000  विशेष आलेख 

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री अमित शाहअलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रिगणगृह मंत्री जीराज्यों के पुलिस महानिदेशकगृह मंत्रालय के वरिष्ठ पदाधिकारीगणअन्य सभी महानुभावदेवियों और सज्जनों ! आजकल देश में उत्सव का माहौल है। ओणमईददशहरादुर्गा पूजादीपावली सहित अनेक उत्सव शांति और सौहार्द के साथ देशवासियों ने मनाए हैं। अभी छठ पूजा समेत कई अन्य त्यौहार भी हैं। विभिन्न चुनौतियों के बीचइन त्यौहारों में देश की एकता का सशक्त होनाआपकी तैयारियों का भी प्रतिबिंब हैं। संविधान में भले कानून और व्यवस्था राज्यों का दायित्व हैलेकिन ये देश की एकता-अखंडता के साथ भी उतने ही जुड़े हुए हैं। सूरजकुंड में हो रहा गृह मंत्रियों का ये चिंतन शिविरकॉपरेटिव फेडरेलिज्म का भी एक उत्तम उदाहरण है। हर एक राज्य एक दूसरे से सीखेएक दूसरे से प्रेरणा लेंदेश की बेहतरी के लिए मिल-जुलकर के काम करेये संविधान की भी भावना है और देशवासियों के प्रति हमारा दायित्व भी है।

साथियों,

आज़ादी का अमृतकाल हमारे सामने है। आने वाले 25 साल देश में एक अमृत पीढ़ी के निर्माण के हैं। ये अमृत पीढ़ीपंच प्रणों के संकल्पों को धारण करके निर्मित होगी। विकसित भारत का निर्माणगुलामी की हर सोच से मुक्तिविरासत पर गर्वएकता और एकजुटता और सबसे प्रमुख बात नागरिक कर्तव्यइन पंच प्रणों का महत्व आप सभी भली-भांति जानते हैंसमझते हैं। ये एक विराट संकल्प हैजिसको सिर्फ और सिर्फ सबका प्रयास से ही सिद्ध किया जा सकता है। तरीके अपने-अपने हो सकते हैंरास्ते, priority अलग-अलग हो सकती हैंलेकिन ये पंच प्रण देश के हर राज्य में हमारी गवर्नेंस की प्रेरणा होने चाहिए। जब ये सुशासन के मूल में होंगेतो भारत के सामर्थ्य का विराट विस्तार होगा। जब देश का सामर्थ्य बढ़ेगा तो देश के हर नागरिकहर परिवार का सामर्थ्य बढ़ेगा। यही तो सुशासन हैजिसका लाभ देश के हर राज्य को समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसमें आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

यहां आप में से अधिकतर या तो राज्य को नेतृत्व दे रहे हैंया फिर सीधे-सीधे कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कानून व्यवस्था का सीधा संबंधराज्य के विकास से है। इसलिए राज्यों में विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में आप सभी के निर्णय और नीतियां और आपकी रीति ये बहुत अहम हैं।

साथियों,

कानून-व्यवस्था के पूरे तंत्र का विश्वसनीय होनाजनता के बीच उनका Perception क्या हैये भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आपने देखा है कि जब भी कोई natural calamity  होती हैप्राकृतिक आपदा हाती हैतो इन दिनों NDRF की, SDRF की एक पहचान बनी हुई है। उनको यूनिफार्मवो संकट के समय पहले पहुंच जाना और उसके कारण देशवासियों के मन में इनके प्रति एक विश्वास बना है कि भाईये आए हैं चलिए संभल जाएगाये जो कह रहे हैं मानना चाहिए। इनकी बातें अगर स्वीकार करेंगे तो हमारा नुकसान कम होगा। और आप देखिए NDRF में है कौन भाई? SDRF में है कौनआप ही के सब साथी हैं। सुरक्षाबल के जवान ही हैं। लेकिन समाज में उनके प्रति बड़ी श्रद्धा बन गई है। आपदा के समय में जैसे ही NDRF-SDRF की टीम पहुंचती हैवैसे ही लोगों को संतोष होने लगता है कि अब एक्सपर्ट टीम पहुंच गई हैअब ये अपना काम कर लेंगे।

