जिनके यहां आयकर विभाग का छापा पड़ा है उस समूह ने हाल ही में हुए चुनाव में भी बड़ी राशि नगद खर्च की, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के निवास पर भी की गई तलाशी

 छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग की विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी 

रायपुर, दुर्ग।

असल बात न्यूज़।। 

आयकर विभाग ने छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों जो बहुचर्चित छापा मारा है उसकी अब अधिकृत रिपोर्ट सामने आने लगी है।इस छापे की चपेट में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को भी लिया गया था। बताया जा रहा है कि इस दौरान आयकर विभाग को ऐसे तमाम दस्तावेज, साक्ष्य मिले हैं जिससे भारी बेहिसाब आय, करोड़ों रुपए का बेहिसाब नगद भुगतान और बड़े पैमाने पर बेनामी अचल संपत्तियों की पुष्टि हुई है। वही करोड़ों रुपए नगद मिला है। यह जांच अभी जारी है। यह भी उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग द्वारा छापे की यह कार्रवाई काफी गोपनीय तरीके से शुरू की गई तथा किसी को इसकी कानों कान खबर नहीं होने दी गई। यहां तक की  छत्तीसगढ़ के अधिकारियों को भी इससे दूर रखा गया। कार्रवाई आगे चल रही है। समूह से जुड़े जिन लोगों के यहां छापा मारा गया है उनके द्वारा चुनाव में भी बड़ी नगद राशि खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि जो चुनाव का जिक्र हुआ है वह खैरागढ़ उपचुनाव है अथवा दूसरे राज्यों का उपचुनाव। और यह राशि खैरागढ़ के उपचुनाव में खर्च की गई है अथवा दूसरे राज्यों के चुनाव में।

आयकर विभाग ने 30 जून 2022 को कोयला परिवहन एवं इससे संबंधित गतिविधियों के व्यवसाय वाले एक समूह पर तलाशी एवं जब्ती अभियान चलाया। इस दौरान एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के परिसर को भी तलाशी अभियान में शामिल किया गया था। कुल मिलाकर रायपुर, भिलाई, रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर, सूरजपुर आदि में फैले 30 से अधिक परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया।

तलाशी अभियान के दौरान दोषी ठहराने वाले कई दस्तावेज, खुली अकाउंट शीट्स और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं और उन्हें जब्त कर लिया गया है। समूह द्वारा अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली में राज्य भर में कोयला परिवहन पर गलत तरीके से नियमित कलेक्शन शामिल है जिससे भारी बेहिसाब आय का सृजन होता है। इस तरह के कम समय में 200 करोड़ रुपये से अधिक के कलेक्शन के साक्ष्य मिले हैं। समूह के प्रमुख विश्वसनीय सहयोगियों ने भी इसकी पुष्टि की है। सरकारी अधिकारियों को किए गए कुछ नकद भुगतानों की भी पहचान की गई है।

जब्त किए गए सबूतों से यह भी संकेत मिलता है कि समूह ने कोल वाशरीज की खरीद में लगभग 45 करोड़ रु. रुपये का बेहिसाब नकद भुगतान किया है। इसके अलावा, इसके भी सबूत मिले हैं कि हाल ही में हुए चुनावों के दौरान समूह द्वारा नकद खर्च किया गया है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सकता है कि चुनाव में किया गया यह भुगतान छत्तीसगढ़ में कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव के लिए किया गया अथवा दूसरे राज्यों में हो गए चुनाव के लिए किया गया है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में कुछ महीने पहले राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ विधानसभा का उपचुनाव हुआ है।

तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में संपत्ति के समझौते मिले हैं, जिससे पता चलता है कि अचल संपत्तियों के अधिग्रहण में भारी अघोषित निवेश किया गया है, जिसकी प्रकृति बेनामी प्रतीत होती है। सरकारी अधिकारी से संबंधित कथित मालिकों द्वारा 50 एकड़ अचल संपत्तियों के अधिग्रहण में किए गए निवेश के स्रोत की जांच की जा रही है।

इस तलाशी अभियान के दौरान 9.5 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित नकदी और 4.5 करोड़ रुपये के आभूषण अब तक जब्त किए जा चुके हैं। तलाशी के दौरान एकत्र किए गए दोषी ठहराने वाले सबूतों की प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि समूह ने कई सौ करोड़ रुपए की आय दिखाने से बचने का प्रयास किया है।

मामले में आगे की जांच जारी है। 


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