‘कोटा फैक्ट्री’ की तरह बांधे नहीं रख पाती ‘क्रैश कोर्स’, अन्नू कपूर की जोरदार एक्टिंग

 


 मुंबई. वेब सीरीज: क्रैश कोर्स
कलाकार: अन्नू कपूर, मोहित सोलंकी, रिधू हारून, अनुष्का कौशिक और रिद्धी कुमार सहित अन्य
ओटीटी: अमेजन प्राइम वीडियो
निर्देशक: विजय मौर्या
अन्नू कपूर की मुख्य भूमिका वाली वेब सीरीज ‘क्रैश कोर्स‘ (Crash Course) अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज कर दी गई है। सीरीज का टाइटल और फिर ट्रेलर देख साफ था कि इसकी कहानी कोचिंग संस्थानों और वहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स पर आधारित है। कोचिंग संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स पर बनी वेब सीरीज ‘कोटा फैक्ट्री‘ को पहले ही दर्शकों ने देखा है। ऐसे में ‘क्रैश कोर्स‘ की तुलना जाहिर तौर पर ‘कोटा फैक्ट्री‘ से की जानी तय थी। क्या वेब सीरीज उम्मीदों पर खरी उतरती है आइए आपको बताते हैं।

कनेक्शन में कमी


‘क्रैश कोर्स‘ की कहानी छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों और कोचिंग संस्थान के मालिकों के बीच चलती है जिसमें कई जगह ढेर सारा ड्रामा दिखता है। यह लगभग साढ़े सात घंटे की वेब सीरीज है। ‘कोटा फैक्ट्री‘ में जीतू भैया एक ऐसे टीचर होते हैं जिन्हें हर स्टूडेंट चाहता है। ‘क्रैश कोर्स‘ में भी ऐसा ही है जहां एके सर और प्रणय पचौरी हैं। वह अपने पढ़ाने के तरीकों से स्टूडेंट्स के बीच वही जादू बिखेरते हैं। जहां जीतू भैया और उनके स्टूडेंट्स को देखते हुए दर्शक सीधे कनेक्ट हो जाते हैं वहीं ‘क्रैश कोर्स‘ में कई जगह इसकी कमी खलती है।

अन्नू कपूर का किरदार


'क्रैश कोर्स' में अन्नू कपूर कोटा में एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक रतनराज जिंदल का किरदार कर रहे हैं। शहर में उनका कोचिंग संस्थान जिस तरह आगे बढ़ता है वह सपना देखने लगते हैं कि एक दिन वह शहर का नाम बदलकर आरजे नगर रखेंगे। अन्नू कपूर एक बिजनेसमैन के रूप में हैं जो अपने छात्रों को हर संभव आईआईटी जेईई में टॉप 10 रैंक में चाहता है। अन्नू कपूर का ध्यान केवल अपने बिजनेस पर होता और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाते हैं। कभी-कभी वह विलेन के रूप में सामने आते हैं जो अपने फायदे के लिए एक छात्र की आत्महत्या का इस्तेमाल करता है। अन्नू कपूर अपने किरदार में जचे हैं और जोरदार अभिनय किया है।

‘क्रैश कोर्स‘ में दिखा ज्यादा ड्रामा


छात्रों की आत्महत्या प्रतियोगिता की दुनिया में एक सच्चाई है। वेब सीरीज में तीन कैंडिडेट्स के जरिए इस कहानी को दिखाया गया है जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा किया जा सकता है जिससे छात्र आत्महत्या पर मजबूर ना हों। ‘कोटा फैक्ट्री‘ आधा खत्म होने तक पूरी तरह बांधे रखती है जबकि ‘क्रैश कोर्स‘ को इसके लिए संघर्ष करना पड़ता है। ‘क्रैश कोर्स‘ का साउंडट्रैक प्रभावशाली है जो हर एक सीन को उतना ही इंटेंस बनाता है।