साथियों,

अपराध वाली किसी भी जगह पर जैसे ही पुलिस पहुंचती हैलोगों में ये भाव आता है कि सरकार पहुंच गई। कोरोना काल में भी हमने देखा है कि किस तरह पुलिस की साख बेहतर हुई थी। पुलिस के लोग जरूरतमंदों की मदद कर रहे थेजरूरी संसाधान जुटा रहे थेअपनी ही जिंदगी को दांव पर लगा रह थे। यानि कर्तव्य परायणता में कोई कमी नहीं हैजरूरत अच्छा  Perception बनाए रखने की भी हैइसके लिए पुलिस बल को प्रेरित करनाउसके लिए प्लान करनाहर छोटी-मोटी चीजों पर लगातार मार्गदर्शन करते रहनाकुछ गलत होता है तो रोकनाये हमारी एक जीवंत प्रक्रिया होनी चाहिएऊपर से नीचे तक हर पल होनी चाहिए। 


साथियों,

अपराध वाली किसी भी जगह पर जैसे ही पुलिस पहुंचती हैलोगों में ये भाव आता है कि सरकार पहुंच गई। कोरोना काल में भी हमने देखा है कि किस तरह पुलिस की साख बेहतर हुई थी। पुलिस के लोग जरूरतमंदों की मदद कर रहे थेजरूरी संसाधान जुटा रहे थेअपनी ही जिंदगी को दांव पर लगा रह थे। यानि कर्तव्य परायणता में कोई कमी नहीं हैजरूरत अच्छा Perception बनाए रखने की भी हैइसके लिए पुलिस बल को प्रेरित करनाउसके लिए प्लान करनाहर छोटी-मोटी चीजों पर लगातार मार्गदर्शन करते रहनाकुछ गलत होता है तो रोकनाये हमारी एक जीवंत प्रक्रिया होनी चाहिएऊपर से नीचे तक हर पल होनी चाहिए।

साथियों,

हमें एक बात और समझनी होगी। अब कानून व्यवस्था किसी एक राज्य के दायरे में सिमटी रहने वाली व्यवस्था नहीं रह गई है। अब अपराध Inter-state और Inter-national हो रहे हैं। यानि टेक्नोलॉजी की मदद से एक राज्य में बैठे अपराधीदूसरे राज्य में भयंकर अपराध करने की ताकत रखते हैं। देश की सीमा से बाहर बैठे अपराधी भी टेक्नोलॉजी का जमकर गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए हर राज्य की एजेंसियों का आपस में तालमेलकेंद्र और राज्य की एजेंसियों का आपस में तालमेल ये बहुत जरूरी है। और इसीलिए आपको मालूम होगा मैंने डीजीपी कांफ्रेंस में कहा था कि दो adjoining state होते हैं उसके जो adjourning district होते हैं उन्होंने periodically बैठकर के दोनों राज्यों की दोनों जिलों की समस्याओं का संकलन करना चाहिएसाथ मिलकर काम करना चाहिए। उसी में से ताकत बनेगी। कई बार केंद्रीय एजेंसियों को कई राज्यों में एक साथ जांच करनी पड़ती है। दूसरे देशों में भी जाना पड़ता है। इसलिए हर राज्य का दायित्व है कि चाहे राज्य की एजेंसी होचाहे केंद्र की एजेंसी हो या संबंधित कहीं किसी और राज्य से संपर्क आता है। सभी एजेंसियों को एक दूसरे को पूरा सहयोग देना चाहिए। कोई बड़ा हैकोई छोटा हैकिसका अधिकार है उसी में कभी-कभी तो हम देखते हैं एक आधी एफआईआर रजिस्टर नहीं हुईक्यों नहीं हुई तो बोले ये तय नहीं हो रहा है कि वो जो जगह है वो इस थाने में पड़ती है कि उस थाने में पड़ती है। ये जो चीजें हैं वो सिर्फ पुलिस-थाने तक नहीं हैं। राज्यों के बीच भी हो जाती हैं। केंद्र और राज्यों के बीच में  हो जाती हैं। भारत और विदेश की व्यवस्थाओं के साथ हो जाती हैं। इसलिए हमारी efficiency के लिएहमारे outcome के लिए सामान्य नागरिक को सुरक्षा देने के लिए हमारे बीच में तालमेलसंकलनसहयोग बहुत अनिवार्य है। और इसके लिए जितना संकलन बढ़ेगाआपके राज्य की भी ताकत बढ़ने वाली है।

