बारिश से धान के पौधों में आई नई जान

 

छत्तीसगढ़ में अब तक 1085.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज


रायपुर ।

असल बात न्यूज़।। 

        00 कृषि संवादाता /खेती       किसानी का हाल-चाल


खेतों में धान के पौधे अब बित्ते भर से अधिक ऊंचाई के हो गए हैं। इसे देखकर किसानों में खुशियां हैं और उन्हें अच्छी फसल की उम्मीद है। पौधे बढ़ गए हैं तो जिन किसानों के खेतों में बाड नहीं लगी है उन्हें अपने खेतों की पशुओं से बचाने के लिए  रखवाली करने पर अधिक ध्यान देना पड़ रहा है। खुले में घूमने वाले पशु, मौका मिलते ही फसल को चरने तुरंत खेतों में घुस जाते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के ज्यादातर इलाकों में हालांकि, वातावरण में नमी बनी हुई है और तापमान भी 35 डिग्री से कहीं अधिक नहीं है, लेकिन धूप निकलने से उमस बढ़ गई है और खेतों में पानी भी सूख गया था। ऐसे में धान के पौधों की बाढ़ के लिए पानी की जरूरत बढ़ गई थी। अब दो दिन से बारिश हो रही है तो खेत फिर से लबालब भरने लगे हैं। धान के पौधों में कीड़े लगने की जो आशंका पैदा हो गई थी वह दूर हो गई है और माना जा रहा है कि अब धान के पौधों की बाढ़ तेज गति से हो सकेगी। 

इस साल जिस तरह से बारिश हो रही है उसे संपूर्ण छत्तीसगढ़ में धान की बंपर पैदावार होने की संभावना है। हालांकि अंबिकापुर संभाग में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है लेकिन  किसानों ने अपने अपने साधनों से पानी की व्यवस्था कर ली है और यहां भी खेत लहलहाते दिख रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्रों में धान के पौधों के बित्ते भर से अधिक ऊंचाई के हो जाने की खबर है। उमस और गर्मी बढ़ जाने से खेतों में पानी की जरूरत महसूस हो रही थी जो पानी गिर जाने से पूरी हो गई है।हर जगह बारिश होने से नदी नाले फिर उफान पर आते दिख रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों ने अभी एक दो दिन लगातार बारिश होने की संभावना जाहिर की है। 



बारिश के बारे में हम बता रहे हैं कि सितंबर महीने में अमूमन मानसून के वापस लौटने से बारिश होती है। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य के ज्यादातर हिस्सों में अभी जो बारिश हो रही है यहां मानसून के वापस लौटने से होने वाली बारिश नहीं है। बंगाल की खाड़ी से चक्रवाती तूफान उठा है जिसके फलस्वरूप यह बारिश हो रही है। इसका असर देश ही नहीं दूसरे देशों पर भी कई हिस्सों में भी देखा जा रहा है। इस दौरान दक्षिण छत्तीसगढ़, दक्षिण पूर्व मध्य प्रदेश और विदर्भ में विभिन्न स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जाहिर की गई है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में पिछले 2 दिनों से लगातार बारिश होने से बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा में नदी नाले उफान पर आ गए हैं। कांकेर कोंडागांव नारायणपुर जिले में भी रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इन स्थानों पर इस सीजन में अभी तक सामान्य से अधिक वर्षा हो चुकी है। दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई इलाके अधिक बारिश के चलते संपर्क से कट गए हैं।

राज्य में पिछले एक जून 2022 से अब तक  1085.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में 01 जून से आज 11 सितम्बर तक रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार बीजापुर जिले में सर्वाधिक 2173.5 मिमी और सरगुजा में जिले में सबसे कम 493.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है। राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जून से अब तक सूरजपुर में 805.7 मिमी, बलरामपुर में 782.6 मिमी, जशपुर में 802.0 मिमी, कोरिया में 728.5 मिमी, रायपुर में 796.1 मिमी, बलौदाबाजार में 1017.2 मिमी, गरियाबंद में 1120.8 मिमी, महासमुंद में 1046.0 मिमी, धमतरी में 1175.1 मिमी, बिलासपुर में 1224.0 मिमी, मुंगेली में 1132.0 मिमी, रायगढ़ में 986.0 मिमी, जांजगीर-चांपा में 1172.8 मिमी, कोरबा में 957.4 मिमी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 915.5 मिमी, दुर्ग में 901.2 मिमी, कबीरधाम में 970.6 मिमी, राजनांदगांव में 1039.5 मिमी, बालोद में 1158.6 मिमी, बेमेतरा में 634.5 मिमी, बस्तर में 1615.5 मिमी, कोण्डागांव में 1152.9 मिमी, कांकेर में 1375.5 मिमी, नारायणपुर में 1231.7 मिमी, दंतेवाड़ा में 1639.0 मिमी और सुकमा में 1342.1 मिमी औसत वर्षा रिकार्ड की गई। 

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