10 थर लगाने पर 21 लाख का इनाम, मुंबई और ठाणे में इन जगहों पर लगी है सबसे उंची दही हांडी

 


मुंबई. कोविड-19 महामारी के चलते दो साल बाद फिर से मुंबई और ठाणे में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। सुबह से ही गली मोहल्लों में ‘गोविंदा आला रे आला’ की गूंज एक बार फिर सुनाई दे रही है। मुंबई-ठाणे और उससे सटे हिस्सों में युवाओं की टोली दही हांडी फोड़ती हुई नजर आ रही है। पहले की तरह ही इस बार के दही हांडी उत्सव में राजनीतिक दल बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

जन्माष्टमी के मौके पर मुंबई, ठाणे में दशकों से मनाये जाने वाले इस लोकप्रिय उत्सव के लिए लाखों के इनाम रखे गए है। यह इनाम मानव पिरामिड (थर) की उंचाई के आधार पर तय किये गए है। बता दें कि दही हांडी उत्सव में दही से भरी मटकी हवा में लटक रही होती है और मानव पिरामिड बनाकर उसे तोड़ा जाता है।

मुंबई और ठाणे में यहां लगी है सबसे उंची दही-हांडी:

1) ठाणे - संस्कृति युवा प्रतिष्ठान
आयोजक- विधायक प्रताप सरनाईक इनाम- 10 थर के लिए- 21 लाख 9 थर के लिए - 11 लाख

8 थर के लिए - 50 हजार2) ठाणे - मनसे दहीहांडी उत्सव – आयोजक - मनसे नेते अविनाश जाधव इनाम – 10 थर के लिए - 21 लाख 9 थर के लिए - 11 लाख

3) ठाणे - स्वामी प्रतिष्ठान दहीहांडी महोत्सव (बीजेपी) आयोजक - शिवाजी पाटिल इनाम- 9 थर के लिए - 11 लाख 8 थर के लिए - 25 हजार 7 थर के लिए- 10 हजार

4) ठाणे - शिवसेना टेंभी नाका मानाची हांडी मार्गदर्शक - मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इनाम - दो लाख 51 हजार रुपये महिला गोविंदाओं के लिए खास इनाम 5) मुंबई के घाटकोपर में बीजेपी विधायक राम कदम (Ram Kadam) ने भारत की सबसे बड़ी दही हांडी लगाने का दावा किया है। हालांकि इसके इनाम की राशि का खुलासा नहीं किया गया है।

6) मुंबई के वर्ली के जांबोरी मैदान में बड़ी दही हांडी उत्सव का आयोजन किया गया है। जहां बीजेपी नेता किरीट सोमैया भी सृकत करने वाले है।

एक दिन पहले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की कि दही हांडी को साहसिक खेल का दर्जा दिया जाएगा। साथ ही प्रतिभागियों या उनके परिवारों को मानव पिरामिड बनाने के दौरान किसी खिलाड़ी के हताहत होने की स्थिति में मुआवजा दिया जाएगा। जख्मी गोविंदाओं के इलाज का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी।

शिंदे सरकार के इस निर्णय से दही हांडी में शामिल होने वाले युवक खेलकूद कोटे के तहत सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन कर पायेंगे। वहीँ, मानव पिरामिड बनाने के दौरान हादसे का शिकार होने वाले गोविंदाओं की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर उनके परिवार को 10 लाख रूपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। जबकि किसी गोविंदा के गंभीर रूप से घायल हो जाने पर सात लाख रूपये तथा मामूली रूप से घायल होने पर पांच लाख रूपये दिये जाएंगे।