साथियों,

साइबर क्राइम हो या फिर ड्रोन टेक्नॉलॉजी का हथियारों और ड्रग्स तस्करी में उपयोगइनके लिए हमें नई टेक्नॉलॉजी पर काम करते रहना होगा। अब देखिए हम 5G के युग में घुस गए हैंतेजी से 5G पहुंचने वाला है। अब 5G के जितने लाभ हैंइतनी ही जागरुकता भी जरूरी रहेगी।  5G से facial recognition technology, automatic number-plate recognition technology, drones और CCTV जैसी टेक्नॉलॉजी की परफॉर्मेंस में कई गुणा सुधार होने वाला है। लेकिन हम जितनी तेजी से आगे बढ़ेंगेजो क्राइम करने वाला वर्ल्ड हैउसका भी ग्लोबलाइजेशन हो चुका है। वो भी interested हो चुका है। वो भी टेक्नोलॉजी में forward हो चुके हैं। मतलब हमें उनसे दस कदम आगे जाना होगा। हमें हमारी कानून व्यवस्था को भी स्मार्ट बनाना इसके लिए बहुत ही आग्रह से काम करना पड़ेगा।

साथियों,

मेरा आग्रह ये भी है कि टेक्नोलॉजी को कृपा करके बजट के तराजू से ना तौलें। और मेरा सभी आदरणीय मुख्यमंत्रियों सेसभी आदरणीय गृहमंत्रियों से इस विषय में एक टीम बनाकर के दुनिया में criminal world की किस टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहा हैउपलब्ध टेक्नोलॉजी हमारे लोगों को कैसे सुरक्षा दे सकती हैइस पर गंभीरता से सोचना चाहिए और इसमें जो बजट जाएगा वो बाकी सैकड़ों खर्चों को बचाने का कारण बन जाएगा। और इसलिए टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल पूरे पुलिस तंत्र को तो मजबूत करता ही करता हैसामान्य मानवी को सुरक्षा देना का एक विश्वास नीचे तक हम पहुंचा सकते हैं। टेक्नोलॉजी, Crime Prevention में भी मदद करती है और Crime  detection में भी, Crime Investigation में भी बहुत काम आती है।


साथियों,

इस प्रकार की नई टेक्नॉलॉजी के विकास के लिए केंद्र सरकार ने पुलिस टेक्नॉलॉजी मिशन भी शुरु किया है। अनेक राज्य भी इसमें अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। लेकिन ये अनुभव  रहा है कि हमारे अलग-अलग प्रयोग होने के कारण हमारी टेक्नोलॉजी एक दूसरे के साथ बात नहीं करती हैऔर इसलिए हमारी एनर्जी waste होती है। वो जो भी मेटरियल हैवो उस राज्य तक सीमित रहता है।  हमें कॉमन प्लेटफार्म के विषय में बड़ा मन रखकर के सोचना ही पड़ेगा। किसी एक के पास बहुत उत्तम चीज है तो ये मानकर के  बैठें कि मेरे पास हैमैं तो किसी को दूंगा नहींमैं अपनी ताकत बनाए रखूँगाएक समय आएगा कि इतनी उत्तम टेक्नोलॉजी होगी और लोगों के सहयोग में नहीं होगी तो stand alone निकम्मी हो जाएगी। और इसलिए टेक्नोलॉजी में भारत के संदर्भ में सोचना हमारी सभी best practices, best innovation कॉमन लिंक वाले ही होने चाहिए, Inter operable होने चाहिएएक दूसरे के साथ लगातार सरलता से बात कर सके ये व्यवस्थाएं अनिवार्य है।

साथियों,

आज फॉरेंसिक साइंस का महात्मय बढ़ रहा हैऔर वो सिर्फ पुलिस महकमे तक सीमित नहीं है जी! Legal fraternity को फॉरेंसिक साइंस को समझना पड़ेगा, Judiciary को फॉरेंसिक साइंस समझना पड़ेगा, Even हॉस्पिटल को भी फॉरेंसिक साइंस समझना पड़ेगा। इन सबके प्रयत्न से ही फॉरेंसिक साइंस का उपयोग क्राइम और क्रिमिनल को सजा दिलाने में बहुत काम  सकता है।  अकेले पुलिस के पास फॉरेंसिक साइंस की कुछ व्यवस्था हैंये enough नहीं होगा। और इसलिए हर राज्य में हमें संकलित और संतुलित व्यवस्था हर राज्य को गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की और उसकी क्षमता आज दुनिया के 60-70 देश फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का लाभ ले रहे हैं। हमारे राज्यों को भी बढ़-चढ़कर लाभ लेना चाहिए। ये पूरी तरह futuristic technology driven व्यवस्था है। Human Resource Development का भी वहां काम हैनए-नए टेक्नोलॉजी टूल बनाने का भी काम है। और बड़े कठिन केसेस को सुलझाने में भी वो लैब काम  रही है। मैं समझता हूं कि इस व्यवस्था का उपयोग सभी राज्य सक्रियता से कैसे करें?

