धान की खरीदी की तारीख में क्या हो सकती है बढ़ोतरी ?अभी भी हो रही है जगह जगह बारिश, फसल में नमी अधिक होने की खबर, 17% से अधिक नमी होने पर किसानों को धान बेचने में होगी समस्या


समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने की तारीख 15 दिन आगे बढ़ने की सुगबुगाहट


 रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर।

असल बात न्यूज़।। 

    00 कृषि डायरी /अशोक त्रिपाठी 

राज्य के ज्यादातर इलाकों में अभी भी रह-रहकर बारिश हो रही है। यह बारिश सामान्य नहीं, तेज बारिश हो रही है, और काफी देर तक हो रही है। सूर्यदेव के दर्शन हो रहे हैं। धूप निकल रही है लेकिन धूप चटख नहीं है।  नदी नालों में जल चल रहा है। खेत जाने वाले रास्ते कीचड़ से सने हुए हैं। स्वाभाविक है कि ऐसे में फसल में भी काफी नमी बनी हुई है। किसानों को अभी डर हो रहा है कि बारिश हो रही है तो फसल की कटाई शुरू कर देने पर वह, पानी में भीग कर खराब ना होने लगे। फसल को सुरक्षित रखने का सभी के पास ठिकाना नहीं है। नमी अधिक होने के कारण कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव अधिक बार करना पड़ रहा है। जल्दी पकने वाला हरना धान तैयार हो गया है। जिन किसानों ने इसकी फसल ली है उन्हें चिंता है कि इसे तुरंत नहीं काटा गया था यह फसल खेतों में पड़े पड़े खराब हो सकती है। राज्य सरकार ने आगामी एक नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने की घोषणा कर दी है,जिसको लेकर कृषको में उत्साह दिख रहा है। इस उत्साह के बीच किसानों में इसकी चिंता भी बढ़ रहे कि "नमी" होने के कारण मंडी में कहीं उनका ध्यान रिजेक्ट ना कर दिया जाने लगे। अच्छी फसल के साथ अब बारिश किसानों में नुकसान की चिंता पैदा कर रही है। 

पिछले साल राज्य में धान खरीदी देर से शुरू हुई थी तो जमकर बवाल हुआ था। विपक्ष को भी इससे, सरकार के खिलाफ बोलने को बड़ा मुद्दा मिल गया था। राज्य सरकार ने संभवत इस स्थिति को समझ और भांप लिया  कि गड़बड़ी कहां हो रही है। और संभवत इसी में सुधार करते हुए इस साल एक नवंबर से ही धान की खरीदी करने की घोषणा कर दी गई है। धान खरीदी जल्दी, शुरू करने की घोषणा का हर जगह अच्छा स्वागत दिखा है। अब, इंद्रदेव की अभी भी जो अच्छी -खासी मेहरबानी बनी हुई है उससे दिक्कत पैदा होती दिख रही है। छोटे तालाब, जलाशय, बांध, नाले भरपूर भरे हुए हैं जिससे साल भर भूजल स्तर सामान्य बने रहने की उम्मीद है। यह सब ठीक है लेकिन खेतों में जो नमी बनी हुई है, रास्ते बिगड़े पड़े हैं, बारिश हो जा रही है उससे किसानों मैं चिंता पैदा हो रही है। स्वाभाविक तौर पर सभी किसानों के पास फसल काटने के बाद उसे सुरक्षित रखने की जगह नहीं है। फसल को काटकर खेतों से मुख्य मार्ग तक  लाने के रास्ते कीचड़ भर जाएंगे कारण बिगड़े पड़े हैं। देखिए, किस्मत का क्या निराला खेल है। पिछले बार भी फसल को रखने की समस्या थी और इस बार भी यही समस्या किसानों के सामने आ गई है।पिछले साल, सरकार ने धान की खरीदी देर से शुरू की थी। उस समय किसानों की चिंता थी कि फसल, उन सभी ने काट ली है , सरकार धान की खरीदी देर से कर रही है तो उसे सुरक्षित कहां रखेंगे। घर में फसल रखने पर उसे चूहे, पक्षी नुकसान पहुंचा सकते हैं। नए सीजन में भी किसानों के सामने फसल को सुरक्षित रखने की चिंता है।

