छत्तीसगढ़ राज्य में गांवो के साथ शहरो में फैलती जा रही है Lumpy Skin disease


बीमार पशुओं के लिए राज्य में क्या उपलब्ध कराई जाएगी आइसोलेशन सुविधाएं 

 रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर।

असल बात न्यूज़।। 

        00  ग्रामीण संवादाता

छत्तीसगढ़ राज्य में गांव-गांव ही नहीं शहरों में भी लंपी स्किन बीमारी फैलती जा रही है। पिछले दो वर्षों से इसका प्रकोप लगातार बढ़ा हुआ दिख रहा है। इंसानों में कोरोना फैल रहा था तो पशुओं में लम्पी स्किन बीमारी फैल रही थी और अब तक सैकड़ों की संख्या में पशु, इसकी चपेट में आकर काल काल के गाल में समा गए हैं। पशुओं में यह बीमारी काफी खतरनाक साबित हो रही है। हर जगह बड़ी संख्या में पशुओं की इस बीमारी की चपेट में आने से मौत हो गई है। ऐसे समय में शासकीय पशु औषधालय योग की व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो रही है। शासकीय पशु औषधालय  की दवाइयां, पशुओं को इस बीमारी से बचाने में पूरी तरह से असमर्थ साबित हुई है। पशुओं की मौत होने का बड़ा कारण यह भी रहा है। 

पशुपालन कितना कठिन काम है यह सबको मालूम है। लेकिन गांव गांव में पशुपालन कीसंस्कृति परंपरा को अभी भी बनाए रखा गया है। जीवित रखा गया है।  पशुओं में जब कोई संक्रामक बीमारियां फैलती हैं तो पशु पालकों का धैर्य टूटने लगता है।Lumpy Skin disease भी पशु पालकों का पूरा धैर्य तोड़ रही है। इसकी मुख्य वजह है कि इस बीमारी के शिकार पशुओं को बचाना मुश्किल हो रहा है। वैसे ऐसा नहीं है कि पशुओं में इस  संक्रामक बीमारी का कहर सिर्फ छत्तीसगढ़ में टूट रहा है बल्कि पूरे देश भर में यह बीमारी फैलने की जानकारी सामने आ रही है।जब इस तरह संक्रामक बीमारियां फैली तो शासन प्रशासन को इससे  निपटने के लिए और अधिक सजग होने की जरूरत महसूस होती है लेकिन यहां  शायद ही कहीं ऐसा नजर आ रहा होगा कि शासन-प्रशासन की सजगता दिखी हो। किसी भी क्षेत्र में इस बीमारी से ग्रसित पशुओं को चिन्हित करने का काम शायद ही कहीं शुरू किया गया है। बहुत सारे इलाके तो ऐसे भी हैं जहां पशुपालकों को यह समझ में ही नहीं आ रहा है कि पशुओं में यह कौन सी बीमारी हो रही है और उनकी मौत क्यों हो जा रही है तथा इससे निपटने के लिए क्या किया जाना चाहिए ? ऐसे में पशुपालक ग्रामीणों को शासन से और अधिक सहयोग की जरूरत है लेकिन ऐसा कोई सहयोग वहां पहुंच नहीं रहा है। 

लम्पी स्किन डिजीज से संक्रमित हो जाने पर पशुओं की स्किन पर  अचानक गहरे घाव होने लग जाते हैं। पूरे शरीर पर कई जगह काले काले चित्ते पड़ जाते हैं। कुछ दिन बाद इन घाव से अपने आप खून भी गिरने लगता है। उसके बाद गाय बैल अचानक बहुत कमजोर हो जाते हैं। अधिक दिन इस बीमारी से संक्रमित रहने और पर्याप्त उपचार नहीं मिलने पर उनकी मृत्यु हो जा रही है। आदिवासी बहुल इलाकों में भी यह बीमारी फैल जाने की खबर है।पशुधन में संक्रामक ढेलेदार त्वचा रोग के कारण अब तक कितने पशुओं की अकाल मौत हो गई है, इसकी किसी ने सुध नहीं ली है। नाही विकासखंड स्तर अथवा जिला स्तर अथवा राज्य स्तर पर ऐसी मौत के कारणों की कोई समीक्षा नहीं की गई है और पशु अकाल मौत मरे जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि असल बात न्यूज़ के द्वारा पिछले 2 वर्षों से Lumpy Skin disease और ग्रामीण इलाकों में उस के ताजा हालात   के बारे में लगातार खबरें जारी की जा रही है लेकिन शायद ही किसी का ध्यान इस ओर गया है। पशुपालन विभाग की ओर से इस बीमारी से निपटने के लिए अब तक शायद ही किसी गांव में टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है।

कहा जा रहा है कि जैव सुरक्षा, जानवरों की आवाजाही को विनियमित करने और रिंग टीकाकरण के माध्यम से बीमारी को और अधिक फैलने से रोका जा सकता है। बीमारी को फैलने से रोकने में हर्बल और होम्योपैथिक दवा के अधिक कारगर साबित होने की जानकारी सामने आ रही है।