राखी और तीज पर्व के दिन को बैंकों में अवकाश क्यों नहीं घोषित किया जाना चाहिए ?


राखी और तीज पर्व पर बैंकों में भी मिले अवकाश

 रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर।

 असल बात न्यूज़।। 


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बात हो रही है भारतीय संस्कृति और परंपराओ और मान्यताओं को मजबूत बनाने की।बात हो रही है भारत देश को समृद्ध बनाने की। इस दिशा में विभिन्न सरकारों की ओर से अपनी तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं और तमाम नए प्रयास भी शुरू हुए हैं। मजबूती से हम आगे बढ़ने का प्रयास शुरू करते है तो ज्यादातर, अथवा कभी-कभी कुछ बातें जरूर  मनोंमस्तिष्क में नहीं आ पाती, छूट जाती है। लापरवाही से नहीं, असल में सारी चीजों की ओर एकमुश्त ध्यान रख  पाना सबके लिए मुश्किल होता है। हम बात कर रहे हैं बैंकों में घोषित शासकीय अवकाश की। छत्तीसगढ़ राज्य में नई सरकार ने यहां की संस्कृति और मान्यताओ को समझते हुए कई नए त्यौहार के दिन को अवकाश स्वीकृत किया हैं। ऐसे में भी कुछ ऐसा वर्ग है  जो शासन की इन सुविधाओं से वंचित रह गया हैं। बैंक कर्मियों को राखी और तीज पर्व पर अवकाश नहीं मिल रहा है। 

यह तो हम सब जानते हैं कि शासकीय नौकरियों में अब महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। लड़कियां पढ़ने लिखने में अव्वल हो गई हैं। वे अच्छे मार्क्स लाती हैं। नौकरियां भी उन्हें मिल रही हैं और नौकरियां में उन सभी ने अपने आप को लगातार साबित किया है और लगातार ऊंचाइयों पर बढ़ती जा रही हैं। हम पिछले दस- पंद्रह वर्षों की अवधि में छत्तीसगढ़ में नौकरियों की स्थिति पर गौर करें तो यहां भी इस दौरान लड़कियों को ही अधिक संख्या में नौकरिया मिली है। चाहे स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा की बात हो अथवा पंचायत में सचिव व रोजगार सहायक करारोपण अधिकारी की बात हो कृषि विस्तार अधिकारी की बात हो, पुलिस विभाग हो या फिर बैंक हो उन स्थानों पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने ही नौकरियां हासिल करने में सफलता प्राप्त की है। ऐसे में अवकाश स्वीकृत करने में अब महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखना भी जरूरी, अपरिहार्य हो गया है। 

राखी और तीज पर्व  भारत देश में  महिलाओं का  सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार हैं। राखी के दिन बहनों के द्वारा अपने भाइयों को तिलक लगाकर आरती उतारकर राखी बांधी जाती है। हर जगह  बहने, अपने भाई की कलाई को सजाने के लिए इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करती हैं। जो भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मान्यताओं को जानते समझते हैं उन्हें तीज पर्व के बारे में भी अधिक बताने की जरूरत नहीं है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज के ही दिन माता पार्वती ने कठोर तप किया था और इसी से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. यही कारण है कि इस दिन व्रत रखने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है. इस दिन को सुहागिन स्त्रियों के लिए विशेष माना जाता है। संपूर्ण भारत देश में महिलाएं दिनभर व्रत रहकर यह पर्व धूमधाम से मनाती हैं। यह त्यौहार मनाने की परंपरा देश के कोने कोने तक में प्रचलित है। 