 जो संपन्न किसान हैं जाहिर है कि उनके पास सब तरह के साधन है। वे फसल को सुरक्षित रखने का साधन भी जुटा लेंगे और अधिक नमी  की समस्या से भी निपट लेंगे। आम किसानों को इससे अपने स्तर पर निपटना पड़ेगा ।  अभी उनके सामने नमी के कारण चिंता पैदा हो गई है। मंडियों की अपनी एक निर्धारित सीमा है कि इतने प्रतिशत तक ही धान में नमी होने पर उसकी खरीदी की जाएगी अन्यथा नहीं। अभी पूरे वातावरण में 33% से अधिक आद्रता बनी हुई है। बारिश बार-बार होने से खेतों में धान बार-बार भीग रहे हैं। जाहिर है कि ऐसे में उनमें अधिक नमी बनी ही रहेगी। किसानों की चिंता है कि इतनी अधिक नमी वाले धान की खरीदी मंडियों में नहीं हो पाएगी और वे धान लेकर मंडियों में पहुंचेंगे तो उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ सकता है। पिछले साल धान की देर से खरीदी शुरू होने में समस्या लग रही थी तो इस साल धान की जल्दी खरीदी शुरू होने से समस्या दिख रही है। लेकिन किसानों की यह चिंता स्वाभाविक लग रही है। धान खरीदी 1 नवंबर से शुरू होने वाली है। उसमें अभी बीस दिनों से अधिक का समय का है। लेकिन ऐसा कहीं नहीं लग रहा है कि 20 दिनों के बाद या समस्या हल हो जाने वाली है। अभी भी ज्यादातर स्थानों पर रुक रुक कर हल्की और मध्यम बारिश होने की संभावना  बनी हुई है। ऐसे में जो "नमी" की समस्या है वह तो शीघ्र हल होने वाली नजर नहीं आ रही है।

बारिश रुक नहीं रही है और मंडियों में धान पहुंचना शुरू हो जाएगा तो मंडियों को भी कई समस्याओ से दो-चार होना पड़ेगा । यह तो तय है कि सभी मंडी समितियों में धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं है।बारिश से मंडियों में धान की खरीदी की तैयारियां भी पिछड़ रही है। धान खरीदी शुरू होने पर मंडियों में धान की आवक शुरुआत से ही तेज रहती है। किसानों में अपना धान जल्द से जल्द भेजने की प्रतियोगिता दिखती है। मंडियों के द्वारा धान के लिए आने पर उसमें जो नमी पड़ती है जो नुकसान होता है उसकी जिम्मेदारी मंडी प्रबंधकों पर ही हो जाती है। कोई मंडी समितियां, ऐसे जिम्मेदारी लेकर अपना नुकसान नहीं करना चाहेगी। 

अभी आगे बारिश होने की संभावना कहीं भी खत्म नहीं हुई है। इस सीजन में मानसून के साथ चक्रवर्ती प्रभाव से बारिश हो रही है। पाकिस्तान के बारे में हम सब जानते हैं कि वह कैसे डूब गया है। वहां भी चक्रवाती प्रभाव की वजह से वर्षा हो रही है। यह चक्रवाती प्रभाव अभी भी रह-रहकर बन रहा है। धान में नमी बनी हुई है। खेतों में भी पानी भरा हुआ है। किसानों के सामने फसल की कटाई की चिंता है। ऐसे में कई लोग यह भी कह रहे हैं कि धान की खरीदी की तारीख को आगे बढ़ाया जा सकता है और यह किसानों के लिए अधिक फायदेमंद होगा। नमी अधिक होने के कारण किसानों को धान वापस लेकर  लौटना पड़ेगा तो उससे किसानों को अधिक नुकसान ही है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि नमी के कारण, किसानों को मंडियों से धान लेकर वापस लौटा दिए जाने पर फिर हंगामा शुरू होगा। आगे चलकर यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन सकता है। धान खरीदी शुरू करने की तारीख आगे बढ़ाए जाने की सुगबुगाहट भी शुरू हो रही है। किसान कह रहे हैं कि यह तारीख 15 दिन, आगे बढ़ा देने से किसानों को सहूलियत मिल सकती है। धान खरीदी की तारीख 15 दिन आगे बढ़ने से  किसान, फसल की कटाई देर से कर सकेंगे और जो नमी की समस्या है वह भी दूर हो सकेगी। तब तक हो सकता है कि धूप सामान्य रूप से निकलने लगे। वही मंडियों  में भी धान खरीदी की पूरी तैयारी हो जाएगी। राज्य में अंबिकापुर संभाग के जिलों को छोड़कर लगभग सभी जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है। बस्तर संभाग में तो काफी अधिक बारिश हुई है। वहां के खेतों में धान कटाई की अधिक समस्या दिख रही है।

जिन किसानों ने हरूना धान की फसल ली है उनके खेतों में धान में बालिया निकल आई दिख रही है। 15- 20 दिनों के भीतर इस फसल की कटाई करना जरूरी हो जाएगा। अच्छी बात है कि, जिन किसानों ने जल्दी पकने वाले इस धान की फसल भी है उनके पास उसे सुरक्षित रखने की व्यवस्था है। और ये किसान अपना धान बेचने मंडियों में जल्दी पहुंचेंगे। 

बारदाना की कमी की समस्या इस बार भी आने वाली है। प्रत्येक जिलों में जितने बारदाना के गठन की मांग की गई है। वैसे जो जागरूक किसान है उन सभी ने अपने लिए पहले से ही बारदाना की व्यवस्था कर ली है। सरकार भी पुराने बारदानों से ही धान खरीदी करने पर जोर देने के मूड में हैं। वैसे कहा जा रहा है कि यह साल, किसानों के लिए खुशियां और समृद्धि लेकर आने जा रहा है। मां लक्ष्मी की कृपा, किसानों पर अधिक बरसने जा रही है। दीप पर्व पर रोशनी की चमक अधिक सुनहरी और तेज रहेगी।


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