साथियों,

कानून व्यवस्था को बनाए रखनाएक 24x7 वाला काम है। लेकिन किसी भी काम में ये भी आवश्यक है कि हम निरंतर प्रकियाओं में सुधार करते चलेंउन्हें आधुनिक बनाते चलें। बीते वर्षों में भारत सरकार के स्तर पर कानून व्यवस्था से जुड़े जो Reforms हुए हैंउन्होंने पूरे देश में शांति का वातावरण बनाने में मदद की है। आप भी जानते हैं कि भारत की विविधताभारत की विशालता की वजह से हमारे law enforcement system पर कितना दबाव होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हमारा ये सिस्टम सही दिशा में ऊर्जा लगाए। वर्ना हमने देखा है कि कितने ही अनावश्यक केसों मेंछोटी-छोटी गलतियों की जांच में ही पुलिस डिपार्टमेंट की ऊर्जा चली जाती है। इसलिए हमने व्यापार-कारोबार से जुड़े अनेकों प्रावधानों को अब decriminalize कर दिया हैउन्हें अपराध की श्रेणी से बाहर निकाल दिया है। डेढ़ हजार से ज्यादा पुराने कानूनों को समाप्त करके भविष्य का बहुत बड़ा बोझ कम किया गया है। मैं तो राज्यों से भी आग्रह करता हूं आप भी अपने यहां कानूनों को evaluate कीजिए। आजादी के पहले के जितने कानून हैंउनको वर्तमान तरीकों के साथ बदलिए। हर कानून में क्रिमिनल एंगल और निर्दोष नागरिकों को परेशानी वो वक्त चला गया है जी।

साथियों,

सरकार को अब जैसे स्वामित्व योजनाये स्वामित्व योजना के तहत देश के गांवों में ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्रॉपर्टी कार्ड वितरित कर रहे हैंवो भी जमीन से जुड़े विवादों को कम करेंगेझगड़े खत्म होंगे गांव के। वरना गांव की समस्या ज्यादातर एक फुट जमीन जिसने ले ली उसी में से बड़े-बड़े झगड़े हो जाते थे।

साथियों,

परोक्ष और अपरोक्ष रूप से किए गए ऐसे अनेक प्रयासों से law enforcement एजेंसियों को भी अपनी प्राथमिकता तय करने में बहुत मदद मिली है। लेकिन हम जब पूरे कैनवास पर चीजों को रखकर के अपनी स्ट्रेटजी में बदलाव नहीं करेंगे, 20-30-50 साल पुरानी पद्धतियों से चलेंगे तो शायद इन चीजों का फायदा नहीं मिलेगा। बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों ने भी कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है। 


आतंकवाद होहवाला नेटवर्क होभ्रष्टाचार होइस पर आज देश में अभूतपूर्व सख्ती दिखाई जा रही है। लोगों में विश्वास पनपने लगा है। UAPA जैसे कानूनों ने आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई में व्यवस्थाओं को ताकत दी है। यानि एक तरफ हम देश के law enforcement system काउसकी क्षमता बढ़ा रहे हैं तो दूसरी तरफ उन पर अनावश्यक बोझ को भी हटा सकें।

