स्वतंत्रता संग्राम की महान विभूति: पंडित सुंदरलाल शर्मा का राजनीतिक - सामाजिक चिंतन " पर वेबीनार का आयोजन

 भिलाई ।

असल बात न्यूज़।।

इंदिरा गांधी शासकीय स्नातकोत्तर कला एवम वाणिज्य महाविद्यालय वैशाली नगर ,भिलाई में   आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में राजनीति विभाग और समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वाधान में  छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम की महान विभूति: पंडित सुंदरलाल शर्मा का राजनीतिक - सामाजिक चिंतन "विषय पर एक दिवसीय वेबिनार आयोजित किया गया ।  गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस एक दिवसीय व्याख्यान में अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य और हमारी  मार्गदर्शक डॉ श्रीमती अलका मेश्राम ने की । इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री पीतांबर सिन्हा( सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र शासकीय महाविद्यालय धमतरी) और श्री चंद्रशेखर देवांगन ( शोधार्थी , सेठ रतनचंद सुराना महाविद्यालय , दुर्ग) थे।

श्री चंद्रशेखर देवांगन जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि देश अपने स्वाधीनता के 75 वर्ष में अमृत महोत्सव माना रहा है और उसकी तुलना पौराणिक काल के अमृत मंथन से की। उन्होंने आगे बताया कि राजनीतिक स्तर पर पंडित सुंदरलाल शर्मा जी ने कैसे गांधीवाद से प्रभावित हो कर कंडेल नहर सत्याग्रह को सफलतापूर्वक संचालित किया । उन्होंने ने जानकारी दी कि पंडित सुंदरलाल शर्मा जी छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वप्नदृष्टा थे तथा उन्हें छत्तीसगढ़ का गांधी कहा जाता है ।

श्री पीतांबर सिन्हा जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि  पंडित सुंदरलाल शर्मा जी ने छत्तीसगढ़ में समाजसुधार का कार्य गांधीजी से पूर्व हरिजनों का प्रवेश राजीवलोचन मंदिर में करा के किया जिसके कारण गांधीजी ने 1932 में आने छत्तीसगढ़ प्रवास में उनको अपना धर्म गुरु स्वीकार किया । उन्होंने बताया कि पंडितजी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे तथा इनके विचारों का प्रभाव छत्तीसगढ़ के कई आंदोलनों पर रहा।

प्राचार्य डॉ श्रीमती अलका मेश्राम जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा की पंडित जी ने समाज के हर क्षेत्र में अपना सराहनीय योगदान दिया । उनके योगदान को देखते हुए छत्तीसगढ की एकमात्र मुक्त विश्व विद्यालय उनके नाम पर रखी गई है तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उनकी स्मृति में साहित्य के क्षेत्र में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने व्याख्यान को सारगर्भित करते हुए कहा की पंडितजी के प्रगतिशील तथा समाजसुधर के विचारों से सीख लेते हुए हमें उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए , यही हमारी उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिससे हम प्रगतिशील भारत तथा छत्तीसगढ़ का निर्माण कर सकते हैं। 

कार्यक्रम का संचालन डॉ किरण रामटेके तथा डॉ चांदनी मरकाम ने किया । धन्यवाद ज्ञापन श्री अमृतेष शुक्ला ने प्रस्तुत किया। वर्चुअल माध्यम से व्याख्यान में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक तथा बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने अपने सहभागिता दी।