स्कूलों और महाविद्यालयों की परीक्षाएं इस साल "ऑफलाइन" होने की संभावना


00 इस साल पटरी पर है एजुकेशन, ऑफलाइन परीक्षा होने की उम्मीद

 

 रायपुर, दुर्ग।

असल बात न्यूज़।। 

      00  विशेष संवाददाता

दो साल से अधिक समय तक चलने वाले corona संकट, के बाद अब धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य होता दिख रहा है। औद्योगिक,व्यापारिक, प्रशासनिक, कृषि क्षेत्र के कामकाज पटरी पर लौट आए हैं तो वही एजुकेशन के क्षेत्र में भी सब कुछ सामान्य चल रहा है। नए शैक्षणिक सत्र में कक्षाएं शुरू होने के बाद इस साल स्कूल और महाविद्यालयों मे  कक्षाएं प्रतिदिन लग रही है। ऐसे ही सब कुछ सामान्य रहा तो इस साल ऑफलाइन परीक्षाएं ही होंगी। मेधावी छात्र ऑफलाइन परीक्षाओं का इंतजार कर रहे हैं।

कोरोना संकट से एजुकेशन क्षेत्र भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। स्कूलों और महाविद्यालयों में ऑफलाइन पढ़ाई पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई थी। कहीं भी कक्षाएं नहीं लग रही थी। और ऑनलाइन पढ़ाई से जैसे तैसे पढ़ाई पूरी कराई गई। ऐसे में गांव-गांव में नेटवर्क नहीं होने से पढ़ाई नहीं हो रही थी तो वही यह भी सच्चाई है कि अभी भी लाखों लोगों के पास स्मार्ट मोबाइल नहीं है कि वे सभी ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा प्राप्त कर सकें। ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हुई तो परीक्षाएं भी ऑफलाइन नहीं हो सकी। ढेर सारे शिक्षा विशेषज्ञों के द्वारा ऑनलाइन एग्जाम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पर भी सवाल उठाया जा रहा है कि ऑनलाइन परीक्षा देकर अच्छे नंबर लाने वाले बच्चों का भी भविष्य क्या होगा। माना जा रहा है कि ऑनलाइन परीक्षा में ढेर सारी कमियां है जिन्हें सुधार पाना आसान नहीं है। इन व्यवस्थाओ में सुधार के बिना शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारा नहीं जा सकता। ऑनलाइन परीक्षा में लगभग सभी महाविद्यालयों का रिजल्ट 100% रहा है। कोई भी बच्चा कहीं फेल नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि जो बच्चे कमजोर थे वे भी अच्छे नंबरों से पास हो गए हैं। शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ चाहते हैं कि स्कूलों, महाविद्यालयों में शिक्षा के स्तर की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए offline परीक्षाएं ही होनी चाहिए। वहीं यह भी चिंता जाहिर की जा रही है कि ऑनलाइन परीक्षाओं की अभी जो व्यवस्था है उससे शिक्षा के स्तर में गिरावट आ सकती है। ऐसे में सरकार के द्वारा भी कोई आपदा नहीं होने पर ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने पर ही जोर दिया जा रहा है। 

इस साल शैक्षणिक क्षेत्र की बेहतर शुरुआत हुई है। जुलाई महीने से महाविद्यालयों में एडमिशन शुरू हो गया है। सभी महाविद्यालयों में भारी एडमिशन होने की जानकारी मिली है। एडमिशन के बाद कक्षाएं लगने भी शुरू हो गई है और प्रतिदिन कक्षाएं लग रही हैं जहां ऑफलाइन पढ़ाई हो रही है। कहा जा रहा है कि ऑफ लाइन पढ़ाई होने से बच्चों को फायदा मिला है।

उम्मीद की जा रही है कि नियमित रूप से कक्षाएं लग रही हैं, अभी तक इसमें कोई बाधा नहीं आई है तो इस साल ऑफलाइन परीक्षाएं ही होंगी। ऐसा हुआ तो कोरोना संकट के दो साल के बाद ऑफलाइन परीक्षाएं होंगी। इसमें एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि छात्रों को पिछले 2 वर्षों से ऑनलाइन परीक्षा देने की आदत पड़ गई है। ऑफलाइन परीक्षा के आयोजन के पहले सरकार और महाविद्यालयों को अपने छात्रों को मानसिक तौर पर तैयार करना होगा और विश्वास दिलाना होगा कि इस बार ऑफलाइन परीक्षा देनी है जिसके लिए अभी से कड़ी मेहनत करनी होगी। मानसिक रूप से तैयार होने पर बच्चों को ऑफलाइन परीक्षाएं देने पर कोई दिक्कत नहीं होगी। 

यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि पिछले कुछ महीनो के दौरान जो भी प्रतियोगी  परीक्षाएं हुई हैं सभी ऑफलाइन परीक्षाएं हुई हैं। तमाम तैयारियों और सुविधाओं के साथ इन परीक्षाओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है जिसमें किसी को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा है। ऐसे में अब ऑफलाइन परीक्षाएं सामान्य रूप से आयोजित होंगी,इसकी संभावना प्रबल हो गई है और शिक्षा जगत में सब कुछ सामान्य होता नजर आएगा।