जिस दिन महिलायें कठोर व्रत रखकर अपने आराध्य देव की पूजा अर्चना करते हैं, अपने सुहाग की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं, उस दिन भी महिलाओं को बैंकों में दिन भर काम करना पड़ता है। उनके लिए कोई अवकाश स्वीकृत नहीं है। आप सभी समझ सकते हैं, कल्पना कर सकते हैं कि वह दिन कितना कठिन होता होगा जब महिलाओं को दिन भर व्रत रखने के बावजूद ऑफिस वर्क करना पड़ता है, अपने उच्च अधिकारी की बात सुननी पड़ती है और जो उपभोक्ता वहां पहुंचते हैं सारी तकलीफ को दूर रख कर उन्हें भी सुनना पड़ता है। यह आश्चर्यजनक लग सकता है कि जिस पर्व को पूरे देश भर में कोने कोने में मनाया जाता है सभी वर्ग की महिलायें जिस पर्व को अटूट श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाती हैं उस पर्व के लिए अवकाश स्वीकृत नहीं है। ऐसा ही राखी पर्व के दिन भी होता है। समझा जा सकता है कि इस पर्व के दिन बहनों को अत्यंत जल्दबाजी में सुबह-सुबह अपने भाइयों के हाथों में राखी बांधकर बैंकों में ड्यूटी पर जाना पड़ता है। अपने भाइयों के सुख समृद्धि की कामना करने वाले इस पर्व के दिन भी बहने, ड्यूटी पर जाने के चलते भाइयों के साथ घर पर संतोष से समय नहीं बिता सकती। यह खुशी और संतोष की बात कही जा सकती है कि छत्तीसगढ़ राज्य में राज्य सरकार के द्वारा तीज पर्व के दिन को अवकाश घोषित किया गया है। लेकिन यहां भी बैंकों में बहनों को यह अवकाश नहीं मिल रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्य में यह सवाल और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि राखी और तीज पर्व के दिन बैंक को को आकाश को नहीं मिलना चाहिए ? जानकारों का कहना है कि बैंकों में छुट्टी स्वीकृत करने के अपने नियम कायदे हैं। किसी एक बैंक के लिए छुट्टियां स्वीकृत नहीं की जा सकती। राज्य सरकार तय करती है तो सभी बैंकों के लिए एक साथ छुट्टियां स्वीकृत की जा सकती हैं।  महिलाओं के त्यौहार के दिन बैंकों में छुट्टी अवकाश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जा कर देख लीजिए, बैंकों में  पुरुष वर्ग की तुलना में अब महिला कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ गई है। लेकिन उन्हें अपने महत्वपूर्ण परंपरागत  त्यौहार के दिन भी ड्यूटी करनी पड़ती है।बहनों को राखी और तीज पर्व के जैसे महत्वपूर्ण त्यौहार के दिन भी ड्यूटी करनी पड़ती है। अपने परिवार से दूर होकर,अपनी खुशियों को त्याग कर।

समाज में परिवर्तन को अनिवार्य चीज माना जाता है। यह कहां जाता है कि सभी चीजों में बदलाव निश्चित है। ऐसे ही हालात और नौकरियों में भी दिखने लगे हैं। नौकरियों में अब हर जगह महिलाओं की संख्या काफी बढ़ गई है। सच्चाई यह है कि पढ़े-लिखे पुरुषों की तुलना में शिक्षित महिलाओं को अधिक नौकरियां मिल रही हैं। वे  अपनी काबिलियत के दम पर यह नौकरी हासिल कर रही हैं। बैंकों में जाकर देखें तो हर टेबल पर महिला कर्मचारी ही ड्यूटी देती नजर आती हैं। नौकरियों में इस तरह से बदलाव आया हैं तो जो शासकीय अवकाश घोषित हैं और कर्मियों को जो सुविधाएं दी जाती है उनमें भी अब बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। शासकीय अवकाशों को वहां ड्यूटी देने वाले कर्मियों की जरूरतों को देखते हुए घोषित करना जरूरी हो गया है। फिलहाल राखी और तीज पर्व के दिन को बैंकों में अवकाश घोषित करने की मांग पूरे देश भर में तेज होती जा रही है। विडंबना है कि अभी तक इन मांगों की तरफ बैंकों की  कर्मचारी यूनियनो ने भी कभी ध्यान नहीं  आकर्षित किया है। इसका एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि ऐसी यूनियनों में ज्यादातर पुरुष वर्ग ही हावी है। 

"असल बात न्यूज़ परिवार" भी बैंकों में राखी और तीज पर्व के दिन अवकाश देने की मांग के पक्ष में बहनों के साथ है। अगर आप इसके साथ हैं तो बहनों को समर्थन दे सकते हैं। 



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