित प्रकरण को समाप्त कर दिया गया।  न्यायालय में विचरण के दौरान अभियुक्त की ओर से कोई बचाव साक्ष्य पेश नहीं किया गया।

न्यायालय ने मामले में विचारण में पाया कि अभियुक्त के द्वारा 18 वर्ष से कम उम्र की अवयस्क बालिका का व्यपहरण कर उसके साथ अनेक बार ब्लॉतसंग तथा गुरुत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला जैसा  अपराध  किया गया  है। अभियोक्त्री को उक्त अपराध के समय  से ही मानसिक और शारीरिक पीड़ा को भुगतना पड़ा है जिसकी कल्पना करना भी असहनीय है। न्यायालय के द्वारा अभियुक्त दीपक बांधे को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 2 ढ के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹10000 का अर्थदंड तथा और अर्थदंड ना अदा करने पर  1 साल अतिरिक्त सश्रम कारावास और धारा 366 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹100 अर्थदंड तथा और सेकंड न पाए जाने पर 1 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। यह दोनों सजाएं एक साथ चलेगी।

अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से दलील दी गई कि अभियुक्त 27 वर्षीय युवक है और उसका यह पहला अपराध है अतः उसे न्यूनतम दंड दिया जाए।

अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक का यह तर्क रहा कि अभियोक्त्री 18 वर्ष से कम उम्र की  नाबालिग बालिका है जिसके साथ विवाह का प्रलोभन देकर बार-बार ब्लॉतसंग किया गया तथा गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला का अपराध कारित किया गया है, इसलिए अभियुक्त को कठोरतम दंड से दंडित किया जाए। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक संतोष कसार ने पक्ष रखा।