प्रत्येक जिले में मोबाइल वैन देकर शुरू होगी सुविधा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की घोषणा

 


छत्तीसगढ़ में गाय-बैलों जैसे मवेशियों के लिए मोबाइल चिकित्सा यूनिट शुरू होने जा रही है। इसे मुख्यमंत्री गोवंश मोबाइल चिकित्सा योजना कहा जाएगा। इसके पहले चरण में प्रत्येक जिले में एक-दो चिकित्सा वाहनों से योजना की शुरुआत की जानी है। बाद में चरणबद्ध तरीके से योजना का विस्तार किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया, वर्तमान में सरकारी पशु-चिकित्सालयों के साथ-साथ राज्य में सुराजी गांव योजना के तहत बने गोठानों में भी पशुधन के स्वास्थ्य की देखभाल की व्यवस्था है। बेहतर पशु स्वास्थ्य के लिए गोठानों में चारागाहों का भी विकास किया गया, ताकि पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की व्यवस्था होती रहे। अब नई योजना के माध्यम से गोवंश की स्वास्थ्य सुविधाओं का और अधिक विस्तार होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्य सचिव अमिताभ जैन को इस संबंध में शीघ्र आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है। वर्ष 2019 में हुई पशुगणना के मुताबिक प्रदेश में गाे-वंशीय पशुओं की कुल संख्या 99 लाख 84 हजार बताई गई है। इसमें बड़ी संख्या देसी गायों की है। इसमें लगातार इजाफा भी हो रहा है। सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना गायों पर ही आधारित है। इस लिहाज से यह योजना काफी महत्वपूर्ण बताई जा रही है।

जनता के लिए पहले से दो योजनाएं

छत्तीसगढ़ में जनता के लिए पहले से ही मोबाइल मेडिकल यूनिट की दो योजनाएं संचालित हैं। इसमें एक मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना है। इसमें मोबाइल मेडिकल यूनिट गांवों के बाजारों-मेलों में लोगों की जांच कर दवा देती है। वहीं मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत शहरी क्षेत्र की कच्ची बस्तियों में मेडिकल कैंप लगाकर जांच और दवा देने की सुविधा प्रदान की जाती है।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट की तर्ज पर ही मवेशियों की चिकित्सा सेवा शुरू करने की तैयारी है।

कई राज्यों में शुरू हुई है 108 जैसी सुविधा

कई राज्यों में डायल 108 एम्बुलेंस जैसी सुविधा पशुओं के लिए भी शुरू हुई है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने हाल ही में इसकी शुरुआत की है। इसमें आपातकाल में कोई भी टोल फ्री नंबर डायल कर एम्बुलेंस सेवा को घर पर अथवा संबंधित ठिकाने पर बुला सकता है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की मोबाइल मेडिकल यूनिट एम्बुलेंस सेवा से अलग होगी। यह गांव-गांव जाकर मवेशियों की जांच कर उपचार आदि करेगी। टीकाकरण में भी इसकी मदद लिया जा सकेगा।