लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण के अपराध के मामले में अभियुक्त को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा

 दुर्ग।

असल बात न्यूज़।।  

  00  विधि संवाददाता

चतुर्थ एफटीएससी विशेष न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश दुर्ग श्रीमती संगीता नितिन तिवारी के न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 366 और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के मामले में दोष सिद्ध पाए जाने पर अभियुक्त को 10 साल के सश्रम कारावास की और ₹10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय के द्वारा अर्थदंड की संपूर्ण राशि अभियोक्तरी  को बतौर क्षतिपूर्ति प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। अभियुक्त इस समय जमानत पर है उसे तत्काल अभिरक्षा में लेकर  केंद्रीय जेल दुर्ग भेजने का निर्देश दिया गया है।

सुपेला भिलाई थाना क्षेत्र के अंतर्गत का यह मामला जून 2017 का है और न्यायालय में लगभग 5 वर्ष और 4 महीने तक सुनवाई और विचारण चला। मामले के बारे में प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी सूरज साहू को कोहका भिलाई का निवासी है तथा अभियोक्त्री  उसकी पड़ोसी है।अभियोक्त्री घटना के समय लगभग 17 वर्ष की थी तथा घटना के दिन से  लगभग डेढ़ माह बाद वह अभियुक्त के साथ गोंदिया में पाई गई थी। 

न्यायालय ने मामले में विचारण में पाया कि अभियुक्त के द्वारा 18 वर्ष से कम उम्र की अवयस्क बालिका का व्यपहरण कर उसके साथ अनेक बार ब्लॉतसंग तथा गुरुत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला जैसा  अपराध  किया गया  है। अभियोक्त्री को उक्त अपराध के समय  से ही मानसिक और शारीरिक पीड़ा को भुगतना पड़ा है जिसकी कल्पना करना भी असहनीय है। 

अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से दलील दी गई कि अभियुक्त 27 वर्षीय युवक है और उसका यह पहला अपराध है अतः उसे न्यूनतम दंड दिया जाए।

अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक का यह तर्क रहा कि अभियोक्त्री 18 वर्ष से कम उम्र की  नाबालिग बालिका है जिसके साथ विवाह का प्रलोभन देकर बार-बार ब्लॉतसंग किया गया तथा गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला का अपराध कारित किया गया है, इसलिए अभियुक्त को कठोरतम दंड से दंडित किया जाए। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक संतोष कसार ने पक्ष रखा।