साथियों,

एक और विषय हमारे देश की पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। जैसे आज देश में One Nation, One Ration Card की व्यवस्था बनी है, One Nation-One Mobility Card की व्यवस्था हो रही है, One Nation-One Grid बना है, One Nation-One Sign Language बनी हैवैसे ही पुलिस की वर्दी को भी लेकर भी ऐसी ही कोई अप्रोच अपनाई जा सकती है। क्या हमारे राज्य मिल बैठकर केइससे बहुत लाभ होंगेएक तो Quality material product होगाक्योंकि mass scale पर होगा। कैप होगी तो करोड़ों कैपेज की जरूरत पड़ेगी। बेल्ट चाहिए तो करोड़ों में चाहिएगा। और देश को कोई भी नागरिक कहीं पर भी जाएगा देखते ही उसको पता चलेगा हां ये पुलिस वाला है। अब जैसे पोस्ट ऑफिस का डिब्बा। हिन्दुस्तान में कोई पढ़ा-लिखाअनपढ़ आदमी को मालूम है ये पोस्ट का डिब्बा है। यानि कागज डाला वहां पहुंचता है। एक पहचान होती है। हमारे लिए भी आवश्यक है कि हमारे देश के पुलिस बेड़े मेंहम सोंचेसाथ मिलकर के सोंचेकोई किसी पर थोपने की जरूरत नहीं हैएक evolve करें। आप देखिए बहुत बड़ा लाभ होगा और एक दूसरे की ताकत में इजाफा होगा। One Nation- One Police Uniform, हां उस राज्य का एक टैग हो सकता हैउस राज्य का एक नंबर हो सकता हैलेकिन पहचान कॉमन बनेइस पर सोचेंमैं एक विचार के रूप में रख रहा हूं। ना मैं कोई आपसे आग्रह भी करता हूं। मैं सिर्फ एक विचार रखता हूं। और इस विचार पर चर्चा कीजिए। कभी ठीक लगे 5 साल 50 साल 100 साल के बाद भी उपयोगी लगेगातो जरूर देखिए। उसी प्रकार से अलग-अलग प्रकार की पुलिस के नए-नए विभाग शुरू हुए हैं। Expertise आई है।

अब हम देखिए दुनिया में दूरिज्म का बहुत बड़ा मार्केट है। भारत में टूरिज्म की संभावनाएं बहुत बढ़ रही हैं। विश्व से बहुत बड़ी मात्रा में टूरिस्टों का भारत में आने का प्रवाह बढ़ना ही बढ़ना है। आज दुनिया में कई देश जो टूरिज्म के क्षेत्र में बहुत आगे हैं। वहां टूरिज्म के लिए काम करने वाली पुलिस बनाई जाती है। उनकी ट्रेनिंग अलग होती है। उनको languages भी सिखाई जाती है।  उनके behaviour पूरी तरह चेंज होता है। और यात्रियों को भी विदेश के टूरिस्टों को भी पता होता है कि भाई ये मदद करने के लिए पुलिस की व्यवस्था है और वो पुलिस होने के कारण वो Police Enforcement  जो Institutes है उससे भी बड़ी आसानी से संकलन कर पाता है। कभी  कभी हमे हमारे देश में इस सुविधा की expertise को डेवलप करना ही पड़ेगा। ताकि भारत में टूरिज्म के लिए  विश्वभर से आने वाले आदमी और एक पूंजी निवेश के लिए आने वाले में बहुत फर्क है। टूरिस्ट तुरंत आपका एंबेसडर बन जाता है। अच्छी चीज भी वही दुनिया में ले जाएगाबुरी चीज भी वही दुनिया में ले जाएगा। पूंजी निवेश जो करता है उसको इस काम में काफी समय लग जाता है अगर गलत हो गया तो। लेकिन टूरिस्ट तो दो दिन में ही खबर पहुंचा देता है अरे यार भाई यहां तो ये हाल है।  और इसलिए आज भारत में भी मिडिल क्लास का  बल्क इतना बढ़ रहा है टूरिज्म को लेकर के बहुत बदलाव  रहा है। अब टूरिज्म और ट्रैफिक नई समस्या  रही है। अब हम एडवांस में नहीं सोचेंगे, alternate नहीं सोचेंगे तो वहीं टूरिज्म के हमारे सेंटर्स तो कोई बदलने वाले नहीं है। हम कहें कि भाई आप  शिमला नहीं वहाँ जाइये तो ये तो होने से शिमला जिसको जाना है शिमला ही जाएगा। नैनीताल जाना है वो नैनीताल ही जाएगाश्रीनगर जाना है वो श्रीनगर ही जाएगागुलमर्ग जाना है वो गुलमर्ग ही जाएगा। हमें व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा।

साथियों,

हमने देखा हैकोरोना के समय में जब पुलिस के लोग अपने क्षेत्रों के लोगों को फोन करके पूछते थे और  खासकर के मैंने देखा है कुछ शहरों में senior citizen के लिए पुलिस में जो बड़ी आयु के लोग हैंजिनसे अब ज्यादा मजदूरी करवाना उनके साथ भी अत्याचार है। उन्होंने स्वेच्छा से ऐसे काम लिए हैं। और वे Senior Citizens को लगातार पूछते हैं ठीक हो नाकहीं बाहर तो जाने वाले नहीं हो नाघर बंद करके जाने वाले नहीं हो नाइसके कारण नागरिकों का जो confidence बढ़ता है।